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भारत आने को आतुर हैं विदेशी विश्वविद्यालय

Last Updated- December 07, 2022 | 8:43 AM IST

व्यवसायिक शिक्षा से जुड़े कई विदेशी नामी गिरामी खिलाड़ी भी अब भारत में पांव पसारने की तैयारी में जुटे हुए हैं। उनका इरादा यहां अपना कैंपस स्थापित करना भी है।


कुछ विदेशी संस्थानों ने तो यहां कोर्स कराना भी शुरू कर दिया है, खासतौर पर प्रबंधन के क्षेत्र में। हालांकि कुछ ऐसे भी हैं जो फॉरेन एजुकेशन बिल पास हो जाने का इंतजार कर रहे हैं। यह विधेयक संसद में पिछले दो साल से लंबित है। अगर यह विधेयक पास हो जाता है तो देश के विश्वविद्यालयों में 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई)की गुंजाइश बन सकती है।

जब तक ऐसा नहीं होता तब तक वे भारतीय साझेदारों के साथ मिलकर के वल एक्सचेंज प्रोग्राम चला सकते हैं। इससे उनके  उत्साह में कोई कमी नहीं आती है। स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय, ब्रिटिश कोलंबिया विश्वविद्यालय, मैकगिल विश्वविद्यालय, साइमन फ्रेजर विश्वविद्यालय, क्यूबेक विश्वविद्यालय और मॉन्ट्रियल विश्वविद्यालय के अलावा कुछ और भी अंतरराष्ट्रीय स्तर के विश्वविद्यालय हैं जो भारत में अपना कैंपस स्थापित करने के लिए सरकार की मंजूरी का इंतजार कर रहे हैं।

सूत्रों का कहना है कि 40 अंतरराष्ट्रीय स्तर के विश्वविद्यालयों ने मुंबई-नासिक-पुणे इलाके में अपने कैंपस स्थापित करने के लिए महाराष्ट्र सरकार से जमीन मांगी है। इन संस्थानों द्वारा किए जाने वाले निवेश की रकम काफी मोटी है। मिसाल के तौर संयुक्त अरब अमीरात का  टेक्नोलॉजी एप्लाइड रिसर्च ऐंड टे्रनिंग भारत में अपना कैंपस स्थापित करने के लिए 30 से 35 करोड़ रुपये निवेश करने की योजना बना रहा है। यह संस्थान महाराष्ट्र या कर्नाटक में बड़ी जमीन के प्लॉट की खोज कर रहा है।

इस बीच सिंगापुर के  रैफेल एजुकेशन ग्रुप ने हैदराबाद में पहले से ही अपना सेंटर स्थापित कर दिया है और यह ग्रुप ब्रिटेन के नौटिंगम ट्रेंट यूनिवर्सिटी के एमबीए प्रोग्राम का ऑफर दे रहा है। इंडियन मर्चेंट चैंबर के अध्यक्ष एम. एन. चैनी का कहना है, ‘भारतीय शिक्षा व्यवस्था की स्थिति बेहद खराब है जबकि विदेश के विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक व्यवस्था, पाठयक्रम और वहां की फैकल्टी का स्तर भी बेहद अलग और स्तरीय है, उसका उपयोग कर हमें लाभ तो उठाना ही चाहिए।’

चैनी ने भारत में विश्वविद्यालयों को आमंत्रित करने के लिए कनाडा में 150 सदस्यों वाले प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया था। चैनी के मुताबिक विदेशी संस्थानों मसलन ब्रिटिश कोलंबिया, यार्क यूनिवर्सिटी, टोरंटो यूनिवर्सिटी, वॉटर यूनिवर्सिटी भी भारतीय शिक्षा सेक्टर में अपनी राह बनाने की होड़ में लगी हुई है। यार्क यूनिवर्सिटी का नामी गिरामी स्कूलिच स्कूल ऑफ बिजनेस भी भारत में अपना कैंपस बनाने की कोशिशों में जुटा हुआ है।

भारत ने टोरंटो के सेनेका स्कूल ऑफ एविएशन ऐंड फ्लाइट टेक्नोलॉजी ने एविएशन के क्षेत्र में सहयोग करने के  लिए कहा है। उच्च शिक्षा मंत्री विस्वा वर्नापाला ने एक प्रस्ताव पेश किया जिसे अप्रैल 2007 में कैबिनेट के मंत्रियों की सहमति से इसे सार्क देशों के विदेश मंत्रियों के पास भारत में दक्षिण एशिया विश्वविद्यालय बनाने की मंजूरी के लिए भेजा गया। ये विदेशी संस्थान प्रोग्राम फीस में कोई समझौता नहीं कर सकते हैं, हालांकि इनकी फीस में कमी तो आएगी ही। चैनी का कहना है कि अगर इन संस्थानों का कैंपस भारत में स्थापित होता है तो इसकी कीमतों में 30 से 40 प्रतिशत की कमी आना लाजिमी है।

First Published - July 1, 2008 | 10:09 PM IST

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