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गुड टाइम्स दूसरों के लिए बना बैड टाइम्स

Last Updated- December 07, 2022 | 12:41 AM IST

लाइफस्टाइल चैनलों की लड़ाई में अब नया मोड़ आ गया है। नये नवेले चैनल एनडीटीवी गुड टाइम्स ने बाजार में हिस्सेदारी और पहुंच के मामले में अपने प्रतिद्वंदियों को पीछे छोड़ दिया है।


एनडीटीवी गुड टाइम्स ने  डिस्कवरी ट्रैवल एंड लिविंग (टीएंडएल) को हटाकर नंबर एक की गद्दी हथियाई है। दूसरी ओर विशेषज्ञों का कहना है कि कि लाइफस्टाइल श्रेणी में रेटिंग, पहुंच और बाजार हिस्सेदारी मायने नहीं रखती बल्कि इसमें चैनल के बारे में बनी धारणा पर विज्ञापनदाता आकर्षित होते हैं।

लाइफस्टाइल चैनलों की श्रेणी में एनडीटीवी गुड टाइम्स, डिस्कवरी ट्रैवल एंड लिविंग, जी ट्रेंड्ज और फैशन टीवी जैसे चैनल आते हैं। इन चैनलों को सालान तौर पर तकरीबन 55 से 60 करोड़ रुपये के विज्ञापन मिलते हैं। इसमें गौर करने वाली बात यह भी है कि एनडीटीवी गुड टाइम्स को छोड़कर सारे चैनल पे चैनल हैं, केवल एनडीटीवी गुड टाइम्स फ्री टू एयर चैनल है।

इसका अर्थ यही है कि बाकी बचे चैनल अपने सब्सक्रिप्शन के जरिये भी राजस्व जुटाते हैं। दरअसल लाइफस्टाइल चैनल मीडिया कंपनियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो गए हैं क्योंकि ये चैनल अभिजात्य वर्ग द्वारा देखे जाते हैं। यह दर्शक वर्ग ऑटोमोबाइल, वित्तीय, बीमा, बैंकिंग, उपभोक्ता वस्तुओं और मोबाइल कंपनियों के लिए बेहद खास है क्योंकि इन चैनलों का दर्शक इन कंपनियों के उत्पादों का बहुत बड़ा उपभोक्ता है।

ऐसे में अगर ये कंपनियां अपने उपभोक्ता को संदेश देना चाहेंगी तो जाहिर है इस तरह के चैनल ही सामान्य मनोरंजन चैनलों की तुलना में अधिक मुफीद होंगे। इसके अलावा लाइफस्टाइल चैनलों के कार्यक्रमों को तैयार करने की लागत सामान्य मनोरंजन के कार्यक्रमों के मुकाबले कम भी होती है।

टैम के मार्च और अप्रैल के आंकड़ों के मुताबिक देश के 6 मेट्रो शहरों में एनडीटीवी गुड टाइम्स की बाजार हिस्सेदारी 46 फीसदी पहुंच गई जबकि डिस्कवरी टीएंडएल की बाजार हिस्सेदारी 27 फीसदी रही तो 24 फीसदी बाजार हिस्सेदारी के साथ फैशन टीवी इस सूची में तीसरे स्थान पर रहा। साथ ही एनडीटीवी गुड टाइम्स ने 6 मेट्रो शहरों में बड़े दर्शक वर्ग के बीच अपनी पैठ बनाई है।

यह दर्शक वर्ग विज्ञापकों के लिए बहुत मायने रखता है। टैम के 23 मार्च से 19 अप्रैल के बीच चार सप्ताहों के आंकड़ों के मुताबिक इस दौरान एनडीटीवी गुड टाइम्स की पहुंच 16 फीसदी रही जबकि डिस्कवरी टीएंडएल की पहुंच 11.7 फीसदी रही वहीं 9.7 फीसदी की पहुंच के साथ फैशन टीवी इस फेहरिस्त में तीसरे स्थान पर रहा तो 1.6 फीसदी पहुंच के साथ जी ट्रेंड्ज सबसे फिसड्डी रहा।

