facebookmetapixel
रेट कट का असर! बैंकिंग, ऑटो और रियल एस्टेट शेयरों में ताबड़तोड़ खरीदारीTest Post कैश हुआ आउट ऑफ फैशन! अक्टूबर में UPI से हुआ अब तक का सबसे बड़ा लेनदेनChhattisgarh Liquor Scam: पूर्व CM भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य को ED ने किया गिरफ्तारFD में निवेश का प्लान? इन 12 बैंकों में मिल रहा 8.5% तक ब्याज; जानिए जुलाई 2025 के नए TDS नियमबाबा रामदेव की कंपनी ने बाजार में मचाई हलचल, 7 दिन में 17% चढ़ा शेयर; मिल रहे हैं 2 फ्री शेयरIndian Hotels share: Q1 में 19% बढ़ा मुनाफा, शेयर 2% चढ़ा; निवेश को लेकर ब्रोकरेज की क्या है राय?Reliance ने होम अप्लायंसेस कंपनी Kelvinator को खरीदा, सौदे की रकम का खुलासा नहींITR Filing 2025: ऑनलाइन ITR-2 फॉर्म जारी, प्री-फिल्ड डेटा के साथ उपलब्ध; जानें कौन कर सकता है फाइलWipro Share Price: Q1 रिजल्ट से बाजार खुश, लेकिन ब्रोकरेज सतर्क; क्या Wipro में निवेश सही रहेगा?Air India Plane Crash: कैप्टन ने ही बंद की फ्यूल सप्लाई? वॉयस रिकॉर्डिंग से हुआ खुलासा

डिजिटल डाके से डरा बॉलीवुड

Last Updated- December 07, 2022 | 10:01 AM IST

रजत बड़जात्या जब हेलसिंकी (फिनलैंड) गए तो वे वहां यह देखकर हैरान रह गए कि करीब 15,000 भारतीय परिवार बॉलीवुड की फिल्में देख सक रहे हैं। 


यह स्थिति तो तब है जब वहां न तो कोई प्रोडक्शन कंपनी हिंदी फिल्मों के निर्माण से जुड़ी थी और न ही वहां कोई कंपनी हिंदी फिल्मों के वितरण के कारोबार में लगी थी। बड़जात्या का कहना है, ‘ये परिवार एक ऐसी वेबसाइट के जरिये बॉलीवुड की फिल्मों को देख रहे हैं जो पाइरेटेड (अवैध रुप से नकल की गई) सामग्री परोसती है।’

बड़जात्या कहते हैं कि जो निर्माता करोड़ों रुपये खर्च करके फिल्म निर्माण करते हैं और फिल्म के प्रचार के लिए पानी की तरह पैसा बहाते हैं, उनको तो खुलेआम चूना लगाया जा रहा है। इसके साथ ही बड़जात्या को एक बात और महसूस हुई, वह यह कि दुनिया भर में बसे भारतीयों के बीच बॉलीवुड की फिल्मों की मांग और आपूर्ति में खासा अंतर है। वैसे बड़जात्या मनोरंजन के कारोबार से बहुत करीब से जुड़े हैं और हिंदी फिल्मों के जाने-माने बैनर ‘राजश्री प्रोडक्शंस’ की डिजिटल कंपनी ‘राजश्री मीडिया’ के प्रबंध निदेशक हैं।

फिलहाल बड़ताज्या बहुत बढ़िया कारोबार कर रहे हैं और उनका कारोबार अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन में फैला हुआ है। बड़जात्या की सफलता अपनी कहानी खुद बयां करती है। राजश्री की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘हम आपके हैं कौन’ को अब तक 5,00,000 बार देखा जा चुका है और इंटरनेट पर इसको 4.99 डॉलर में डाउनलोड किया जा सकता है। वेबसाइट पर 6,000 घंटे से भी ज्यादा समय की बढ़िया वीडियो सामग्री उपलब्ध है जिनको इस क्षेत्र की भारत की जानी मानी कंपनियों से लाइसेंस भी मिला हुआ है।

इन वीडियो को 4.99 डॉलर से लेकर 9.99 डॉलर चुकाकर डाउनलोड किया जा सकता है। इसके अलावा बड़जात्या ने तीन-तीन मिनट के वेबियोसोड्स और मेबियोसोड्स भी तैयार किए हैं। इंटरनेट पर तीन मिनट की इन क्लिप को आप मुफ्त में डाउनलोड कर सकते हो और यदि आप ‘आइडिया’ के ग्राहक हैं तो आप मोबाइल पर भी इन क्लिप्स को बिना कुछ खर्च किए डाउनलोड कर सकते हैं। इंटेलेक्चुअल प्रोपर्टी की चोरी करना मीडिया और मनोरंजन उद्योग के लिए कोई नई बात नहीं है। लेकिन अब जिस दिक्कत ने दस्तक दी है, वह अलग और नई किस्म की है।

