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ई-फाइलिंग दिलाए चिंता से मुक्ति

Last Updated- December 07, 2022 | 1:04 PM IST

सैलरी से अपना गुजारा करने वाले लोगों के लिए साल का सबसे मुश्किल वक्त आ चुका है। कई लोगों ने इसके लिए पूरी तैयारी कर रखी है, तो कई अभी तक अपना सिर खुजा रहे हैं।


हर दफ्तर में आज कल केवल इसी बात की चर्चा है। जी हां, अपने सही पहचाना हम बात कर रहे हैं अपना रिटर्न भरने की। टैक्स रिटर्न की आखिरी तारीख यानी 31 जुलाई के करीब आने के साथ-साथ लोगों की टेंशन भी बढ़ती जा रही है। टेंशन हो भी क्यों न?

आखिर टैक्स रिटर्न भरने के लिए घंटों कागजों के पुलिंदे के बीच सिर खपाना पड़ेगा। फिर रिटर्न फॉर्म में माथापच्ची करनी पडेग़ी। उसके बाद घंटों तक इनकम टैक्स विभाग के दफ्तर में घंटों तक लाइन में खड़ा पड़ेगा। भगवान न करे, लेकिन अगर कई गलती हो गई तो फिर उसे ठीक करने के लिए हफ्तों तक उस दफ्तर के चक्कर काटने पड़ेंगे।

इससे बचने के लिए तो आप रिटर्न भरने से तो मुंह नहीं चुरा सकते, लेकिन अब इसकी राह में आने वाली दिक्कतों से भी बचने का रास्ता निकल आया है। वह रास्ता है, रिटर्न के इलेक्ट्रोनिक फाइलिंग यानी ई-फाइलिंग का।  यह आसान और काफी सुविधाजनक तरीका है अपना रिटर्न फाइल करने का। इसमें गलती होने की आंशका भी बहुत कम होती है।

कैसे करें ई-फाइलिंग ?

अपने टैक्स रिटर्न को कंप्यूटर के जरिये फाइल करने के लिए आपका तकनीक विशेषज्ञ होना कतई जरूरी नहीं है। इसके लिए आपको जरूरत पड़ेगी तो बस एक अदद इंटरनेट से लैस कंप्यूटर की। इसके बाद आप चाहें तो खुद भी अपना रिटर्न भर सकते हैं या फिर आयकर विभार द्वारा मान्यता प्राप्त वेबसाइटों की मदद ले सकते हैं। खुद अपना रिटर्न फाइल करने के लिए आप आयकर विभाग की वेबसाइट (डब्लूडब्लूडब्लू.इनकमटैक्सइंडिया ईफाइलिंग.जीओवी.इन) पर मौजूद एक सॉफ्टवेयर को डाउनलोड कर सकते हैं। फिर उसमें अपना रिटर्न तैयार करें, जो एक एक्सएमएल फाइल के रूप में तैयार होती है।

दरअसल, इसके एक्सएमएल फॉर्मेट में ही तैयार होने की सबसे बड़ी वजह यह है कि इस फॉर्मेट में अलग-अलग सिस्टम्स में डाटा को ठीक-ठाक तरीके से भेज पाने में सहूलियत होती है। उस एक्सएमएल फाइल को अपने डेस्कटॉप पर सेव कर दें। इसके बाद, आयकर विभाग की वेबसाइट पर जाकर खुद को रजिस्टर करें। इस काम में आपका पैन आपके यूजरनेम का काम करता है। फिर अपने रिटर्न को इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की वेबसाइट पर अपलोड कर दें।

अगर आप रिटर्न फाइल करने के लिए  इनकम टैक्स विभाग से मान्यता प्राप्त किसी वेबसाइट का सहारा लेना चाहते हैं, तब तो यह बाएं हाथ का खेल भर बनकर रह जाता है। हालांकि, इसके लिए आपको फीस जरूर चुकानी पड़ती है। इसमें आपको बस आपको अपने फॉर्म 16 के आंकड़े दर्ज करने पड़ते हैं और आपका रिटर्न खुद ब खुद तैयार हो जाता है। वैसे, इसमें भी एक्सएमएल फॉर्मेट में ही आपका रिटर्न तैयार होता है। आपको फिर उसे इनकम टैक्स विभाग की वेबसाइट पर अपलोड करना होता है।

