पिछले महीने रुपये की सेहत में आई कमजोरी से एक बार फिर से कई लोग-बाग हैरत में रह गए। इससे भी बड़ी हैरत आपको इस बात से होगी कि यह कोई नई बात नहीं है।
हर छह-आठ महीने में रुपया तो गुलाटी खाता ही है, जिसकी वजह से कई कंपनियों को पसीना आ जाता है। रुपये की डुबकी की वजह से अक्सर कंपनियों के बही खातों में लाल निशानों (घाटे) की तादाद कुछ ज्यादा ही बढ़ जाती हैं। उन्हें इन लाल निशानों से निपटने की राह ढूंढ़ते नहीं मिल पा रही है।
वैसे, भाई साहब इससे बचने की राह बिल्कुल मौजूद है और इसके लिए किसी रॉकेट साइंस की भी जरूरत नहीं पड़ेगी। इस राह को रिस्क मैनेजमेंट यानी जोखिम प्रबंधन कहते हैं। इसे अपनाने के लिए आपको अपनी चार आदतों में बदलाव लाना पड़ेगा। मार्केट में उतरने के साथ ही सबसे पहली बात यही सिखाई जाती है कि अपने काम पर ध्यान दो, बाजार को भूल जाओ।
यह किसी से मत पूछो कि कल या अगले हफ्ते या छह महीने के बाद या अगले साल रुपया किस स्तर पर होगा। जब तक आप ऐसा नहीं करते, आप रिस्क को अच्छी तरह से मैनेज नहीं कर पाएंगे। दूसरी तरफ, बाजार में उतरते ही आप से यह भी कहा जाता है कि अपने लिए एक ऐसी विनिमय दर तय कर लो, जिससे तुम्हें हर ट्रांजैक्शन पर कम ही सही, पर फायदा हो।
जब तक आप ऐसा नहीं करते, आप रिस्क को अच्छी तरह से मैनेज नहीं कर पाएंगे। तीसरी बात यह कि ऑप्शंस खरीदने के लिए कुछ रकम हमेशा बचाकर रखो। जब तक आप ऐसा नहीं करते, आप रिस्क को अच्छी तरह से मैनेज नहीं कर पाएंगे। आखिरी बात यह कि ज्यादा लालची नहीं बनो। अपने लिए मुनाफे की एक अधिकतम सीमा तय करके रखो और उसी के मुताबिक काम करो। जब तक आप ऐसा नहीं करते, आप रिस्क को अच्छी तरह से मैनेज नहीं कर पाएंगे।
इन चार बातों को हम सभी को गांठ बांध कर रखने के लिए कहा जाता है। इन्हें बदलने में तो कोई नुकसान नहीं है, लेकिन लकीर का फकीर बनकर कारोबार करना वित्तीय सेहत के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। तो क्या आप इन आदतों को बदलने के लिए तैयार हैं? पक्का? ठीक है, तो फिर इनके बारे में थोड़ा विस्तार से समझते हैं। पहली बात, मार्केट की तरफ मत देखो। यह अपने आप में काफी मुश्किल काम है। यह एक तरह की स्वाभाविक प्रतिक्रिया है।
आज के दाम और आयात या निर्यात से होने वाले फायदे के बारे में सोचने काफी हद तक स्वाभाविक है। आप इससे बच नहीं सकते। आज टीवी चैनल हर जगह मौजूद हैं, जो आपको इसके बारे में बताते रहते हैं। आपको दोस्त और कारोबारी साझेदार इसके बारे में बात करते हैं। आपका बॉस चढ़ती-उतरती कीमतों के बारे में आपकी राय जानना चाहेगा। आप इससे बच नहीं सकता। इससे निपटने का सबसे अच्छा तरीका यही है कि मुस्करा कर कहिए, ‘यह तो 42.60 ही है न? क्यों?’
