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SGB में मिला मल्टीबैगर रिटर्न, 300% से ज्यादा बढ़ी वेल्थ; ₹1 लाख के बने ₹4 लाख

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) सरकारी प्रतिभूतियां (government securities) होती हैं, जो सोने के ग्राम में निर्धारित होती हैं। ये फिजिकल सोना रखने का एक विकल्प हैं

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अंशु   
Last Updated- March 18, 2026 | 4:58 PM IST

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 2019-20 की सीरीज-IV के सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) के समय से पहले भुनाने (premature redemption) की कीमत का ऐलान कर दिया है। इस SGB सीरीज को समय से पहले भुनाने का विकल्प चुनने वाले निवेशकों को 17 मार्च 2026 के लिए घोषित लेटेस्ट रिडेप्शन प्राइस के आधार पर लगभग 312 फीसदी का रिटर्न मिला है। RBI के बयान के अनुसार, इस SGB सीरीज को जारी करने की तारीख से पांचवें वर्ष के बाद ही उस तारीख को भुनाया जा सकेगा, जब ब्याज का भुगतान किया जाता है।

समय से पहले भुनाने की कीमत?

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) 2019-20 सीरीज-IV का 17 मार्च, 2026 को समय से पहले भुनाने की कीमत 15,814 रुपये प्रति यूनिट तय किया गया है। रिजर्व बैंक के मुताबिक, यह पिछले तीन कारोबारी दिनों यानी 12 मार्च, 13 मार्च और 16 मार्च, 2026 के सोने के बंद भाव के साधारण औसत पर आधारित है।

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₹1 लाख के बने ₹4 लाख

SGB 2019-20 सीरीज-IV को मूल रूप से 17 सितंबर, 2019 को 3,890 रुपये प्रति ग्राम के भाव पर जारी किया गया था, जबकि ऑनलाइन निवेशकों के लिए यह 3,840 रुपये प्रति ग्राम के डिस्काउंट प्राइस पर उपलब्ध था। ऑनलाइन खरीदे गए बॉन्ड पर समय से पहले भुनाने की तारीख पर लगभग 312 फीसदी का रिटर्न मिला है।

कुछ समझ नहीं आया, कोई बात नहीं। चलिए इसे कैलकुलेशन की मदद से समझते हैं।

एब्सोल्यूट रिटर्न का कैलकुलेशन:

एब्सोल्यूट रिटर्न = समय से पहले इस SGB सीरीज को भुनाने की कीमत – इस SGB सीरीज की शुरुआती कीमत

₹15,814 − ₹3,840 = ₹11,974 (ब्याज को शामिल किए बिना)।

प्रतिशत के रूप में यह होगा: 11,974 ÷ 3,840 × 100 = 311.8%।

लगभग 312% रिटर्न का मतलब है कि यदि किसी निवेशक ने 2019 में इस SGB सीरीज में ₹1 लाख निवेश किया होता, तो उसका निवेश करीब तीन गुना से ज्यादा बढ़कर ₹4 लाख से ज्यादा हो गया होता।

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2.5% ब्याज और बढ़ा देगा रिटर्न

सोने की कीमतों में बढ़ोतरी से होने वाले पूंजीगत लाभ के अलावा, SGB होल्डर्स को शुरुआती निवेश राशि पर 2.5 फीसदी सालाना का निश्चित ब्याज भी मिलता है, जिसका भुगतान हर छह महीने में किया जाता है। इसका मतलब है कि होल्डिंग अवधि के दौरान मिलने वाले कुल ब्याज को शामिल करने पर निवेशकों का कुल रिटर्न और ज्यादा हो जाता है। बता दें कि सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड की परिपक्वता अवधि (maturity period) आठ वर्ष होती है। हालांकि, निवेशकों को पांचवें वर्ष से निर्धारित तारीखों पर समय से पहले बाहर निकलने की अनुमति होती है।

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) क्या है?

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) सरकारी प्रतिभूतियां (government securities) होती हैं, जो सोने के ग्राम में निर्धारित होती हैं। ये फिजिकल सोना रखने का एक विकल्प हैं। निवेशकों को बॉन्ड खरीदते समय नकद भुगतान करना होता है और परिपक्वता (maturity) पर राशि नकद में ही वापस मिलती है। इन गोल्ड बॉन्ड सीरीज को भारत सरकार की ओर से भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) जारी करता है।

First Published : March 18, 2026 | 4:07 PM IST