बड़ी कंपनियां अक्सर दावा करती है कि वे सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर)को बखूबी निभा रही हैं लेकिन उनकी बात हमेशा सच हो ऐसा भी नहीं कहा जा सकता। इस सच्चाई को कुछ आंकड़े भी बयां कर सकते हैं।
इन आंकड़ों के मुताबिक देश की केवल 120 कंपनियों ने ही अपने ग्राहकों की मदद के लिए ‘राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन’ से हाथ मिलाया है। इस हेल्पलाइन में कंपनियां अपने ग्राहकों के मदद के लिए किसी प्रोडक्ट या सर्विस से संबंधित शिकायत दर्ज कराया जा सकता है। गौरतलब है कि एक साल पहले यह हेल्पलाइन, उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय और दिल्ली विश्वविद्यालय ने संयुक्त रूप से शुरू किया था।
फिलहाल यह हेल्पलाइन विश्वविद्यालय कैं पस से बाहर एक महीने में 4,000 शिकायतें दर्ज करता है। इसके तहत लगभग 3,500 ग्राहकों द्वारा दर्ज शिकायतों को कंपनियों के पास भेजा जाता है जिसकी सुलह के लिए 4 महीने का समय दिया जाता है। अभी बहुत कम शिकायतों का ही निपटारा हो पा रहा है इसकी वजह यह है कि बहुत कम कंपनियों ने खुद की पहल पर इस हेल्पलाइन में शामिल होने का फैसला लिया है।
इसी वजह से बहुत सारी शिकायतें अनसुनी रह जाती हैं और उनका कोई समाधान नहीं निकल पाता है। उपभोक्ता हेल्पलाइन के मुताबिक टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर को लेकर सबसे ज्यादा संख्या में शिकायतें दर्ज की जाती हैं। पिछले चार महीने में बीएसएनएल के लिए 1,128 और वोडाफोन के लिए 405 शिकायतें दर्ज कराई गईं।
हालांकि इन दोनों कंपनियों का अपना कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी प्रोग्राम चलाया जाता है। बावजूद इसके इन कंपनियों ने राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन कार्यक्रम से साथ जुड़कर ग्राहकों की समस्या का समाधान ढूंढ़ने की कोई जहमत नहीं उठाई।
बीएसएनएल के उप महानिदेशक नरेंद कुमार ने बताया कि वे लोग चाहते थे कि ग्राहकों की समस्या को दूर करने के लिए कंपनी की जो अपनी व्यवस्था है उसके साथ ही यह हेल्पलाइन भी जुड़े। राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन प्रोजेक्ट मैनेजर एस. के. विरमानी का कहना है कि कंपनी ने पहली बार भेजी गई शिकायतों के संदर्भ में ही अपनी कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की है।
उनका कहना है कि वोडाफोन और रिलायंस ने भी हेल्पलाइन द्वारा भेजी गई शिकायतों को लेकर कोई कार्रवाई नहीं की। नोकिया के लिए भी 320 और एयरटेल के लिए भी 481 शिकायतें दर्ज कराई गई थीं। हेल्पलाइन के साथ देश के 22 बड़े बैंक और इंश्योरेंस कंपनियां भी जुड़ रही हैं। कुछ प्राइवेट कंपनियां और इंश्योरेंस कंपनियां भी हेल्पलाईन के कंवर्जेंस प्लान से जुड़ चुकी हैं।