किसी तरह का अनुमान लगाने से मत डरिये। आखिर कुछ सोचने में बुराई थोड़े ही है। हालांकि, जब वे लोग आपको यह बताने लगें कि वे क्या सोचते हैं, उनकी बात एक कान से सुनकर दूसरे कान से निकाल दीजिए। जानता हूं, कहना बहुत आसान होता है और करना काफी मुश्किल, लेकिन आपको इसकी आदत डालनी पड़ेगी। अगली बात यह कि अपना लक्ष्य तय करिए। फिर से यह काफी मुश्किल काम है क्योंकि टारगेट रेट को आज के रेट से कम रखने की जरूरत होती है।
इंसानी बर्ताव ही ऐसा होता है कि आज से ज्यादा बुरी हालत के बारे में सोचना भी पसंद नहीं करता। लेकिन आपको अलग हटकर सोचने की जरूरत है। क्यों? जब आप समंदर में तैरने के लिए जाते हैं, तो आपका इकलौता मकसद यह होता है कि आप डूबे नहीं। इसलिए तैरने के लिए जाने से पहले समंदर की तरफ जरूर देख लीजिए।
अगर ऊंची लहरें उठ रही हों और तूफान जोरों पर हो तो समंदर में मत उतरिये क्योंकि ऐसा करने से आप डूब जाएंगे। इसलिए अगर मार्केट में काफी उथल पुथल मची हो तो उसमें उतरने की जरूरत नहीं है। अगर आप भंवर में फंस भी गए तो आप हेजिंग के जरिये बच सकते हैं। दूसरी तरफ, अगर समंदर शांत है तो फिर उसमें कूदने से क्या डर? इसलिए तरह अगर मार्केट शांत है तो आप हेज फंडों की मदद के बिना भी बाजार में बने रह सकते हैं।
लेकिन आपको अपनी आंखें और कान खुले रखने की जरूरत है। आपको मार्केट की उठापटक पर पैनी नजर रखनी पड़ेगी। मार्केट आपके लक्ष्य के ज्यादा पास नहीं आना चाहिए। अपनी वित्तीय स्थिति और जोखिम उठाने की क्षमता के आधार पर आपको यह फैसला करना पड़ेगा कि मार्केट रेट और आपके टारगेट रेट में कितनी दूरी खतरे की घंटी है। फैसला आपको करना है, और अपने इस फैसले पर टिके रहें।
तीसरी बात यह है कि ऑप्शंस के लिए हमेशा कुछ पैसे बचाकर रखें। फिर से यह काफी मुश्किल काम है। लोग बाग उस चीज के लिए पैसे खर्च करना पसंद नहीं करते, जिन्हें वे महसूस नहीं कर सकते। वैसे, यह बात पूरी तरह से सच भी नहीं है। लोग-बाग बीमा तो खरीदते ही हैं। लेकिन भारत जैसे बाजार में कंपनियां ऑप्शंस के लिए प्रीमियम चुकाना पसंद नहीं करती। ज्यादातर हिंदुस्तानी कंपनियां जीरो कॉस्ट ऑप्शंस को चुनती हैं।
वे नहीं समझती हैं कि अगर आप कुछ खर्च नहीं करेंगे, तो आप कुछ कमाने की उम्मीद भी नहीं कर सकते। आपको ऑप्शंस खरीदने के लिए पैसे बचाकर रखने चाहिए। चौथी बात यह कि आप मुनाफे का स्तर तय करें और उसी के मुताबिक काम करें। यह सबसे मुश्किल है। हम से हर किसी ने मार्केट की बदतर हालत को देखा है, जब मुनाफे कम ही नहीं, गायब भी हो जाते हैं। हम चुपचाप खड़े देखते रहते हैं और कुछ नहीं कर पाते।
जैसे मेरे पिता से मैंने सिखा है, कोई भी मुनाफे की वजह से दिवालिया नहीं हुआ है। आपको बस एक स्तर को तय करने की जरूरत है और उसी के मुताबिक अपने फैसले लें। बस और किया। आपने अपना रिस्क मैनेजमेंट कर लिया है। इसके अलावा और कुछ करने की जरूरत नहीं है। अपनी बस ये चार आदतों को बदल लीजिए और फिर आपको घाटे के बारे में चिंता करने की जरूरत नहीं रहेगी। साथ ही, आप मुनाफा भी कमा पाएंगे। अगर आपने यह चार आदतें बदल लीं, तो आपके लिए बाजार में खेल करना बाएं हाथ का खेल हो जाएगा।