संपादकीय

Editorial: एआई के नए युग में संचालन और नियमन ढांचा जरूरी

सीएमपी स्वायत्त रूप से सभी प्रकार के सॉफ्टवेयर का अंकेक्षण कर सकता है, जिसमें ऑपरेटिंग सिस्टम और पुराने प्रोग्राम शामिल हैं

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बीएस संपादकीय   
Last Updated- April 20, 2026 | 9:55 PM IST

हाल ही में क्लॉड मिथोस प्रिव्यू (सीएमपी) की प्रस्तुति और उसकी निर्माता एंथ्रोपिक का नए मॉडल तक पहुंच को सीमित करने का निर्णय आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) क्षमता में गुणात्मक छलांग और उन क्षमताओं से उत्पन्न नए अवसरों और खतरों को उजागर करता है। सीएमपी स्वायत्त रूप से सभी प्रकार के सॉफ्टवेयर का अंकेक्षण कर सकता है, जिसमें ऑपरेटिंग सिस्टम और पुराने प्रोग्राम शामिल हैं।

यह अभूतपूर्व पैमाने पर बग और कमजोरियों की पहचान कर सकता है और जानकारी दी गई है कि इसने आमतौर पर उपयोग किए जाने वाले ऑपरेटिंग सिस्टम में हजारों अज्ञात खामियों की खोज की। सैद्धांतिक रूप से इसे व्यापक पैमाने पर ऐसी कमियों को दूर करने के लिए प्रयोग में लाया जा सकता है। इसे नए प्रोग्रामों का पूर्वावलोकन और अंकेक्षण करने के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे बग-रहित और सुरक्षित हों।

जब एंथ्रोपिक को इस नए मॉडल की क्षमताओं का अंदाजा लगा तो उसने यह स्वीकार किया कि इस नए मॉडल को सामान्य रूप से जारी करना बहुत खतरनाक हो सकता है। अब सीएमपी तक पहुंच कुछ सीमित संगठनों के समूह तक प्रतिबंधित रखी गई है और इसे प्रोजेक्ट ग्लासविंग नाम दिया गया है। ग्लासविंग के अधीन एंथ्रोपिक, ऐपल, ब्रॉडकॉम, सिस्को, क्राउडस्ट्राइक, गूगल तथा सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र की अन्य कंपनियां मिलकर सीएमपी का परीक्षण और इस्तेमाल करेंगी लेकिन इस मॉडल को आम लोगों के लिए नहीं खोला जाएगा। केंद्रीय बैंक और सरकारी संस्थाएं भी इस मॉडल तक पहुंच सकती हैं।

यह चिंता का कारण हो सकता है क्योंकि सरकारें साइबर युद्ध में संलग्न होती हैं। यह सावधानी संकेत देती है कि अब एआई उन संकीर्ण तकनीकी श्रेणियों में आती है जिनके लिए केवल नियम ही नहीं बल्कि कठोर शासन संरचनाएं और पहुंच प्रतिबंध आवश्यक हैं। जैसे परमाणु ऊर्जा, विमानन और कुछ सैन्य तकनीकों के साथ होता है, सीएमपी के बड़े पैमाने पर उपयोग से पहले सुरक्षा, नियंत्रण और निगरानी स्थापित की जानी चाहिए।

सीएमपी सॉफ्टवेयर उद्योग के काम करने के तरीके को बदल देता है। भविष्य में, साइबर सुरक्षा केवल बुरे तत्वों से सिस्टम की रक्षा करने तक सीमित नहीं रहेगी। यह मूल रूप से एआई के प्रबंधन और नियंत्रण का विषय बन जाएगी, जो स्वायत्त रूप से कमजोरियों की खोज और उनका दोहन कर सकती है। सिस्टम को बग रहित करने का तरीका पूरी तरह बदल जाएगा। कोड को इंसान द्वारा पंक्ति दर पंक्ति देखकर कभी-कभी बग ढूंढने और उसे पैच या एक्सप्लॉइट करने के बजाय, सीएमपी एक सप्ताह में पूरे ऑपरेटिंग सिस्टम की 50 लाख बार समीक्षा कर सकता है। नए प्रतिमान में बग तलाश करना अब कोई बड़ी समस्या नहीं रह गई है।

इस गति और पैमाने पर साइबर सुरक्षा पूरी तरह एआई की तैनाती पर आधारित होगी। हमला और रक्षा दोनों एआई द्वारा किए जाएंगे और गणनात्मक शक्ति के माध्यम से बढ़ाए जाएंगे। इस प्रकार एंथ्रोपिक अचानक दुनिया की सबसे महत्त्वपूर्ण साइबर सुरक्षा कंपनियों में से एक हो गई है, जो पूरी तरह एक नई भूमिका में है। आईटी उद्योग हमेशा ‘बीटा’ सॉफ्टवेयर जारी करता रहा है और प्रदर्शन तथा सुरक्षा सुधारने के लिए उपयोगकर्ताओं की प्रतिक्रिया की समीक्षा करता रहा है। वह भी बदल गया है।

प्रोजेक्ट ग्लासविंग संकेत देता है कि नए एआई मॉडलों को अब कठोर परीक्षण और प्रमाणन से गुजरना चाहिए और निरंतर निगरानी का सामना करना चाहिए, बजाय इसके कि उन्हें ‘जैसा है’ वैसे ही इस्तेमाल कर लिया जाए। ऐसा करने से क्षमताएं और खामियां तलाशने में मदद मिलेगी। स्पष्ट खतरों के कारण यही तरीका विमानन क्षेत्र में भी अपनाया जाता है।

सीएमपी ने यह भी दिखाया है कि नए मॉडल्स और सॉफ्टवेयर को खामियों के लिए जल्दी और सघन तरीके से परखा जा सकता है। प्रबंधन सिद्धांतकार इसे प्रत्या​शित पूर्व शासन की ओर एक कदम कहेंगे, और ग्लासविंग परियोजना सहयोगियों को केवल तकनीकी प्रदाता के बजाय जोखिम प्रबंधकों के रूप में पुनर्स्थापित करती है। एक और गहरी और व्यापक चिंता व्यवस्थागत है। हर क्षेत्र और उद्योग सीएमपी या किसी समान मॉडल के प्रति संवेदनशील है।

अब एआई डेवलपर्स, सुरक्षा शोधकर्ताओं, नियामकों और उद्योगों को सहयोग करना होगा। चूंकि सीएमपी का आगमन हो चुका है इसलिए जल्द ही अन्य स्थानों पर भी समान मॉडल विकसित किए जाएंगे। ऐसी संरचनाएं बनाई जानी चाहिए जो यह सुनिश्चित करें कि इन मॉडलों का शासन और विनियमन बड़े पैमाने पर तैनाती से पहले ही स्थापित हो जाए।

First Published : April 20, 2026 | 9:38 PM IST