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जलसे के बाद की मुश्किल शांति

Last Updated- December 07, 2022 | 6:43 PM IST

दुनिया के लिए पेइचिंग ओलंपिक कई मामलों में एक कामयाब जलसा था। अगर मेजबान की निगाहें से देखें तो यह कोई आसान काम नहीं था।


मानवाधिकारों के मामले में तो चीन के रिकॉर्ड पर पहले से अंतरराष्ट्रीय समुदाय सवाल उठा रहा था, लेकिन तिब्बत विरोध समेत कई दूसरे मामलों को लेकर ओलंपिक के उद्धाटन समारोह से कुछ ही हफ्ते पहले काफी हंगामा मचा था। लेकिन चीन के अधिकारियों ने इस सारी मुश्किलों से पार पा लिया। यह बात दिखलाती है उनकी जबरदस्त संगठनात्मक क्षमता को।

इन मुसीबतों के बावजूद भी चीन ने इस साल सबसे ज्यादा सोने के तमगे झटके। यहीं आती है सबसे बड़ी दिक्कत। महीनों खेल के सुरूर में व्यस्त रहने के बाद चीनी नेतृत्व को अब ज्यादा बड़ी दिक्कत का सामना करने के लिए तैयार रहना पड़ेगा। उसे अपने मुल्क में न केवल वैश्विक आर्थिक मंदी का, बल्कि दूसरी काफी समस्याओं  से पार पाना होगा।

अभी सबसे बड़ी चुनौती विकास की घटती और महंगाई की तेजी से बढ़ती दर के रूप में सामने आ रही हैं। साल की पहली छमाही में तो चीनी अर्थव्यवस्था पर इसका ज्यादा असर नहीं पड़ा है, लेकिन यह दौर ज्यादा दिनों तक चल नहीं सकता है। वजह है वैश्विक, खास तौर पर दुनिया के सबसे बड़े बाजार अमेरिकी अर्थव्यवस्था में आ रहा उतार का दौर। 

अमेरिका में जिस मंदी का खौफ छाया हुआ है, उसकी वजह से आने वाले कुछ महीनों में चीन की अर्थव्यवस्था को भी काफी पसीना बहाना पड़ सकता है। उसे ओलंपिक के बाद आई शांति से भी तो निपटना होगा। हालांकि, पिछले कुछ सालों में जब से घरेलू उपभोग और खासतौर पर निवेश ने जोर पकड़ा है विकास के लिए निर्यात पर चीन की निर्भरता काफी हद तक कम हो चुकी है।

मगर इसका मतलब कतई नहीं है, यह निर्भरता पूरी तरीके से खत्म हो चुकी है। इसलिए चिंताएं तो हैं ही। इसकी एक मिसाल सरकार की डॉलर के मुकाबले उसकी मुद्रा में तेजी पर जाहिर की गई चिंता है। पिछले कुछ हफ्तों में चीन की मुद्रा, युआन में डॉलर के मुकाबले काफी तेजी देखने को मिली है। इस मजबूती से अधिकारियों में खुशी तो कतई नहीं है।

महंगाई की वजह से चीन में कई बड़ी घरेलू निवेश योजना को रोक दिया गया है। ऐसे में निर्यात दर की रफ्तार होने की वजह से काफी बड़ा खतरा खड़ा हो सकता है। जहां तक महंगाई की बात है तो चीन का एक बड़ा बाजार होने की वजह से एक बड़ा खतरा साफ दिखाई दे रहा है।

चीन जितना ज्यादा इस्तेमाल करेगा, चीजों की कीमतें उतनी ही तेजी से बढ़ेगी। इससे उतनी ही तेजी से महंगाई भी बढ़ेगी। इस महंगाई का सामना न केवल चीन, बल्कि पूरी दुनिया को करना पड़ेगा। इसलिए चीनी नेतृत्व को विकास की कम होती रफ्तार और बढ़ती महंगाई से निपटने के लिए कोई ऐसा रास्ता ढूंढ़ना पड़ेगा, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर नहीं पड़े।

छोटी अवधि की दिक्कतों से निपटते वक्त अपनी लंबे समय के लक्ष्यों पर भी ध्यान देना पड़ेगा, ताकि फिलहाल की मुसीबतों को हल करने में कहीं वह बड़े राक्षसों को न्यौता न दे बैठे। साथ ही, चीन को अब अपनी आबादी की संरचना की तरफ भी ध्यान देना पड़ेगा। ऐसा इसलिए क्योंकि उसकी आबादी में बुजुर्गों की तादाद विकसित मुल्कों के बराबर होती जा रही है, जबकि उसकी प्रति व्यक्ति उन मुल्कों के मुकाबले काफी कम है।

First Published - August 26, 2008 | 1:23 AM IST

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