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RBI के फैसले के बाद आपकी EMI बदलेगी या नहीं? 50 लाख के होम लोन का पूरा हिसाब जानिए

RBI ने लगातार तीसरी बार रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखा है, जिससे 50 लाख रुपये के होम लोन की EMI फिलहाल नहीं बदलेगी, लेकिन भविष्य में ब्याज दरों की समीक्षा पर असर पड़ सकता है।

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मानसी वार्ष्णेय   
Last Updated- June 05, 2026 | 1:12 PM IST

Home Loan EMI: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने जून 2026 की बैठक में रीपो रेट को 5.25 फीसदी पर स्थिर रखने का फैसला किया है। लगातार तीसरी बार केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। ऐसे में करोड़ों होम लोन ग्राहकों के लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि उनकी EMI में कोई बदलाव होगा या नहीं।

RBI के इस फैसले का मतलब है कि फिलहाल होम लोन की ब्याज दरों पर तत्काल कोई असर नहीं पड़ेगा। हालांकि इसका प्रभाव हर ग्राहक पर एक जैसा नहीं होगा, क्योंकि यह इस बात पर निर्भर करता है कि उसका लोन फिक्स्ड रेट पर है या फ्लोटिंग रेट पर।

50 लाख रुपये के Home Loan पर कितनी बनेगी EMI?

50 लाख रुपये होम लोन का हिसाब राशि
लोन की रकम ₹50,00,000
ब्याज दर 8.5% सालाना
लोन की अवधि 20 साल
हर महीने की EMI ₹44,259
20 साल में चुकाया गया कुल ब्याज ₹55,22,156
20 साल में बैंक को कुल भुगतान ₹1,06,22,156

 

EMI से जुड़ी अहम जानकारी राशि
हर महीने EMI ₹44,259
एक साल में कुल EMI भुगतान ₹5,31,108
पूरे 20 साल में कुल भुगतान ₹1,06,22,156
इसमें ब्याज की रकम ₹55,22,156
इसमें लोन की मूल रकम ₹50,00,000

50 लाख रुपये का होम लोन 20 साल के लिए 8.5% ब्याज पर लेने पर आपको हर महीने ₹44,259 EMI देनी होगी। पूरे लोन के दौरान आप बैंक को ₹55.22 लाख ब्याज और कुल ₹1.06 करोड़ से ज्यादा रकम चुकाएंगे।

यह पढ़ें: पश्चिम एशिया संकट के बीच RBI का बड़ा कदम; ग्रोथ अनुमान घटाया, FY27 में अब 6.6% की दर से बढ़ेगी अर्थव्यवस्था

क्या सभी Home Loan ग्राहकों की EMI एक साथ बदलती है?

Ezeepay के MD एवं CMO राशिद अली के मुताबिक RBI की मौद्रिक नीति का सबसे सीधा असर होम लोन लेने वाले ग्राहकों पर पड़ता है, लेकिन रीपो रेट में बदलाव या उसे स्थिर रखने का मतलब यह नहीं है कि सभी उधारकर्ताओं की EMI तुरंत बदल जाएगी।

उन्होंने कहा कि जिन ग्राहकों का लोन फ्लोटिंग ब्याज दर से जुड़ा है, उनके मामले में बैंक या हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां समय-समय पर रीपो रेट आधारित बेंचमार्क के अनुसार ब्याज दरों की समीक्षा करती हैं। ऐसे में EMI या लोन की अवधि में बदलाव देखने को मिल सकता है। वहीं फिक्स्ड रेट होम लोन लेने वाले ग्राहकों पर ऐसे फैसलों का असर सीमित रहता है।

छोटी ब्याज दर का बदलाव भी डाल सकता है बड़ा असर

राशिद अली का कहना है कि 50 लाख रुपये जैसे बड़े होम लोन में ब्याज दर में मामूली बदलाव भी लंबे समय में कुल ब्याज भुगतान पर बड़ा प्रभाव डाल सकता है। इसलिए ग्राहकों को केवल EMI पर ही नहीं, बल्कि पूरे लोन की लागत और बची हुई अवधि पर भी नजर रखनी चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि सभी बैंक RBI के फैसलों का फायदा या असर एक ही समय पर ग्राहकों तक नहीं पहुंचाते। कई बार बैंक अपनी फंडिंग लागत, लिक्विडिटी की स्थिति और आंतरिक नीतियों के आधार पर ब्याज दरों में बदलाव लागू करते हैं। यही वजह है कि अलग-अलग बैंकों के ग्राहकों पर प्रभाव अलग हो सकता है।

