फैंसी साइकिलों की बढ़ती मांग को देखते हुए उत्तर भारत के साइकिल निर्माता भी अब फैंसी साइकिलें बनाने पर जोर दे रहे हैं।
इसके लिए छोटे और मझोले किस्म के उद्यमी शोध और डिजाइन पर अधिक ध्यान दे रहे हैं। इसके जरिये इन कंपनियों का कारोबार वैश्विक स्तर पर भी बढ़ेगा। पंजाब के लुधियाना शहर में करीब 2,000 ऐसी इकाइयां हैं जो साइकिल के पुर्जे बनाती हैं। इस रुझान के चलते इन कंपनियों को भी फायदा पहुंचेगा।
भारत साइकिल बनाने वाला दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश है। यहां साल भर में तकरीबन 1.2 करोड़ साइकिलें बनाई जाती हैं। इसमें से भी तकरीबन 65 फीसदी साइकिलें तो लुधियाना में ही बनाई जाती हैं। लुधियाना से साइकिलों और पुर्जों का निर्यात भी किया जाता है। शहर में हीरो, एवन और नीलम जैसी जानी-मानी साइकिल कंपनियां हैं। हीरो साइकिल के प्रबंध निदेशक एस के राय ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया कि फैंसी साइकिलों का बाजार दहाई अंकों में बढ़ रहा है।
उनका कहना है कि शुरुआत में फैंसी और स्टाइलिश साइकिलों का बाजार धीमी गति पकड़ रहा था क्योंकि लोगों के पास विकल्प कम थे लेकिन अब जब विकल्प बढ़ते जा रहे हैं, बाजार भी बढ़ता जा रहा है। हीरो कंपनी लगभग 55 लाख साइकिलों का निर्माण करती है जो कि देश के कुल साइकिल निर्माण का 35 से 40 फीसदी तक बैठता है। पिछले वित्त वर्ष में कंपनी ने 16 लाख फैंसी साइकिलें बेची हैं जबकि उससे पिछले साल कंपनी ने 12 लाख फैंसी साइकिलें बेची थीं।
कंपनी ने ‘फास्ट एंड फ्यूरियस’ नाम से फैंसी साइकिलों की एक श्रंखला भी बाजार में उतार रखी है। राय का कहना है कि फैंसी साइकिलों की मांग में साल दर साल के हिसाब से 10 से 15 फीसदी का इजाफा हो रहा है। कंपनी फैंसी साइकिलों की अपनी निर्माण क्षमता को और अधिक बढ़ाना चाहती है। दरअसल चीन से आयात और बढ़ती स्टील कीमतों की वजह से भारत में परंपरागत (स्टैंडर्ड)साइकिल की खरीद लगभग सालाना 5 फीसदी की दर से कम हो रही है। इसमें सरकारी खरीद भी शामिल है।
एटलस साइकिल के उपाध्यक्ष अंगद कपूर कहते हैं कि इस समय हम अपनी तीन इकाइयों से सालाना सालाना 33 लाख साइकिलों का निर्माण कर रहे हैं। कंपनी की ये तीन इकाइयां सोनीपत (हरियाणा), साहिबाबाद(उत्तर प्रदेश), ग्वालियर(मध्य प्रदेश) में स्थित है। एटलस जितनी साइकिलों का निर्माण करती है उनमें से 45 फीसदी साइकिलें स्टैंडर्ड होती हैं। कपूर का कहना है कि कंपनी का लक्ष्य 2012 तक कुल उत्पादन में फैंसी साइकिलों के उत्पादन को 70 फीसदी तक पहुंचाना है।
विश्लेषकों का कहना है कि पहले गांव के लोग साधारण साइकिलें पसंद करते थे लेकिन अब देखा जा रहा है वे फैंसी साइकिलों को हाथों हाथ ले रहे हैं। अगर इसी तरह का रुझान चलता रहा तो आने वालो दिनों में साधारण साइकिलों की तुलना में फैंसी साइकिलों का उत्पादन काफी ज्यादा हो जाएगा। लुधियाना की ही एवन साइकिल अपने कुल निर्माण में 31 फीसदी फैंसी साइकिलों का निर्माण करती है। कंपनी की लुधियाना में दो निर्माण इकाइयां जिनमें साल भर में 25 लाख साइकिले बनाई जाती हैं।
एवन साइकिल के प्रबंध निदेशक ओंकार सिंह पाहवा बताते हैं कि जहां साधारण साइकिलों की मांग स्थिर हो गई है वहीं दूसरी ओर फैंसी साइकिलों का बाजार लगभग सालाना 10 से 15 फीसदी की दर से बढ़ रहा है। बढ़ती हुई स्टील की कीमतों पर एटलस के अंगद कपूर का कहना है कि कंपनी जून से अपनी साइकिलों की कीमत में 35 से 40 रुपये का इजाफा करने जा रही है। उनका कहना है कि स्टील, रसायन, टायर और टयूब्स की कीमतें बढ़ती जा रही हैं।
ऐसे में कंपनियां कब बढ़ती कीमतों का बोझ ढोती रहेंगी। साइकिल निर्माण में काम आने वाली वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी के चलते कंपनी ने फरवरी में साइकिल की कीमतें तीन बार बढ़ाई थीं। इस पर एवन के पाहवा का यही कहना है कि इस दौरान हमने अपनी साइकिलों की कीमतों में चार बार बढ़ोतरी की है। यदि आगे भी कच्चे माल की कीमतों में तेजी आती रहेगी तो कीमतों में फिर बढ़ोतरी की जा सकती है।
लेकिन उनका मानना है कि किसी भी बारे में कुछ भी अनुमान लगाना बेहद मुश्किल है। दूसरी ओर कपूर का कहना है कि साइकिल निर्माण में जो सीसीआरए स्टील प्रयोग होता है उसकी कीमतों में कटौती के कोई आसार नजर नहीं आ रहे हैं। पिछले दो महीनों में एटलस की साधारण साइकिलों की बिक्री में भी 10 फीसदी की कमी आई है।