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डॉक्टरों और इंजीनियरों पर चला एमबीए का जादू

Last Updated- December 07, 2022 | 12:45 PM IST

आजकल भारत में प्रबंधन पाठयक्रमों का चलन बढ़ रहा है। देश में डॉक्टर हो या वकील, चार्टड एकाउंटेंट हो या फिर पत्रकार सभी एमबीए कोर्स करने की होड़ में लगे हैं।


इसकी वजह यह मानी जा रही है कि एमबीए करने के बाद उनको काम के दौरान भी अपने प्रोफेशन में थोड़ा बदलाव लाने का भी मौका मिल सकता है और वे अपनी मार्केट वैल्यू बढ़ा सकते हैं।

इस साल भी मेडिकल और फैशन टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों के प्रोफेशनल्स ने प्रीमियर बिजनेस स्कूल मसलन भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम), केजी सोमैया इंस्टीटयूट ऑफ मैनेजमेंट, जेवियर इंस्टीटयूट ऑफ मैनेजमेंट और इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस(आईएसबी) की राह पकड़ी है। आईएसबी के सीनियर डायरेक्टर ऑफ कम्यूनिकेशन भुवन रामालिंगम का कहना है, ‘पहले वैसे इंजीनियरों की संख्या खासी थी जो एमबीए करते थे। आजकल अलग क्षेत्रों जैसे पत्रकारिता और रक्षा सेवा से संबंध रखने वाले लोग भी प्रंबंधन कोर्स करने की ख्वाहिश रखने लगें हैं।’

के. जी. मुंबई के सोमैया इंस्टीटयूट ऑफ मैनेजमेंट ने अपने चयन की प्रक्रिया में बदलाव करते हुए अलग-अलग विषयों के उम्मीदवारों को भी तरजीह देने लगे हैं। पिछले साल यहां के 90 प्रतिशत छात्रों इंजीनियरिंग बैकग्राउंड के थे जबकि इस साल के 60 फीसदी छात्र ही इंजीनियर हैं। चयन की बदली हुई प्रक्रिया के तहत छात्रों के पिछले शैक्षणिक रिकॉर्ड के  लिए 12.5 प्रतिशत वेटेज दिया जाएगा। पिछले साल इस कोर्स के लिए इंजीनियरिंग के छात्रों पर ही विचार किया जाता था।

इस संस्थान ने काम करने वाले अनुभवी छात्रों के लिए 7.5 से 5 प्रतिशत की छूट भी दी है। इस तरह विभिन्न क्षेत्रों से जुडे युवाओं को भी इस योग्यता के दायरे में लाया गया है। आईआईएम अहमदाबाद के चेयरपर्सन (एडमीशन) सतीश देवधर का कहना है, ‘आईआईएम अहमदाबाद में दूसरे तरह का ट्रेंड ये है कि यहां चार्टड एकाउंटेंट एमबीए कर रहे हैं। पहले अर्थशास्त्र विषय के छात्र एमबीए करते थे लेकिन आज कई इंजीनियर और सीए भी एमबीए करना चाहते हैं। अर्थशास्त्र के छात्रों के लिए बीपीओ या हॉस्पीटैलिटी जैसे क्षेत्रों में अपना विकल्प तलाश रहे हैं।’

भुवनेश्वर के जेवियर इंस्टीटयूट ऑफ मैनेजमेंट में इस साल 60 फीसदी से ज्यादा छात्र इंजीनियर हैं। कई लोगों को ऐसा महसूस होता है कि एमबीए प्रोग्राम के तहत सीखने का पूरा अनुभव मिलता है। देवधर का कहना है, ‘मैनेजेमेंट एजुकेशन से छात्रों को एक बेहतर शुरुआत करने का मौका मिलता है। एमबीए करने के बाद छात्रों को अच्छा-खासा वेतन भी मिलता है, मिसाल के तौर पर आईआईएम के एमबीए छात्र का औसतन वेतन 10 लाख रुपये है। एमबीए जैसे कोर्स के जरिए छात्र बाजार में अपनी वैल्यू और बढ़ाने की कोशिश में लगे हैं।’ एमबीए करने वाले लोगों का ऐसा मानना है कि इस कोर्स के जरिए पहले से स्थापित शैक्षणिक व्यवस्था में जो खाई है उसे पाटा जा सकता है।

First Published - July 22, 2008 | 10:20 PM IST

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