हाल में आए एक अध्ययन के आंकड़ों के मुताबिक पाइरेसी की वजह से भारतीय मनोरंजन उद्योग को हर साल तकरीबन 4 अरब डॉलर का नुकसान उठाना पड़ रहा है और इस कारण 8,00,000 लाख नौकरियां कम हो रही हैं। वैसे अभी तक कई बड़ी कंपनियां इंटरनेट के रास्ते दर्शकों तक नहीं पहुंची हैं। लेकिन अब राजश्री मीडिया, यूटीवी, यशराज स्टूडियोज और शेमारू एंटरटेनमेंट जैसी कई बड़ी कंपनियां जल्द ही इंटरनेट के जरिये बड़े पैमाने पर कारोबार करने की योजना बना रही हैं। गौरतलब है कि भारत में 50 लाख घरों में इंटरनेट कनेक्शन है।

यूटीवी मोशन पिक्चर्स के सीईओ सिद्धार्थ कपूर कहते हैं कि ब्रॉडबैंड का दायरा बढ़ता जा रहा है। पहले इसने लोगों तक पाइरेटेड म्यूजिक पहुंचाया और अब इस कड़ी में फिल्मों की बारी है। वह बताते हैं कि पाइरेटेड फिल्मों से फिल्म निर्माताओं को तो नुकसान हो ही रहा है साथ ही अधिकृत रिटेलरों को भी घाटा उटाना पड़ रहा है। जेपी मॉर्गन की एक रिपोर्ट के मुताबिक बॉलीवुड और गैर बॉलीवुड सामग्री का अमेरिका सबसे बड़ा बाजार है। अमेरिका में तकरीबन 2,00,000 भारतीय ‘मिलियनेयर’ हैं और इसके साथ ही सिलिकॉन वैली में भी संपन्न भारतीयों की अच्छी-खासी संख्या है।

यूटीवी के कपूर बताते हैं कि डिजिटल कारोबार में हमारा पहला लक्ष्य विदेशी ग्राहकों को आकर्षित करना रहेगा। फिल्म निर्माण कंपनियों के अधिकारी म्यूजिक कंपनियों द्वारा पाइरेसी को लेकर न उठाए गए गंभीर कदमों से सीख ले सकते हैं। यह बात किसी से छिपी नहीं रह सकी है कि पाइरेसी की वजह से म्यूजिक इंडस्ट्री को भी बहुत नुकसान हुआ है। दरअसल बड़जात्या ने इस खतरे को 2006 में ही भांप लिया था। उन्होंने दुनियाभर में फैले तकरीबन 2.5 करोड़ भारतीयों को ध्यान में रखते हुए अपने बैनर की फिल्म ‘विवाह’ को इंटरनेट पर भी रिलीज किया था।

बड़जात्या का कहना है कि सभी दर्शकों तक फिल्म पहुंचाना मुश्किल काम है और एनआरआई दर्शकों का एक बहुत बड़ा वर्ग है जो अपनी भाषा में फिल्में देखना चाहता है। बड़जात्या इन दर्शकों तक फिल्म पहुंचाने के लिए इंटरनेट को सबसे बढ़िया माध्यम मानते हैं। वह बताते हैं कि इसके जरिये लगभग 51 फीसदी एनआरआई दर्शक ों तक फिल्मों को आसानी से पहुंचाया जा सकता है। यूटीवी के कपूर की राय भी बड़जात्या से जुदा नहीं है। कपूर का कहना है कि ब्रॉडबैंड फिल्म निर्माताओं के लिए फायदे की सौगात भी साबित हो रहा है। उनके मुताबिक पाइरेटेड सीडी की कीमत में ही इंटरनेट पर फिल्म मिल जाती है।

वह बताते हैं कि यूटयूब जैसी वेबसाइट ने वीडियो शेयरिंग को बहुत आसान बना दिया है। हम कुछ सामग्री को लेकर वेबसाइटों को आपत्ति भी जताते हैं और ये वेबसाइट उन आपत्तियों का जवाब भी देती हैं। लेकिन इन वीडियो शेयरिंग वेबसाइटों की बढ़ती संख्या से इन पर नजर रखना मुश्किल होता जा रहा है, खासकर कुछ अवैध सामग्री को लेकर इन पर नजर रखने में काफी दिक्कतें आ रही हैं। प्राइसवाटरहाउस कूपर्स के एक अनुमान के मुताबिक वर्ष 2010 तक भारत में बॉक्स ऑफिस से होने वाली कमाई 7.4 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगी वहीं डाउनलोडिंग से होने वाली आमदनी भी बढ़कर 1.4 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगी।