आप खुद से अपना रिटर्न दाखिल कर रहे हों या फिर किसी वेबसाइट के जरिये, दोनों ही मामलों में आपको कागजी कार्रर्वाई के पूरी तरह से छुटकारा पाने के लिए डिजिटल सिग्नेचर की जरूरत होती है। अगर आपके पास डिजिटल सिग्नेचर नहीं है, तो आपको अपने रिटर्न को अपलोड करने के बाद उसे वेरीफाई करवाने और रसीद (आईटीआर-वी) लेने  के लिए इनकम टैक्स दफ्तर (आईटीओ) की तरफ रुख करना पड़ेगा।

अगर आपके पास डिजिटल सिग्नेचर है, आपको उस वक्त फौरन रसीद ईमेल कर दी जाती है। जहां तक बात है डिजिटल सिग्नेचर की तो वह आप सरकार द्वारा इसके लिए मान्यता प्राप्त किसी भी एजेंसी से एक निश्चित फीस चुका कर हासिल कर सकते हैं। अब तो ई-फाइलिंग में आपकी मदद करने वाली टैक्सप्लानर.कॉम और टैक्सस्माइल.कॉम जैसी कई वेबसाइटों ने तो पैकेज के रूप में डिजिटल सिग्नेचर की सुविधा मुहैया करना शुरू कर दिया है। इसमें वे आपको डिजिटल सिग्नेचर के साथ-साथ ई-रिटर्न की सुविधा भी देती हैं।

बेहतरीन हैं इसकी खूबियां

ई-फाइलिंग तो जैसे खूबियों का खजाना है। इसकी बदौलत आपको कागजी कार्रवाई में काफी कम माथापच्ची करनी पड़ती है। पुराने तरीके से अपना रिटर्न फाइल करने के लिए आपको 20 पेजों के आईटीआर में माथापच्ची करनी पड़ती है। अगर समझ में न आए, तो फिर सीए को मोटी फीस चुकानी पड़ती है।

फिर उन रिटर्न को जमा करवाने के लिए कई-कई घंटों इनकम टैक्स दफ्तर में लाइन में खड़ा रहना पड़ता है। लेकिन ई-फाइलिंग के जरिये आपको इन सभी दिक्कतों से छुटकारा मिल जाता है। साथ ही, इसके लिए आपको इनकम टैक्स दफ्तर तक जाने की जरूरत भी नहीं रह जाती है। आप कहीं से अपना ई रिटर्न किसी भी वक्त फाइल कर सकते हैं।

अब जब आपको इनकम टैक्स जाने की जरूरत नहीं रह जाती है, तो आपके पास वक्त की कोई कमी भी नहीं होगी। साथ ही, ई-फाइलिंग की एक और बड़ी खूबी यह है कि इसमें किसी तरह की गलती की आशंका न के बराबर ही होती है। इसमें आपको किसी सीए और दूसरे बीच में आने वाले लोगों की जरूरत भी खत्म हो जाती है। मतलब, आयकर विभाग और आम जनता के बीच बिचौलियों की तादाद न के बराबर हो जाती है।

खामियां भी हैं कई

ई-फाइलिंग में खूबियां तो कई हैं, लेकिन इसमें खामियों की भी कमी नहीं है। मुल्क में इंटरनेट का जाल फैल तो रहा है, लेकिन यह अभी तक ज्यादातर लोगों तक पहुंच नहीं पाया है। आज भी इंटरनेट, मुल्क के चार करोड़ से ज्यादा टैक्स चुकाने वालों की पहुंच से बाहर है। इसके अलावा भी कई और दिक्कतें हैं, जिसकी वजह से लोग-बाग ई-फाइलिंग से दूर ही रहना चाहते हैं।

पहली बात तो यह है कि ऑनलाइन फॉर्मों में अब तक कुछ खास बदलावों को जगह नहीं मिल पाई है। मिसाल के तौर पर मेडिक्लेम को ही ले लीजिए। इसके वास्ते मिलने वाली छूट बढ़ाकर भले ही आम लोगों के लिए 15000 रुपये और बुर्जुगों के लिए 20 हजार रुपये कर दी गई है, लेकिन इस बदलाव को ऑनलाइन फॉर्मों में शामिल नहीं किया गया है।

इसके लिए डिजिटल सिग्नेचर की जरूरत, इस पूरी प्रक्रिया को और भी महंगा बना देती है। इसके लिए आपको कम से कम 1000 रुपये तो मान्यता प्राप्त संस्थानों और सीए को चुकाने ही पड़ते हैं। इससे भी बड़ी मुसीबत यह है कि आपको अपने रिटर्न को अपलोड करने में घंटों का वक्त लग सकता है।

First Published - July 25, 2008 | 12:22 AM IST

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