देश में ‘वाइन संस्कृति’ का सुरूर तेजी से चढ़ता जा रहा है। अब जब ये उद्योग तेजी से बढ़ रहा है तो इसके लिए प्रशिक्षित पेशेवरों की जरूरत पड़ना भी लाजिमी ही है।
लेकिन यही इस उद्योग का रोना है कि उनको जरूरत के मुताबिक पेशेवर नहीं मिल पा रहे हैं। लेकिन अब उनको इसकी चिंता छोड़ देनी चाहिए। देश का पहला वाइन इंस्टीटयूट जल्द ही पुणे से 80 किलोमीटर की दूरी पर खुलने जा रहा है। भारत में वाइन उद्योग में बेहतर संभावनाएं देखी जा रही हैं।
ऑस्ट्रेलिया की ऐडिलेड यूनिवर्सिटी और भारत की सबसे बड़ी वाइन कंपनी ‘शैंपेन इंडेज’ ने इसके लिए एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर भी कर दिए हैं। इस इंस्टीटयूट को 65 एकड़ के विशाल भूखंड पर बनाया जाएगा। इस इंस्टीटयूट को बनाने के लिए 100 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इस इंस्टीटयूट में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा और डिग्री कोर्स चलाए जाएंगे।
भारत में वाइन उद्योग में पेशेवरों की कमी को पूरा करने के लिहाज से इस इंस्टीटयूट को खोलने का विचार शैंपेन इंडिया के संस्थापक अध्यक्ष शामराव चौगले के दिमाग में आया। वाइन उद्योग के एक अनुमान के मुताबिक अगले पांच साल में भारतीय वाइन उद्योग में 10,000 अंगूर विशेषज्ञों, 5,000 वाइनरी ऑपरेटर, 1000 वाइन बनाने वाले और 2500 लोगों की वाइन मार्केटिंग के लिए जरुरत पड़ेगी। और इस तरह का प्रशिक्षण देने के लिए कोई संस्थान भी नहीं है। और इसी के चलते इंडियन इंस्टीटयूट ऑफ वाइन ऐंड वाइन (आईआईवीडब्ल्यू) की नींव पड़ी।
वैसे भारत में प्रति व्यक्ति वाइन की खपत महज 10 मिलीलीटर है जो पुर्तगाल और ऑस्ट्रेलिया के सामने कुछ भी नहीं है। गौरतलब है कि पुर्तगाल में जहां प्रति व्यक्ति वाइन की खपत 50 लीटर है वहीं ऑस्ट्रेलिया में यह आंकड़ा 28 लीटर है। चौगले ने इस बाबत बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया कि भारत में वाइन उद्योग के विकास की बहुत अच्छी संभावनाएं हैं जिसके लिए प्रशिक्षित लोगों की जरूरत भी पड़ेगी। इस इंस्टीटयूट के लिए जमीन अधिग्रहण के मामले ने काफी लंबा तूल पकड़ा लेकिन आखिरकार शैंपेन इंडिया अपनी वाइन उत्पादन इकाई के सामने इसके लिए 65 एकड़ जमीन खरीदने में कामयाब हो ही गई।
चौगले कहते हैं कि इस मामले में प्रशिक्षण देने में ऐडिलेड यूनिवर्सिटी का बहुत नाम है। उन्होंने बताया कि इस यूनिवर्सिटी के शिक्षाविद ही पाठयक्रम तैयार करेंगे और छात्रों को अंतरराष्ट्रीय स्तर का प्रशिक्षण प्रदान करेंगे। उन्होंने जानकारी दी कि छात्रों को डिग्री और डिप्लोमा ऐडिलेड यूनिवर्सिटी द्वारा दिया जाएगा और यह दुनिया भर में मान्य होगा। मतलब कि यहां के छात्रों को दुनिया में कहीं भी नौकरी मिल सकेगी। उम्मीद की जा रही है कि इंस्टीटयूट एक साल के अंदर बनकर तैयार हो जाएगा और 2009 में यहां विधिवत पाठयक्रमों की शुरुआत हो जाएगी।
यदि छात्र यह चाहते हैं कि उनकी पढ़ाई का कुछ हिस्सा ऐडिलेड यूनिवर्सिटी के कैंपस में हो तो इसमें कोई दिक्कत नहीं आने वाली है। चौगले का कहना है कि वे ऐसा कर सकते हैं। उनका मानना है कि इस इंस्टीटयूट के जरिये छात्र पढ़ाई के साथ-साथ औद्योगिक अनुभव भी ले सकेंगे। इस इंस्टीटयूट में दसवीं के बाद तीन साल का कोर्स किया जा सकता है, बारहवीं के बाद चार साल का कोर्स किया जा सकता है और स्नातक के बाद दो साल की मास्टर डिग्री में दाखिला लिया जा सकता है। इसमें छात्र वाइन मेकिंग, फाइनैंस और वाइन मार्केटिंग जैसे विषयों का प्रशिक्षण ले सकेंगे।