facebookmetapixel
रेट कट का असर! बैंकिंग, ऑटो और रियल एस्टेट शेयरों में ताबड़तोड़ खरीदारीTest Post कैश हुआ आउट ऑफ फैशन! अक्टूबर में UPI से हुआ अब तक का सबसे बड़ा लेनदेनChhattisgarh Liquor Scam: पूर्व CM भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य को ED ने किया गिरफ्तारFD में निवेश का प्लान? इन 12 बैंकों में मिल रहा 8.5% तक ब्याज; जानिए जुलाई 2025 के नए TDS नियमबाबा रामदेव की कंपनी ने बाजार में मचाई हलचल, 7 दिन में 17% चढ़ा शेयर; मिल रहे हैं 2 फ्री शेयरIndian Hotels share: Q1 में 19% बढ़ा मुनाफा, शेयर 2% चढ़ा; निवेश को लेकर ब्रोकरेज की क्या है राय?Reliance ने होम अप्लायंसेस कंपनी Kelvinator को खरीदा, सौदे की रकम का खुलासा नहींITR Filing 2025: ऑनलाइन ITR-2 फॉर्म जारी, प्री-फिल्ड डेटा के साथ उपलब्ध; जानें कौन कर सकता है फाइलWipro Share Price: Q1 रिजल्ट से बाजार खुश, लेकिन ब्रोकरेज सतर्क; क्या Wipro में निवेश सही रहेगा?Air India Plane Crash: कैप्टन ने ही बंद की फ्यूल सप्लाई? वॉयस रिकॉर्डिंग से हुआ खुलासा

विकास को मार देगी या फिर छोड़ देगी महंगाई

Last Updated- December 07, 2022 | 6:04 AM IST

वर्तमान में एक सवाल बार बार उठ रहा है कि इस साल महंगाई बढ़ने का असर विकास पर होगा या नहीं। पिछले 3 साल से विकास दर 9 प्रतिशत से ऊपर चल रही है। लेकिन महंगाई बढ़ने से इस पर खतरे के बादल मंडराने लगे हैं।


उम्मीद की जा रही है कि महंगाई दर औसत 8 प्रतिशत रहेगी। यह सामान्य और स्वाभाविक होगी क्योंकि लंबे समय से (1995-96) यह दर बरकरार है। पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में हाल की बढ़ोतरी से उम्मीद की जा रही है कि इसमें करीब 1.2 प्रतिशत का इजाफा होगा (इसमें 0.6 प्रतिशत प्रत्यक्ष और 0.6 प्रतिशत परोक्ष प्रभाव शामिल है)।

इस पर खरीफ फसलों के उत्पादन का भी सकारात्मक या नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। अगर खरीफ की फसलें बेहतर होती हैं तो महंगाई दर में कमी आएगी। इन सब तथ्यों को ध्यान में रखते हुए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में कमी आना स्वाभाविक है। अर्थव्यवस्था पर चर्चा करने वाले लोगों द्वारा इस तरह की उम्मीद लगाना लाजिमी है। महंगाई दर में बढ़ोतरी होने से आम लोगों की खर्च करने की क्षमता में कमी आती है। इसका सीधा असर मांग पर पड़ता है। ब्याज दरों से प्रभावित होने वाले दो प्रमुख तथ्यों का असर औद्योगिक वृध्दि पर पड़ेगा।

रिजर्व बैंक ने अपने मौद्रिक नीति मानकों में मांग को कम करने के लिए कदम उठाए हैं, जिससे ब्याज दरों में बढ़ोतरी होना स्वाभाविक है। इससे फंडों की कीमत में बढ़ोतरी होगी और निवेश प्रभावित होगा। इसका सीधा असर औद्योगिक विकास पर पड़ेगा। इसके साथ ही मॉर्गेज सेगमेंट में उपभोक्ता ऋण भी प्रभावित होगा। इससे सभी संबंधित उत्पादों की मांग कम हो जाएगी।

ऑटोमोबाइल उद्योग भी ब्याज दरों के ढांचे पर बहुत ज्यादा निर्भर है। हालांकि अब भी यह बहस का मुद्दा है कि ब्याज दरों में होने वाले इस तरह के परिवर्तन, मांग को प्रभावित करते हैं या नहीं। बहरहाल, बहुत से कारण हैं, जिससे इस बात पर विश्वास किया जा सकता है कि बढ़ती महंगाई का विकास दर पर बुरा असर पड़ेगा। बहरहाल पिछले आंकड़े कुछ दूसरी ही कहानी बयान करते हैं। जब वित्त वर्ष 96 में महंगाई दर 8 प्रतिशत के आंकड़े को पार कर गई थी, हम विकास के पथ पर चलते ही गए थे।

इसके साथ ही विकास दर पांच साल तक बढ़ती ही रही। इसके बाद सबसे ज्यादा महंगाई दर वित्त वर्ष-01 में 7.2 प्रतिशत रही, उस समय जीडीपी विकास दर कम होकर 4.4 प्रतिशत रह गई। लेकिन ऐसा इसलिए हुआ कि कृषि क्षेत्र और सेवा क्षेत्र में वृध्दि दर कम रही, उसके बाद औद्योगिक मंदी भी आ गई। विनिर्माण क्षेत्र में इस साल जोरदार बढ़ोतरी दर्ज की गई। वास्तव में अगर देखें तो विनिर्माण क्षेत्र में कीमतों में होने वाली बढ़ोतरी का इस पर हमेशा सकारात्मक प्रभाव पड़ा है।

