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आधार कार्ड को न समझें जन्म प्रमाण पत्र, UIDAI ने उम्र के सबूत को लेकर जारी की नई चेतावनी!

UIDAI ने स्पष्ट किया है कि आधार केवल पहचान का जरिया है, उम्र का कानूनी प्रमाण नहीं। किसी भी प्रकार का जन्मतिथि विवाद की जिम्मेदारी कार्ड धारक की होगी, आधार की नहीं

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ऋषभ राज   
Last Updated- April 27, 2026 | 7:44 PM IST

यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (UIDAI) ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि आधार कार्ड आपकी पहचान का पुख्ता प्रमाण तो है, लेकिन इसे जन्मतिथि या उम्र के सबूत के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। UIDAI के इस स्पष्टीकरण के बाद अब सरकारी और निजी कामों में आधार के इस्तेमाल को लेकर बनी उलझन काफी हद तक दूर हो गई है।

अथॉरिटी ने यह जोर देकर कहा है कि आधार का मुख्य काम किसी व्यक्ति की पहचान की पुष्टि करना है। चूंकि आधार अधिनियम 2016 में इसे केवल पहचान पत्र के रूप में मान्यता दी गई है, इसलिए जन्मतिथि के वेरिफिकेशन के लिए इसकी कानूनी वैधता सीमित रहती है। आसान शब्दों में कहें तो अगर किसी काम के लिए उम्र का सबूत मांगा जाता है, तो वहां आधार के बजाय दूसरे वैध दस्तावेज देना जरूरी होगा।

उम्र को लेकर विवाद हुआ तो जिम्मेदारी आपकी

UIDAI ने अपने स्पष्टीकरण में एक और अहम बात कही है। अथॉरिटी के मुताबिक, अगर आधार में दर्ज जन्मतिथि को लेकर कोई विवाद होता है, तो उसे सही साबित करने की पूरी जिम्मेदारी खुद आधार कार्ड धारक की होगी। आधार जारी करने वाली इस संस्था का कहना है कि आधार सिर्फ एक नंबर है, जिसका इस्तेमाल प्रमाणीकरण के जरिए पहचान साबित करने के लिए किया जाता है।

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अक्सर देखा गया है कि लोग स्कूल में दाखिले से लेकर पेंशन योजनाओं तक में आधार को जन्म प्रमाण पत्र की तरह इस्तेमाल करते हैं। लेकिन नए नियमों और स्पष्टीकरण के बाद अब संस्थाएं आधार को उम्र के पुख्ता सबूत के तौर पर मानने से मना कर सकती हैं। ऐसे में लोगों को जन्म प्रमाण पत्र, मार्कशीट या दूसरे सरकारी दस्तावेजों का सहारा लेना होगा, जो खास तौर पर जन्मतिथि प्रमाणित करने के लिए बनाए गए हैं।

क्यों आधार है इतना खास?

आधार दरअसल 12 अंकों की एक यूनिक पहचान संख्या है, जो भारत के निवासियों को उनकी व्यक्तिगत और बायोमेट्रिक जानकारी के आधार पर जारी की जाती है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह ‘डुप्लीकेसी’ यानी फर्जीवाड़े को रोकने में मदद करता है। बायोमेट्रिक डेटा, जैसे उंगलियों के निशान और आंखों की पुतली (आईरिस) के स्कैन की वजह से एक व्यक्ति का सिर्फ एक ही आधार बन सकता है।

आधार का असली मकसद सरकारी योजनाओं का फायदा सीधे जरूरतमंदों तक पहुंचाना है। जैसे रसोई गैस (LPG) की सब्सिडी, राशन या स्कॉलरशिप का पैसा सीधे बैंक खाते में भेजना, इसे ‘डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर’ (DBT) कहा जाता है। इससे बीच में होने वाला भ्रष्टाचार और बिचौलियों की भूमिका काफी हद तक खत्म हो गई है। साथ ही, आधार ने बैंक खाता खोलने या नया सिम कार्ड लेने जैसी प्रक्रियाओं को ‘ई-केवाईसी’ के जरिए काफी आसान और लगभग कागज रहित बना दिया है।

First Published : April 27, 2026 | 7:44 PM IST