facebookmetapixel
रेट कट का असर! बैंकिंग, ऑटो और रियल एस्टेट शेयरों में ताबड़तोड़ खरीदारीTest Post कैश हुआ आउट ऑफ फैशन! अक्टूबर में UPI से हुआ अब तक का सबसे बड़ा लेनदेनChhattisgarh Liquor Scam: पूर्व CM भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य को ED ने किया गिरफ्तारFD में निवेश का प्लान? इन 12 बैंकों में मिल रहा 8.5% तक ब्याज; जानिए जुलाई 2025 के नए TDS नियमबाबा रामदेव की कंपनी ने बाजार में मचाई हलचल, 7 दिन में 17% चढ़ा शेयर; मिल रहे हैं 2 फ्री शेयरIndian Hotels share: Q1 में 19% बढ़ा मुनाफा, शेयर 2% चढ़ा; निवेश को लेकर ब्रोकरेज की क्या है राय?Reliance ने होम अप्लायंसेस कंपनी Kelvinator को खरीदा, सौदे की रकम का खुलासा नहींITR Filing 2025: ऑनलाइन ITR-2 फॉर्म जारी, प्री-फिल्ड डेटा के साथ उपलब्ध; जानें कौन कर सकता है फाइलWipro Share Price: Q1 रिजल्ट से बाजार खुश, लेकिन ब्रोकरेज सतर्क; क्या Wipro में निवेश सही रहेगा?Air India Plane Crash: कैप्टन ने ही बंद की फ्यूल सप्लाई? वॉयस रिकॉर्डिंग से हुआ खुलासा

नियंत्रण से बाहर जाता अमेरिकी ‘खेल’

Last Updated- December 07, 2022 | 4:45 AM IST

भारतीय क्रिकेट को बेहतरीन स्पिनर्स के लिए जाना जाता है। लेकिन अमेरिकी राजनीति और कारोबार के स्पिन डॉक्टरों से उनकी कोई तुलना नहीं की जा सकती। 


वे इसमें विशेषज्ञ होते हैं कि सच्चाई बाहर न निकलने पाए। इस तरह के कुछ बेहतरीन खिलाड़ी अमेरिका के ह्वाइट हाउस में नियुक्त हैं। इसका उल्लेख पूर्व प्रेस सेक्रेटरी स्काट मैकक्लेलन द्वारा लिखी गई पुस्तक ‘ह्वाट हैप्पेन्ड: इनसाइड द बुश ह्वाइट हाउस ऐंड वाशिंगटंस कल्चर आफ डिसेप्शन’ में किया गया है।

इसमें अंदर चलने वाली विभिन्न गतिविधियों का वर्णन किया गया है कि किस तरह से राष्ट्रपति के नेतृत्व में शालीन तरीके से राजनीतिक दुष्प्रचार किया गया। इसका उद्देश्य जनमत को प्रभावित करना और इराक के साथ युध्द करने के सही कारण पर पर्दा डालना था।

तरीका यह था कि कुछ शालीन मुहावरों का प्रयोग किया जाए जिसमें थोड़ी सी सच्चाई हो और कुछ हकीकतों को इसमें से निकाल दिया जाए। इसके साथ ही यह भी होता है कि अगर जरूरी हो तो हकीकतों से मुंह मोड़ लिया जाए तथा इस तरीके को भी अपनाया जा सकता है कि अगर कोई विशेष सवाल उठता है तो उसे महत्वपूर्ण न बताते हुए उसका जवाब न दिया जाए।

अंतिम सवाल तब सामने आया जब कुछ सप्ताह पहले 21 मई 2008 को फाइनैंशियल टाइम्स (एफटी) में मूडी रिपोर्ट प्रकाशित हुई। यह रिपोर्ट एक रेटिंग कंपनी द्वारा ‘निरंतर ऋण अनुपात दायित्व (सीपीडीओ)’ खासकर विशेष ऋण डेरिवेटिव के बारे में दी गई एएए रेटिंग थी। ऐसा लगता है कि जोखिम के विश्लेषण में प्रयोग किए गए कंप्यूटर प्रोग्राम में कुछ त्रुटि थी और इसके चलते इस मुद्दे पर उच्च रेटिंग मिल गई।

अगर प्रोग्राम की कोडिंग सही होती तो रेटिंग बहुत कम होती। इस त्रुटि को हाल ही में 2007 में खोजा गया। इसके बाद कंप्यूटर प्रोग्रामिंग को ठीक किया गया, लेकिन रेटिंग को बरकरार रखने के लिए रेटिंग मॉडल में परिर्वतन किया गया, जबकि इस साल की शुरुआत में ऋण डेरिवेटिव्स में कमी आनी चाहिए थी, यह रुटीन में आ गया। ( इस सिक्योरिटीज ने तब तक अपना 60 प्रतिशत मूल्य खो दिया था)।