परंपरागत आर्थिक सिध्दांत के मुताबिक कीमतों में बढ़ोतरी से उद्योग ज्यादा उत्पादन करने की ओर आकर्षित होता है और इस मामले में ऐसा ही हुआ। समय के साथ साथ एक सेवा क्षेत्र में एक और सेतु बना है। भारत के सकल घरेलू उत्पाद में सेवा क्षेत्र का योगदान 55 प्रतिशत है। पिछले पांच साल में इस क्षेत्र में औसत विकास 10 प्रतिशत के आस पास रहा है। दो खास कारणों से सेवा क्षेत्र पर बढ़ी हुई महंगाई दर का प्रभाव नहीं के बराबर पड़ता है।

पहला- सरकारी क्षेत्र की सेवाओं पर महंगाई का प्रभाव कम ही पड़ता है और दूसरा असंगठित क्षेत्र है जो इस हालत में सांख्यिकीय आंकड़ों पर प्रभाव नहीं डालते। असंगठित क्षेत्र की सेवा क्षेत्र में हिस्सेदारी 40 प्रतिशत के करीब है। निर्माण क्षेत्र में पिछले 5 साल में औसतन 13.3 प्रतिशत की दर से विकास हुआ है। यह विकास इन्फ्रास्ट्रक्चर और हाउसिंग क्षेत्र में आए उछाल के कारण हुआ है।

इन्फ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र तो ऐसा है कि इस पर महंगाई बढ़ने का कोई खास प्रभाव नहीं पड़ने वाला है जबकि हाउसिंग क्षेत्र प्रभावित हो सकता है।  यहां दो बातें हो सकती हैं: रियल स्टेट की कीमतें भविष्य में ब्याज दरों के ढांचे पर निर्भर करेंगी। ब्याज से बढ़ने वाला भार रिटेल स्तर पर होने वाली खरीदारी पर असर डाल सकती है। लेकिन, क्या ब्याज दरें बढ़ेंगी?

पिछले 15 साल से ब्याज दरें रिजर्व बैंक द्वारा उठाए गए कदमों पर निर्भर रही हैं और महंगाई की चाल से जुड़ी रहीं। वर्ष 1994 से 2006 के बीच पीएलआर में कमी का रुझान बना रहा, जबकि पिछले दो साल में महंगाई दर औसत 5.1 प्रतिशत रहने के बावजूद दरें अधिक हुई हैं। इसके साथ ही ब्याज दरें इस समय फ्लोटिंग रेट ढांचे के आधार पर तय की जा रही हैं। इससे इस बात पर विश्वास किया जा सकता है कि ब्याज दरों में होने वाली बढ़ोतरी बहुत ज्यादा प्रभावित नहीं करेगी।

यह भी है कि अगर इस बात का अनुमान लगाया जाता है कि ब्याज दरें बढ़ जाएंगी तो इससे सभी डील पहले ही हो जाएंगी। यह भी है कि जीडीपी का करीब 62 प्रतिशत सेवा क्षेत्र के विस्तार से आने वाला है। इस पर उच्च ब्याज दरों का कोई प्रभाव पड़ने की संभावना नहीं है। इस तरह से अगर ब्याज दरों में बढ़ोतरी होती है तो 38 प्रतिशत हिस्सा ही महंगाई से प्रभावित होगा।

उद्योग जगत की जीडीपी में हिस्सेदारी 20 प्रतिशत है, जो कीमतों से सकारात्मक रूप से जुड़ा है, इसके महंगाई से तालमेल कर लेने की संभावना है। कृषि क्षेत्र में विकास दर महंगाई से स्वतंत्र है, यह मानसून पर ज्यादा निर्भर है। इन परिस्थितियों में इस साल के लिए जीडीपी में बढ़ोतरी या कमी का आकलन करना बहुत ही श्रमसाध्य है। सेवा क्षेत्र के लिए यह अनुमान लगाया जा सकता है कि यह अपने 10 प्रतिशत की वृध्दि दर के मार्ग पर चलता रहेगा, जो जीडीपी को 6.2 प्रतिशत विकास दर पर ले आएगा।

उद्योग का भार 20 प्रतिशत है। इसके बारे में परंपरागत रूप से आकलन करें तो वृध्दि दर 8 प्रतिशत बनी रहेगी। इसका प्रभाव जीडीपी पर 1.6 प्रतिशत पड़ेगा। हमने महत्वाकांक्षी निर्यात लक्ष्य रखे हैं, जहां विनिर्माण क्षेत्र ही प्रभावी है। इस क्षेत्र में पिछले दो दशक से चक्रीय प्रक्रिया चल रही है, जिसे देखें तो इस क्षेत्र में 4.5 प्रतिशत विकास दर नहीं रहेगी और पिछले साल की ही तरह परंपरागत अनुमानों के मुताबिक 2 प्रतिशत विकास दर का अनुमान लगाया जा सकता है।

इसका मतलब हुआ कि इस क्षेत्र का जीडीपी वृध्दि में योगदान 0.4 प्रतिशत रहेगा। इन तीन घटकों को जोड़ें तो विकास दर करीब 8.2 प्रतिशत आती है, जो पिछले साल दर्ज की गई 9 प्रतिशत विकास दर से कम है। इस तरह से इस साल समग्र विकास 8 से 8.5 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान है, जिसे कम नहीं कहा जा सकता।

First Published - June 18, 2008 | 10:43 PM IST

संबंधित पोस्ट