हरियाणा के ज्यादातर लघु और मध्यम उद्योगों के सामने बिजली आपूर्ति का संकट गहराता जा रहा है जिसकी वजह से उनके परिचालन में बाधा आ रही है।
इसकी वजह से लगभग 6 से 8 घंटे बिजली की आपूर्ति बाधित रहने लगी है। आर्थिक रूप से सक्षम लघु और मध्यम उद्योग निजी इस्तेमाल के लिए डीजल जेनरेटरों पर निर्भर रहने को मजबूर हैं। कई लघु और मध्यम उद्योग, बिजली आपूर्ति बाधित होने की वजह से ही सही तरीके से काम करने में भी सक्षम नहीं हो पा रहे हैं।
इन जेनरेटरों से मिलने वाली बिजली पर कारोबारियों को लगभग 12.50 रुपये प्रति यूनिट खर्च पड़ता है, जबकि राज्य विद्युत बोर्ड की बिजली पर आने वाला खर्च 4.50 रुपये प्रति यूनिट है। जाहिर है इस तरह बिजली उत्पादन करने के लिए डीजल से चलने वाली जेनसेट की निजी इकाई से बिजली पाना सबके लिए मुमकिन नहीं होगा।
पंचकुला के दृश शूज लिमिटेड के प्रबंध निदेशक आईएस पॉल का कहना है, ‘सवाल केवल बिजली मुहैया कराने का ही नहीं, बल्कि इसकी क्वालिटी का भी है।’ उनका कहना है कि यहां वोल्टेज में भी 350 वोल्ट से 400 वोल्ट का अंतर आता है। रात में वोल्टेज तो बेहतर रहती है, लेकिन दिन में हालत बहुत खराब हो जाती है। अगर वोल्टेज में इस तरह का असंतुलन हो तो इससे मशीन के जल्दी खराब होने की संभावना बढ़ जाती है।
पॉल का कहना है, ‘बार-बार बिजली के वोल्टेज में होने वाले उतार चढ़ाव की वजह से उत्पादन के कम होने का भी खतरा मंडराता रहता है।’ कई छोटे कारोबारियों का का कहना है कि महंगी डीजल और जेनरेटरों पर आने वाले मोटे खर्च को उठाने का माद्दा उनमें नहीं हैं। वहीं दूसरी तरफ गुड़गांव में ऑटोमोबाइल उद्योग की सहायक ईकाइयां दूसरा विकल्प मौजूद न होने की वजह से बिजली के लिए जेनसेटों में ही निवेश कर रही हैं, ताकि वे समय पर अपना काम पूरा कर सकें।
एक उत्पादनकर्ता का कहना है कि,’हम सभी सरकार की उदासीनता का खामियाजा भुगत रहे हैं। ये लोग किसी भी प्रोजेक्ट पर आंख मूंद कर हामी भर दे देते हैं, चाहे वह कोई शॉपिंग मॉल हो या फिर हाउसिंग प्रोजेक्ट या मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट। वे इतना भी नहीं सोचते कि मौजूदा क्षमता को बढ़ाए बिना ये सब काम कैसे करेंगे?’ अंबाला के साइंटिफिक यंत्र उद्योग के मालिक की भी शिकायतें कुछ ऐसी ही हैं।
हरियाणा में बिजली की मांग है 9,000 मेगावॉट की, जबकि वहां उत्पादन होता है केवल 5,000 मेगावॉट का। राज्य सरकार का इरादा है कि तीन साल में सूबे में बिजली के उत्पादन को बढ़ाकर दोगुना कर दिया जाए, लेकिन इस राह में बाधाओं की कमी नहीं है। इसमें ज्यादा निवेश की जरूरत तो है ही, इसके अलावा नए पॉवर प्लांट्स के निर्माण से पहले तैयारी के लिए भी काफी लंबा समय चाहिए।
ओरियंटल इंजीनियरिंग वर्क्स प्राइवेट लिमिटेड के संयुक्त प्रबंध निदेशक रमन सलूजा का कहना है, ‘यमुनानगर के कारखानों को हर रोज 8 से 10 घंटे तक की लोडशेडिंग से जूझना पड़ता है। इससे यहां के कारखानों की हालत पस्त है।’ उनका मानना है कि हरियाणा में प्रस्तावित बिजली की अतिरिक्त क्षमता बढ़ोतरी के लिए इस क्षेत्र के निजी खिलाड़ियों का साथ जरूरी होगा।