जब फाइनैंशियल टाइम्स ने इसके बारे में जानकारी हासिल की तो उसे पता चला कि मूडी ने यह जानकारी दी कि वह अपने विश्लेषण के मॉडल में निरंतर बदलाव करता रहता है, जिसके तमाम कारण होते हैं। लेकिन यह असंगत होगा कि मूडी के विश्लेषणात्मक मानक और कंपनी की नीतियों में दिखावटी त्रुटियों के चलते तरीकों में बदलाव हो। इस खास मामले में यह पाया गया कि असंगतता के सवाल की बहुत सफाई से उपेक्षा की गई।

बाद में वाल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट (मिंट, मई 29, 2008) में सुझाव दिया गया था कि अगर क्रेडिट रेटिंग की गणना में इस तरह की गड़बड़ी होती है तो उन कर्मचारियों को निकाला जा सकता है। संयोग से मूडी और स्टैंडर्ड ऐंड पूअर दोनों के खिलाफ सिक्योरिटी ऐंड एक्सचेंज कमीशन नियामक जांच कर रहा है।

इसमें ढांचागत उत्पादों, नीतियों से जुडे मसलों और उस प्रक्रिया- जिसके माध्यम से रेटिंग करने वालों ने खामियां पाईं, किस तरह से उन्होंने उसे खोजा तथा रेटिंग को सही करने के लिए उन्होंने क्या किया, इसकी जांच की जा रही है। इस जांच से सब प्राइम मार्गेज के चलते ऋण डेरीवेटिव्स की कीमतों में हुई तेजी से गिरावट के बारे में जानकारी ली जा रही है।

गणितीय वित्त के छात्रों के लिए इस मामले से एक और दिलचस्प बात निकलकर सामने आती है। उपकरणों की जटिलता के रूप में, खासकर डेरिवेटिव्स तेजी से बढ़े हैं जो कंप्यूटर माडलों में उनके जोखिम मूल्य निर्धारण और मूल्यांकन बहुत ही उपयोगी हो सकते हैं। ज्यादातर जटिल उपकरण रॉकेट साइंटिस्टों ने तैयार किए हैं। कंप्यूटिंग शक्ति के अभाव में सर्वव्यापक और सस्ते उपकरण नहीं मिल सकेंगे।

इस घटना से यही सीख मिलती है कि रेटिंग मॉडलों का प्रयोग करने वालों के पास इस बात का कच्चा खाका भी नहीं होता कि रेटिंग में क्या होगा, ब्लैक बाक्स इसके जवाब में वास्तव में क्या कहता रहा। हम लोग आईटी सिस्टम से जो भी परिणाम आते हैं उस पर पूरा विश्वास करते हैं जो इस समय अधिकतर बैंकों के लेन-देन में लागू है। मैं व्यक्तिगत रूप से उन गणनाओं के लिए कंप्यूटर मॉडल्स इस्तेमाल करने में असहज महसूस करता हूं, जिसमें अनुमानित आंकड़ों की बात होती है।

मेरे तमाम साथी ऐसे हैं, जो इसकी ओर देखना भी नहीं पसंद करते हैं। मुझे आश्चर्य होता है कि हम बचपन से ही गणना के लिए कंप्यूटर का प्रयोग करने लगते हैं, बजाय इसके कि गिनती और पहाड़े का प्रयोग करके गणनाएं करें। संयोग से वारेन बफेट, जो निवेश सलाह के बारे में अग्रदूत माने जाते हैं, उन्होंने भी मशीनी गणनाओं पर संदेह करते हुए सामान्य कैलकुलेटर के अलावा अपने निवेश निर्णयों में किसी भी अन्य मशीनी प्रणाली का इस्तेमाल नहीं किया।

लेकिन एक बार फिर राजनीतिक स्पिन विशेषज्ञों की ओर लौटें तो एक आश्चर्य यह भी है कि ओसामा बिन लादेन भी इस कला में माहिर है। जैसा कि जो केलिन ने टाइम में हाल ही में (2 जून, 2008) लिखा था कि 2004 के अमेरिका में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव के पहले लादेन ने एक वीडियो टेप जारी किया, जो बुश के लिए बहुत जटिल था।

इस टेप ने उनके फिर से राष्ट्रपति चुने जाने में बहुत मदद की। सीआईए के विश्लेषकों का मानना है कि वीडियो टेप का मकसद बुश को फिर से चुने जाने में सहयोग करना था। बहरहाल सवाल यह है कि अलकायदा को इससे क्या हासिल हुआ? इस तरह से स्पिनिंग की कला कुछ मुद्रा डेरिवेटिव्स के मामले में बहुत ही सामयिक है।

First Published - June 10, 2008 | 11:10 PM IST

संबंधित पोस्ट