Home Loan EMI: स्थिर ब्याज दरों से मिलेगा सपोर्ट

LoansJagat के को-फाउंडर हर्ष ग्रोवर का कहना है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए RBI का रीपो रेट को स्थिर रखना एक संतुलित फैसला है। उनके अनुसार रीपो रेट 5.25 फीसदी और बैंक रेट 5.50 फीसदी पर बनाए रखते हुए केंद्रीय बैंक ने न्यूट्रल रुख बरकरार रखा है।

उन्होंने कहा कि अप्रैल के बाद वैश्विक अर्थव्यवस्था में काफी बदलाव आया है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी हुई है और सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ा है। इसके चलते महंगाई दर 5.1 फीसदी तक पहुंचने का अनुमान है, जो पहले के अनुमान से करीब 50 बेसिस प्वाइंट अधिक है।

हर्ष ग्रोवर के मुताबिक वित्त वर्ष 2026-27 के लिए GDP वृद्धि दर का अनुमान 6.9 फीसदी से घटकर 6.6 फीसदी रहने का अनुमान है। इसके बावजूद निजी खपत और निवेश मजबूत बने हुए हैं, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था को सहारा मिल रहा है।

विदेशी मुद्रा भंडार और पूंजी प्रवाह से मिलेगी मजबूती

ग्रोवर ने बताया कि भारत के पास 682.2 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार है, जो लगभग 11 महीने के आयात को कवर करने के लिए पर्याप्त माना जाता है। इसके अलावा FAR रूट के तहत 15, 30 और 40 वर्ष की सरकारी प्रतिभूतियों को शामिल करने और सार्वजनिक क्षेत्र की उधारी के लिए रियायती विदेशी मुद्रा स्वैप सुविधा उपलब्ध कराने जैसे कदम पूंजी प्रवाह को बढ़ावा देने में मदद करेंगे।

उनका मानना है कि ब्याज दरों में स्थिरता आने वाले महीनों में क्रेडिट ग्रोथ को समर्थन देगी और आर्थिक गतिविधियों को गति देने में सहायक साबित होगी।

Home Loan ग्राहकों को अब क्या करना चाहिए?

विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा आर्थिक माहौल में ग्राहकों को अपने होम लोन की नियमित समीक्षा करनी चाहिए। यदि भविष्य में ब्याज दरों में कमी का लाभ मिलता है, तो बैलेंस ट्रांसफर, रीफाइनेंसिंग या आंशिक प्री-पेमेंट जैसे विकल्पों पर विचार किया जा सकता है।

फिलहाल RBI के ताजा फैसले के बाद 50 लाख रुपये के होम लोन वाले ग्राहकों को राहत मिली है, क्योंकि उनकी EMI में किसी तरह की बढ़ोतरी नहीं होगी। हालांकि आने वाले महीनों में महंगाई, वैश्विक परिस्थितियां और बैंकिंग सेक्टर की रणनीति यह तय करेगी कि लोन की लागत किस दिशा में जाती है।

रीपो रेट क्या होता है?

रीपो रेट वह ब्याज दर है जिस पर RBI वाणिज्यिक बैंकों को अल्पकालिक अवधि के लिए धन उपलब्ध कराता है। जब बैंकों को नकदी की जरूरत होती है तो वे RBI से उधार लेते हैं। RBI जिस दर पर यह कर्ज देता है, उसे रीपो रेट कहा जाता है।

आमतौर पर रीपो रेट घटने पर लोन सस्ते होने की संभावना बढ़ जाती है, जबकि रेपो रेट बढ़ने पर होम लोन, ऑटो लोन और अन्य ऋण महंगे हो सकते हैं। इसलिए RBI की हर मौद्रिक नीति बैठक पर होम लोन ग्राहकों की खास नजर रहती है।

First Published : June 5, 2026 | 1:12 PM IST