एनडीटीवी गुड टाइम्स न केवल दर्शक संख्या में सबसे आगे रहा बल्कि बाजार हिस्सेदारी में भी यह अपने प्रतिद्वंदियों से कहीं आगे रहा। एनडीटीवी के राहुल सूद ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया कि पिछले कुछ समय में ही हमारी बाजार हिस्सेदारी में दोगुने का इजाफा हुआ है। इसका मतलब है कि दर्शकों में हमारी स्वीकार्यता बढ़ी है और हर वर्ग के दर्शक हमारे कार्यक्रम देख रहे हैं। इस सफलता के चलते हम इस साल के आखिर तक हम पे चैनल बन सकते हैं।

गौरतलब है कि एनडीटीवी गुड टाइम्स, डिस्क्वरी एलएंडटी की शुरूआत के तीन साल बाद  सितंबर 2007 में शुरू हुआ था। बाजार हलकों में इस तरह के अनुमान लगते रहे हैं कि ‘गुडटाइम्स’ टैगलाइन लगाने और किंगफिशर के विज्ञापन दिखाने के बदले एनडीटीवी को किंगफिशर से 100 करोड़ रुपये मिले हैं।

बाजार हिस्सेदारी और रेटिंग में कमी आने के मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए डिस्कवरी एलएंडटी के एक वरिष्ठ अधिकारी कहते हैं कि  जहां तक डिस्कवरी एलएंडटी का सवाल है हमारा कोई प्रतिद्वंदी नहीं है। हमारा चैनल एक बेहद खास दर्शक वर्ग द्वारा देखा जाता है और हम इस श्रेणी के अगुआ हैं। डिस्कवरी के अधिकारी कहते हैं कि डिस्कवरी एलएंडटी की किसी और चैनल के साथ तुलना करना उसी तरह है जैसे सीएनएन और बीबीसी की तुलना किसी स्थानीय समाचार चैनल से  की जा रही हो।

वैसे विज्ञापन जगत के लोग भी लाइफस्टाइल चैनलों की रेटिंग को अलग चश्मे से देखते हैं। गुड़गांव की एक विज्ञापन एजेंसी के वरिष्ठ मीडिय प्लानर कहते हैं कि दोनों  चैनल के बीच कोई तुलना ही नहीं की जा सकती। एक चैनल पे चैनल है तो दूसरा फ्री टू एयर चैनल है।

जहां डिस्कवरी एलएंडटी पर अंतरराष्ट्रीय सामग्री आती है और वह उच्च वर्ग में देखा जाने वाला चैनल है तो एनडीटीवी गुड टाइम्स पर ज्यादातर स्थानीय सामग्री ही प्रसारित होती है और यह उच्च वर्ग, उच्च मध्यम वर्ग और मध्यम वर्ग के बीच देखा जाता है। उनका कहना है कि डिस्कवरी एलएंडटी पर विज्ञापन दिखाने की कीमत एनडीटीवी गुड टाइम्स से ज्यादा है। उनका मानना है कि इस श्रेणी में रेटिंग अहम नहीं होती।

जहां डिस्कवरी को सालाना 16 से 20 करोड़ रुपये के विज्ञापन मिलते हैं वहीं किंगफिशर से गठजोड़ करके गुड टाइम्स इस मामले में अपने प्रतिद्वंदी से काफी आगे निकल गया है। इसके अलावा फैशन टीवी और जी ट्रेंड्ज दोनों को तकरीबन मिलाकर 15 करोड़ रुपये के विज्ञापन मिलते हैं। एक विज्ञापन एजेंसी के अधिकारी का कहना है कि आप फैशन टीवी का ही उदाहरण लें।

कोई भी इसकी बाजार हिस्सेदारी और पहुंच के आधार पर इसका दर्शक वर्ग तय नहीं कर सकता। फैशन टीवी देश भर के बड़े और छोटे शहरों में केबव वाले घरों मे देखा जाता है। देर रात को फैशन टीवी के कार्यक्रम बड़ पैमाने पर देखे जाते हैं। रेटिंग के आधार पर फैशन टीवी पिछड़ा रहता है लेकिन इसके बावजूद विज्ञापनदाता फैशन टीवी के जरिये विज्ञापन देते हैं।

First Published - May 20, 2008 | 1:12 AM IST

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