यूटीवी भी इस मामले में अपनी रणनीति दुरुस्त करने में लगी हुई है। कंपनी खासकर कीमत और अपने इंटरनेट ग्राहकों के लिए फिल्म रिलीज करने के शेडयूल की नीति पर दोबारा से सोच रही है। इसके अलावा कंपनी इंटरनेट पर डाटा सिक्योरिटी और डिस्ट्रीब्यूशन को लेकर भी खासी गंभीर है। कपूर बताते हैं कि हम कई तकनीकी कंपनियों से बात कर रहे हैं जिससे इंटरनेट के जरिये फिल्में दिखाने की प्रक्रिया को आसान बनाया जा सके और इसके  प्रबंध के लिए सही रास्ते की तलाश की जा रही है।

इस मामले में फिल्म उद्योग के लिए तकनीक बहुत सहायक सिद्ध होने वाली है। पियर-टू-पियर (पीटूपी) युवाओं के  बीच खासा  लोकप्रिय होता जा रहा है। इसके जरिये एक कंप्यूटर से दूसरे कंप्यूटर में कॉपी करने में सुविधा होती है। पीटूपी नेटवर्क किसी सेंट्रल सर्वर पर काम नहीं करता, इसलिए इस पर नजर रखना काफी मुश्किल है, इसलिए इससे निजात पाने का भी कोई रास्ता ढूंढना आसान नहीं है। उदाहरण के तौर पर जब ‘द मैट्रिक्स रिलोडेड’ रिलीज हुई थी, तब चोरों (इंटरनेट पर फिल्म को अवैध तरीके से दिखाने वालों ने) ने ‘बिट टोरेंट’ नाम के फाइल शेयरिंग कंप्यूटर प्रोग्राम का प्रयोग करके रिलीज के तीन घंटे के भातर ही फिल्म को मुफ्त में डाउनलोड कर लिया था।

‘सेफनेट’ के बिजनेस हेड राणा गुप्ता बताते हैं कि इस तरह की घटनाओं से फिल्म के बॉक्स ऑफिस पर प्रदर्शन और डीवीडी की बिक्री पर पड़ने वाले प्रभाव का अंदाजा लगाना मुश्किल है लेकिन यदि ऐसी घटनाओं से बचा जाए तो निश्चित तौर पर मुनाफे में इजाफा होना तय है। इस साल के शुरू में ही ‘वाल्ट डिज्नी’ की ‘पिक्सर’ ने अपनी एनिमेशन फिल्म ‘रैटाटुइल’ को रिलीज से 10 दिन पहले ही इंटरनेट पर रिलीज कर दिया। सेफनेट की मीडिया सेंट्री सेवाएं फिल्म निर्माण कंपनियों की कई मामलों में मदद करती है।

गुप्ता बताते हैं कि मीडिया सेंट्री भी उन वेबसाइटों का पता लगाने में सफल नहीं हुई है जो वेबसाइटें कॉपीराइट डाटा को भी अपनी वेबसाइट के जरिये दिखाती हैं। गुप्ता के मुताबिक सेफनेट की प्रोपिएटरी तकनीक उन लोगों का पता जरूर लगा सकती है जो अवैध डाटा डाउनलोड करते हैं और वह इंटरनेट सेवा प्रदाताओें को यह सूचना भी दे सकती है। साथ ही, उन लोगों से ऐसा न करने के लिए मना भी कर सकती है। कई कानूनी फंदों ने अवैध सामग्री परोसने वाली कुछ वेबसाइटों को बंद करा दिया है।

‘मोशन पिक्चर्स एसोसिएशन ऑफ अमेरिका’ ने ‘टोरेंट स्पाई’ नाम की एक  वेबसाइट के खिलाफ मुकदमा जीता, नतीजतन वेबसाइट बंद हो गई। लेकिन स्वीडन की इसी तरह की ‘पाइरेट बे’ अब भी चल रही है। राजश्री मीडिया अपने कंटेंट को चोरों से बचाने के लिए डिजिटल मीडिया राइट्स (डीआरएम) का इस्तेमाल कर रही है। लेकिन यह तकनीक भी पूरी तरह कारगर नहीं है। बड़जात्या का कहना है कि हम इंटरनेट पर चोरी रोकने के लिए कुछ और तकनीक भी  आजमा रहे हैं।

First Published - July 8, 2008 | 11:48 PM IST

संबंधित पोस्ट