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देश में अगस्त माह में रोजगार में गिरावट

Last Updated- December 11, 2022 | 3:32 PM IST

भारत ने अगस्त 2022 में रोजगार के मोर्चे पर बहुत अच्छा प्रदर्शन नहीं किया। बेरोजगारी की दर बढ़कर 8.3 प्रतिशत हो गई जो बीते 12 महीनों की दरों की तुलना में सर्वाधिक थी। बेरोजगारी दर का बढ़ना यह प्रदर्शित करता है कि जब लोगों की नौकरी की चाहत बढ़ी तो अर्थव्यवस्था उन्हें उचित नौकरी मुहैया कराने में असमर्थ रही।

भारत का मानव श्रम बल अगस्त में 40 लाख बढ़कर 43 करोड़ पर पहुंच गया। यह दिखाता है कि रोजगार की मांग में बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा श्रम की अतिरिक्त मांग भी बढ़ी क्योंकि श्रम बाजार के मुहाने पर पहले से ही श्रम था। यह श्रम बाजार में पहुंच गया और अगस्त में सक्रिय रूप से रोजगार के अवसर ढूंढ़ने लगा था। श्रम बाजार के मुहाने से तात्पर्य उस श्रम बल से है जिनके पास रोजगार नहीं है लेकिन काम करना चाहते है और सक्रिय रूप से रोजगार नहीं ढूंढ़ रहे हैं। यह निष्क्रिय मानव संभावित मानवश्रम बल होता है। इनमें से 60 लाख लोगों ने अगस्त में सक्रिय रूप से रोजगार ढूंढ़ना शुरू कर दिया था। इसके परिणास्वरूप श्रम बल की सहभागिता की दर बढ़ गई थी। इससे मानव श्रम बल पर भी प्रभाव पड़ा था।

मानव श्रम बल की सहभागिता की दर जुलाई में 38.95 फीसदी थी जो अगस्त में बढ़कर 39.24 फीसदी हो गई थी। इस अवधि में मानव श्रम बल 42.6 करोड़ से बढ़कर 43 करोड़ हो गया था। हालांकि श्रम बाजार ने सेवा मुहैया कराने वाले बढ़े हुए श्रम को निराश किया। बाजार ने श्रम को कार्यबल में शामिल करने के बजाए 26 लाख नौकरियों को खत्म कर दिया। इससे रोजगार कम हुआ। जुलाई में 39.72 करोड़ रोजगार थे जो अगस्त में घटकर 39.46 करोड़ हो गए। रोजगार घटने का असर यह हुआ कि बेरोजगारी बढ़ गई। जुलाई में 2.9 करोड़ लोग बेरोजगार थे। अगस्त में 66 लाख बेरोजगार और बढ़ गए, इससे इस महीने में बेरोजगारों की संख्या बढ़कर 3.56 करोड़ हो गई थी। इससे बेरोजगारी की दर में भी बढ़ोतरी हुई। आमतौर पर श्रम बाजार में सक्रिय रूप से शामिल होने के इच्छुक लोगों को जब श्रम बाजार शामिल करने में असमर्थ हो जाता है तब ऐसे लोग निराश होकर श्रम बाजार से वापस लौटना शुरू कर देते हैं। इसका परिणाम यह होता है कि श्रम बल की सहभागिता दर (एलपीआर) गिर जाती है। ऐसे में बेरोजगारी दर (यूईआर) भी गिर जाती है। इस तथ्य को हम लोग देखते हैं। श्रम बल की सहभागिता दर का 30 दिन का मूविंग एवरेज (डीएमए) 19 अगस्त को उच्च स्तर 39.4 फीसदी पर पहुंच गया था। इसके बाद गिरावट का दौर शुरू हो गया और यह 11 सितंबर को 39.1 फीसदी हो गया था। 30 डीएमए की बेरोजगारी दर अगस्त, 30 को उछलकर 8.5 फीसदी पर पहुंच गई थी, वह 11 सितंबर को गिरकर 7.4 फीसदी पर आ गई थी।

