महाराष्ट्र की चिताले डेयरी रोजाना 400,000 लीटर दूध का उत्पादन करती है और उससे कई दूध उत्पाद बनाती है। इस डेयरी के 2 डाटा सेंटर हैं जिनमें 10 सर्वर हैं और संबंधित एप्लीकेशन सिस्टम हैं।
यह डेयरी अपने तकनीकी प्रणाली का सहज बनाने की कोशिश कर रही थी। इसी कोशिश में इस डेयरी ने अपने सीमित संसाधनों को बढ़ाने और हार्डवेयर में निवेश अधिकतम करने का तरीका ढूंढ निकाला-यह तरीका था वर्चुअल सर्वर का। उसके लिए एक ऐसी तकनीक का इस्तेमाल किया जाने लगा जिसमें एक ही कंप्यूटर पर कई ऑपरेटिंग सिस्टम के जरिए काम होता है।
वर्ष 2007 में कंपनी ने अपने आईटी सिस्टम को एक डाटा सेंटर के 3 सर्वर के जरिए पूरी तरह से व्यवस्थित कर दिया। ये 3 सर्वर लगभग 20 वर्चुअल सर्वर के बराबर काम करते हैं। इसकी वजह यह है कि इनमें कई तरह के एप्लीकेशन और ऑपरेटिंग सिस्टम की क्षमता हैं। इस तरह कंपनी को यह मौका मिला है कि वह हार्डवेयर जैसे संसाधन खरीदने के खर्च में 50 प्रतिशत की कमी कर सके। इससे सर्वर में लगने वाला समय भी कम होता गया। इससे खासतौर पर बिजली, एसी और रियल एस्टेट की लागत में भी कमी आई क्योंकि 3 सर्वर 10 वर्चुअल सर्वर के बराबर काम करने लगे।
हालांकि डाटा सेंटर में इस तरह का वर्चुअल सर्वर तो एक दशक से काम कर रहा था लेकिन उसकी खासियत का अंदाजा अब जाकर हुआ है। इसके जरिए संसाधनों का इस्तेमाल 30 से 40 फीसदी बढ़ गया। जहां तक लागत की बात है तो बिजली, एसी और हार्डवेयर पर लगने वाले खर्च में 30 से 70 फीसदी की कमी आई है। आईबीएम वर्चुअल सॉल्यूशंस मुहैया कराने वाली बड़ी कंपनी है। इसने भी इस कॉन्सेप्ट को अपनाया है।
एचपी इंडिया, टेक्नोलॉजी सॉल्यूशंस ग्रुप के मार्केटिंग एंड एलायंसेज के डायरेक्टर दुर्गादत्त नेदुनगदी का कहना है, ‘किसी भी निश्चित समय में सर्वर का इस्तेमाल 20 प्रतिशत से ज्यादा नहीं होगा और उसके लिए बिजली की खपत 70 प्रतिशत से ज्यादा होगी।’ इससे यह साफ होता है कि वर्चुअलाइजेशन के लिए एक खास जगह बन रही है। लेकिन इसका लाभ लेने के लिए पूरे आईटी इंफ्रास्ट्रकचर पर नजर डालनी होगी। उनका कहना है कि वर्चुअलाइजेशन के जरिए आईटी इंडस्ट्री को पर्यावरण के अनुकूल बनाया जा सकता है और इससे कार्बन उत्सर्जन की मात्रा में भी कमी आएगी।
आईडीसी इंडिया एक रिसर्च फर्म है जिसके मुताबिक वर्चुअलाइज्ड सर्वर का हिस्सा इस साल के अंत तक दोगुना हो जाने की उम्मीद है यानी यह मौजूदा 22 प्रतिशत से बढ़कर 45 प्रतिशत तक हो जाएगा। वीएमवेयर के भारत और सार्क के क्षेत्रीय निदेशक गणेश महाबाला का कहना है, ‘वर्ष 2001 में सर्वर की औसत बिजली खपत 100 वॉट थी जो फिलहाल 400 वॉट से ज्यादा है। हालांकि इसी के मुताबिक सर्वरों की क्षमता भी बढ़ी है। हमलोगों ने यह देखा है कि वर्चुअल सर्वरों के जरिए कार्बन डाईऑक्साइड की मात्रा में साढ़े 12 गुना कमी आई है।’
नया तरीका
इस नई तकनीक में सीमित संसाधनों का होता है पूरा इस्तेमाल
कंप्यूटर हार्डवेयर जैसी महंगी चीजों पर घट सकता है 50 फीसदी तक खर्च
वर्चुअलाइजेशन के जरिये आईटी इंडस्ट्री को बनाया जा सकता है पर्यावरण के अनुकूल