संपादकीय

Editorial: उम्मीद बनाम अनुभव, बाजारों और वैश्विक राजनीति के बीच संतुलन की जद्दोजहद

यह समझौता 108 दिनों से जारी शत्रुता को समाप्त कर सकता है जिसने वैश्विक अर्थव्यवस्था को गंभीर कठिनाइयों में डाल दिया था

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बीएस संपादकीय   
Last Updated- June 15, 2026 | 10:41 PM IST

अमेरिका और ईरान के बीच समझौते के लिए सहमति की खबर सामने आते ही तेल की कीमतों में भारी गिरावट आई और शेयर बाजारों में उछाल देखने को मिली। यह समझौता 108 दिनों से जारी शत्रुता को समाप्त कर सकता है जिसने वैश्विक अर्थव्यवस्था को गंभीर कठिनाइयों में डाल दिया था। पाकिस्तान की मध्यस्थता से संभव हुए इस समझौते पर 19 जून को जिनेवा में हस्ताक्षर होना है। इसका विस्तृत पाठ अभी प्रकाशित नहीं हुआ है लेकिन उपलब्ध जानकारी कुछ प्रमुख मुद्दों पर सहमति का संकेत देती है। यद्यपि अमेरिकी राष्ट्रपति के उत्साही सोशल मीडिया संदेशों, ईरानी अधिकारियों के सतर्क बयानों और एक ठोस समझौते के बीच कई बाधाएं अभी भी मौजूद हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर कहा कि उन्होंने होर्मुज स्ट्रेट को शुल्क मुक्त रूप से खोलने और तत्काल अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी हटाने की अनुमति दी है। उन्होंने उत्साहपूर्वक लिखा, ‘तेल को बहने दो।’ ईरानी उप विदेश मंत्री ने सरकारी टीवी पर स्पष्ट किया कि दोनों पक्षों ने एक समझौता पत्र पर सहमति जताई है। यह समझौता पत्र एक अंतरिम समझौता है और 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते तक पहुंचने की शुरुआत है। समयसीमा को आपसी सहमति से बढ़ाया जा सकता है। ईरान ने पुष्टि की है कि होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोला जाएगा लेकिन इसकी समयसीमा अभी स्पष्ट नहीं है।

अमेरिका ने जहां इसे तत्काल पुनः खोलने की बात की है वहीं ईरान का कहना है कि अमेरिका नाकाबंदी हटाकर 30 दिनों में नौवहन को पूर्ण क्षमता तक ले जाएगा। शर्तों के अनुसार अमेरिका और उसके क्षेत्रीय साझेदार ईरान के लिए 300 अरब डॉलर का पुनर्निर्माण कार्यक्रम शुरू करेंगे। अमेरिका नए प्रतिबंध नहीं लगाएगा और तय समय-सारणी के अनुसार मौजूदा प्रतिबंध हटाएगा तथा ईरान की 25 अरब डॉलर की जब्त की गई परिसंपत्ति मुक्त करेगा। हालांकि यह अंतिम शर्त अमेरिकी संस्करण में अनुपस्थित बताई जा रही है।

मसौदे के अनुसार परमाणु कार्यक्रम पर बाद में बातचीत होगी। ईरान ने दोहराया कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा या हासिल नहीं करेगा और आगे संवर्धन से परहेज करेगा। अमेरिका ने कथित तौर पर ईरान को अपने ही क्षेत्र में यूरेनियम भंडार को कम करने की अनुमति दी है। पाकिस्तान ने कहा कि समझौते में सभी सैन्य अभियानों को रोकना शामिल है जिनमें लेबनान भी है जहां इजरायल, ईरान समर्थित हिजबुल्लाह के खिलाफ अभियान चला रहा है। हालांकि इजरायल ने कहा है कि उसकी सेनाएं वहीं रहेंगी। यह असहमति समझौते में सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है। हम पहले भी यह देख चुके हैं कि समझौते पर विफलता ने 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल की ओर से शत्रुता को दोगुना कर दिया था। गत 11 अप्रैल को युद्धविराम के बाद नई वार्ताएं हुईं।

इस बार अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस बातचीत में शामिल थे। 21 घंटे तक चली लंबी वार्ता विफल रही और दो दिन बाद अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट पर नौसैनिक नाकाबंदी लागू कर दी। इस बीच मार्च से शुरू हुई इजरायली कार्रवाइयां लेबनान में अब भी जारी हैं। इजरायल ने अमेरिका द्वारा कराए गए युद्धविराम का पालन नहीं किया। अब उसका कहना है कि वह अमेरिका-ईरान वार्ता का हिस्सा नहीं है।

इस बीच पश्चिम एशिया की एकमात्र परमाणु शक्ति के रूप में उसकी स्वतंत्र कार्रवाइयां ईरान की चिंताओं को बढ़ा रही हैं जो परमाणु अप्रसार संधि का हस्ताक्षरकर्ता है जबकि इजरायल ने हस्ताक्षर नहीं किए हैं। इससे संकेत मिलता है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने  आखिरकार यह समझ लिया है कि इजरायल पश्चिम एशिया में शांति की सबसे बड़ी बाधा है। अमेरिकी राजनीति में मौजूद मजबूत द्विदलीय इजरायल समर्थक लॉबी के बीच वह अपने शक्तिशाली सहयोगी को कितने प्रभावी ढंग से नियंत्रित कर पाते हैं यह भी इस नवीनतम शांति प्रयास के परिणाम को तय कर सकता है।

First Published : June 15, 2026 | 10:36 PM IST