 सितंबर के शुरुआती दिनों में बेरोजगारी दर का गिरना श्रम बल की सहभागिता दर में गिरावट के साथ रोजगार बढ़ने को भी दर्शाता है। सितंबर में रोजगार के बढ़ने से यह स्पष्ट हो जाता है कि रोजगार दर बढ़नी शुरू हुई। रोजगार दर 31 अगस्त को 36 प्रतिशत थी जो 11 सितंबर को बढ़कर 36.2 फीसदी हो गई थी। यह बदलाव स्वागत योग्य है और इस पर करीबी नजर रखना फायदेमंद है। लिहाजा अब अगस्त में रोजगार दर में गिरावट को समझना जरूरी हो गया है।

लिहाजा अगस्त में रोजगार में 26 लाख की गिरावट होना असामान्य नहीं है। भारत के श्रम बाजार में उतार-चढ़ाव होते रहते हैं। किसी एक महीने में रोजगार 50 लाख घट सकता है और अगले महीने में इतना ही बढ़ सकता है। इसका कारण यह है कि भारत में रोजगार की प्रकृति में अनौपचारिक व्यवस्थाएं खासी प्रभावी हैं। भारत के रोजगार के पारंपरिक ढांचे में अनौपचारिकता का समावेश है। इसके अलावा रोजगार की व्यवस्थाओं में भी बढ़ोतरी हो रही है जिसमें उद्यमी श्रम को अनुबंध समझौते के जरिये रख रहा है। इसमें अनौपचारिकता की विशेषताएं हैं।

अगस्त 2022 में समाप्त हुए 12 महीनों में औसतन हर महीने 25 लाख नौकरियां कम हुईं। लेकिन इस औसत का दायरा बहुत व्यापक है- सितंबर 2021 में 83 लाख रोजगार बढ़े जबकि जून 2022 में 1.3 करोड़ रोजगार घट गए। यदि हम सबसे अधिक और सबसे कम वाले ये आंकड़े हटा भी दें तब भी यह दायरा काफी व्यापक है ये -55 लाख से + 70 लाख है। इस संदर्भ में अगस्त में रोजगार में 26 लाख की गिरावट कुछ अस्वाभाविक नहीं है। लेकिन गिरावट की संरचना से चिंता बढ़ती है।

भारत में रोजगार का सबसे बड़ा जरिया दिहाड़ी मजदूर व छोटे व्यापारी और किसान हैं। कुल रोजगार में इन दोनों की हिस्सेदारी 60 फीसदी है। इससे कुछ कम 20 फीसदी कारोबारी हैं। अनौपचारिक रोजगार में इन प्रकार की बहुलता है। लोग आसानी से इन रोजगारों में आते हैं और छोड़कर चले जाते हैं। इससे रोजगार में उतार-चढ़ाव होता रहता है।

अगस्त 2022 में कृषि क्षेत्र में 1.1 करोड़ नौकरियां कम हो गईं। इनमें आधे से ज्यादा किसान थे और बाकी श्रमिक थे। हालांकि कृषि में नौकरी गंवाने वालों ने गैरकृषि क्षेत्र में विशेषकर गैर व्यावसायिक व्यक्तिगत सेवाओं में आसानी से नौकरी प्राप्त कर ली थी। अनौपचारिक क्षेत्र के रोजगार में ऐसी जगह छोड़कर दूसरी जगह नौकरी करना होता रहता है। अगस्त में शुद्ध रूप से अनौपचारिक नौकरियां या गैर वेतनभोगी नौकरियां 21 करोड़ बढ़ी थीं।

अगस्त में रोजगार के क्षेत्र में चिंता की बात वेतनभोगी नौकरियों का 47 लाख कम होना है। जुलाई में वेतनभोगी नौकरियां 8.08 करोड़ थीं जो अगस्त में 5.8 प्रतिशत गिरकर 7.62 करोड़ हो गई थीं। यह बीते 15 महीनों में वेतनभोगी नौकरियों का सबसे निचला स्तर था। पुराने ढर्रे से पता चलता है कि अगस्त 2022 में वेतनभोगी नौकरियों में गिरावट आने की आशंका थी। लेकिन यह गिरावट उम्मीद से कहीं अधिक थी। सितंबर में वेतनभोगी नौकरियां फिर बढ़कर आठ करोड़ से अ​धिक पहुंचने की उम्मीद है।

(लेखक सीएमआईई प्रा. लि. के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्या​धिकारी हैं)

First Published - September 15, 2022 | 9:42 PM IST

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