प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
भारत में छोटे और मध्यम उद्योगों (MSME) को देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। लेकिन कई बार शानदार बिजनेस आइडिया होने के बावजूद, सिर्फ फंड की कमी की वजह से कई स्टार्टअप और छोटे बिजनेस दम तोड़ देते हैं। अगर आप भी अपने बिजनेस को विस्तार देना चाहते हैं या नया काम शुरू करने की सोच रहे हैं और पूंजी की कमी आड़े आ रही है, तो भारत सरकार की कई ऐसी योजनाएं हैं जो आपकी राह आसान बना सकती हैं। इन योजनाओं का मकसद न केवल आर्थिक मदद देना है, बल्कि ‘स्वरोजगार’ को बढ़ावा देना भी है। आइए जानते हैं उन सरकारी स्कीम्स के बारे में जो आपके छोटे बिजनेस के लिए लाइफलाइन साबित हो सकती हैं।
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY) उन लोगों के लिए सबसे लोकप्रिय विकल्प है, जिन्हें बिना किसी गारंटी के लोन की तलाश में है। इस योजना के तहत नॉन-कॉर्पोरेट और गैर-कृषि छोटे व्यवसायों (Non-farm small businesses) को 10 लाख रुपये तक का कर्ज दिया जाता है। इसे तीन भागों में बांटा गया है, ताकि बिजनेस की जरूरत के हिसाब से फंड मिल सके।
इसकी पहली कैटेगरी है ‘शिशु’, जिसमें 50,000 रुपये तक का लोन दिया जाता है। यह उनके लिए है जो अपना काम अभी शुरू ही कर रहे हैं। दूसरी कैटेगरी ‘किशोर’ है, जिसमें 50,000 से लेकर 5 लाख रुपये तक का फंड मिलता है। तीसरी कैटेगरी ‘तरुण’ है, जो 5 लाख से 10 लाख रुपये तक के लोन की सुविधा देती है। मुद्रा लोन की सबसे अच्छी बात यह है कि इसमें आपको बहुत ज्यादा कागजी कार्रवाई के चक्कर में नहीं पड़ना पड़ता और यह कमर्शियल बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों और स्मॉल फाइनेंस बैंकों के जरिए आसानी से मिल जाता है।
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अक्सर बैंक से बड़ा लोन लेने के लिए आपको कोई संपत्ति या सोना गिरवी रखना पड़ता है, जिसे ‘कोलैटरल’ कहते हैं। लेकिन सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट (CGTMSE) एक गेम-चेंजर है। सरकार ने हाल के बजट में इस योजना को और मजबूत किया है। अब सूक्ष्म और लघु उद्योगों को कई मामलों में अधिकतम 10 करोड़ रुपये तक का लोन बिना किसी कोलैटरल के मिल सकता है।
इस स्कीम में भारत सरकार और सिडबी (SIDBI) मिलकर काम करते हैं। अगर कोई छोटा कारोबारी लोन चुकाने में असमर्थ रहता है, तो उसकी गारंटी यह ट्रस्ट लेता है। इससे बैंकों का रिस्क कम हो जाता है और वे छोटे कारोबारियों को लोन देने में हिचकिचाते नहीं हैं। हालिया आंकड़ों के मुताबिक, सरकार ने इस फंड में अतिरिक्त पूंजी डालकर लोन की लागत को भी 1% तक कम करने का प्रयास किया है, जिससे छोटे उद्यमियों पर ब्याज का बोझ कम हो सके।
अगर आप विनिर्माण (Manufacturing) या सेवा क्षेत्र (Service Sector) में कुछ नया शुरू करना चाहते हैं, तो प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) एक बेहतरीन विकल्प है। इस योजना की खासियत यह है कि इसमें आपको सिर्फ लोन ही नहीं मिलता, बल्कि भारी सब्सिडी भी दी जाती है। विनिर्माण क्षेत्र के लिए 50 लाख रुपये और सेवा क्षेत्र के लिए 20 लाख रुपये तक के प्रोजेक्ट पर सरकार 15% से 35% तक की सब्सिडी देती है। यह सब्सिडी आपकी कैटेगरी और इलाके (शहरी या ग्रामीण) पर निर्भर करती है।
इसी तरह, महिलाओं और SC/ST उद्यमियों के लिए ‘स्टैंड-अप इंडिया’ स्कीम चलाई जा रही है। इसका लक्ष्य है कि हर बैंक शाखा कम से कम एक महिला और एक अनुसूचित जाति/जनजाति के उद्यमी को 10 लाख से 1 करोड़ रुपये तक का लोन दे। ये योजनाएं विशेष रूप से उन लोगों के लिए तैयार की गई हैं, जो समाज के उन वर्गों से आते हैं जिनके पास संसाधनों की कमी है, लेकिन उनमें उद्यमिता का जुनून है। इन स्कीम्स के जरिए सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि फंड की कमी किसी के सपनों के आड़े न आए।