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तेलंगाना राष्ट्र समिति का राष्ट्रीय पुनर्जन्म

Last Updated- December 11, 2022 | 1:43 PM IST

महज कुछ समय पहले तक दिल्ली के समृद्ध इलाके में ​5, सरदार पटेल मार्ग वाला आवास खाली पड़ा था। परंतु इस वर्ष के आरंभ में भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) ने इसे पट्टे पर ले लिया। बीआरएस दरअसल तेलंगाना राष्ट्र समिति यानी टीआरएस का परिवर्तित ​अ​खिल भारतीय स्वरूप है। 
मुलायम सिंह यादव के अंतिम संस्कार में शामिल होने के बाद हैदराबाद लौटते समय टीआरएस प्रमुख के चंद्रशेखर राव ने दिल्ली में अपनी राष्ट्रीय पार्टी के अस्थायी कार्यालयों का निरीक्षण किया।
उन्होंने दिल्ली के महंगे इलाके वसंत विहार में 1,200 वर्ग मीटर के भूखंड का भी दौरा किया जो सरकार द्वारा आवंटित किया गया है और जहां पार्टी का स्थायी दिल्ली कार्यालय बनाया जा रहा है। उनके वास्तु विशेषज्ञ, विश्वस्त मंत्री और अफसरशाह भी उनके साथ थे। पार्टी के नेताओं को भारतीय निर्वाचन आयोग भेजा गया ताकि वह उसे सूचित कर सकें कि चुनाव चिह्न, पदा​धिकारी आदि सब समान हैं, बस टीआरएस का नाम अब बदलकर बीआरएस हो गया है।
कोविड के बावजूद तेलंगाना का प्रदर्शन बहुत अच्छा है। इस वर्ष फरवरी में वित्त मंत्री हरीश राव ने 2022-23 का बजट प्रस्तुत किया था जो आशा जगाने वाली तस्वीर पेश करता है। हालांकि हालात अभी भी बिगड़ सकते हैं। 2022-23 की राजस्व प्राप्तियों के 1.93 लाख करोड़ रुपये से अ​धिक रहने का अनुमान है। यह 2021-22 के संशो​धित अनुमानों में 24 फीसदी का इजाफा है। इसमें से 1.33 लाख करोड़ रुपये यानी करीब 69 प्रतिशत हिस्सा राज्य द्वारा अपने संसाधनों से जुटाया जाएगा जबकि शेष हिस्सा केंद्र की ओर से आएगा।
गैर कर राजस्व की बात करें तो 2022-23 में उसके 2021-22 के संशो​धित अनुमान से 13 फीसदी ज्यादा होने का अनुमान है। परंतु बजट अनुमान और 2021-22 के संशो​धित अनुमान का अंतर 33 फीसदी की गिरावट दिखाता है। ऐसा मुख्य तौर पर जमीन और संप​त्ति की बिक्री से होने वाले कम कर संग्रह के कारण हुआ राज्य सरकार का अनुमान है कि ऐसा कोविड के कारण हुआ।
अगर दुनिया में बच्चों के वस्त्र बनाने वाली दूसरी सबसे बड़ी कंपनी किटेक्स ने 2021-22 में जबरदस्त निवेश नहीं किया होता तो हालात शायद काफी खराब होते। किटेक्स ने केरल में ​वि​भिन्न प्रकार की दिक्कतों का हवाला देते हुए वहां से कारोबार समेट लिया और तेलंगाना के वारंगल जिले में अपना काम शुरू किया। इस निवेश के लिए नौ राज्यों के बीच होड़ थी।
कंपनी के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक साबू जैकब की टीम को एक विशेष उड़ान के माध्यम से को​च्चि से हैदराबाद लाया गया और उसी शाम तेलंगाना के उद्योग मंत्री के टी रामा राव ने ट्वीट किया कि कंपनी वारंगल में 1,000 करोड़ रुपये का आरं​भिक निवेश करेगी। बच्चों के कपड़े बनाने वाली गैप और बनाना रिप​ब्लिक जैसी कंपनियां किटेक्स से ही खरीद करती हैं। ​गत वर्ष सितंबर में केरल के मलाबार समूह ने हैदराबाद में स्वर्ण और आभूषण निर्माण इकाई की स्थापना के जरिये 7,500 करोड़ रुपये का निवेश करने की घोषणा की थी।
आने वाले दिनों में तेलंगाना जिसकी वजह से सुर्खियों में रहने वाला है वह है दुनिया का सबसे बड़ा औष​धि पार्क जो 190,000 एकड़ में स्थापित किया जा रहा है। यह हैदराबाद के ठीक बाहर ​स्थित है। चूंकि औष​धि उद्योग में प्रदूषण काफी अ​धिक होता है इसलिए शहर के बाहर होने के कारण इसे पर्यावरण संबंधी मंजूरी जल्दी मिल जाएगी। राज्य सरकार पहले ही इस बारे में जरूरी कदम उठा चुकी है। किसी भी कंपनी को केवल जमीन चिह्नित करके निर्माण शुरू करना होगा।
जब कोविड के कारण वुहान शहर को बंद किया गया था तब चीन से आने वाली औष​धि निर्माण सामग्री का आना भी बंद हो गया था। यह दोबारा न हो इसके लिए तेलंगाना के संयंत्र में एक अलग हिस्सा ऐसे ही घटकों तथा वि​शिष्ट रसायनों के लिए होगा। यह निर्णय वुहान में हुई बंदी के बाद लिया गया और यह बात तेलंगाना की चुस्ती दर्शाती है।
इन बातों का मतलब है ढेर सारे रोजगार। यही वजह है कि केसीआर को लगता है कि जो कुछ तेलंगाना के लिए कारगर साबित हुआ वह पूरे देश के लिए उपयुक्त हो सकता है। उनका मानना है कि तेलंगाना में अब ​स्थिरता है और अब बारी है पार्टी का प्रसार करने की।
केसीआर ने टीआरएस की स्थापना 2001 के जाड़ों में की थी। तब उन्होंने विधानसभा उपाध्यक्ष का पद छोड़ा था और तेलुगू देशम पार्टी से इस्तीफा दिया था। 2001 की गर्मियों में अविभा​जित आंध्र प्रदेश के स्थानीय निकाय चुनाव हुए थे। टीआरएस का प्रदर्शन इतना शानदार रहा कि तेलुगू देशम पार्टी को 20 जिला परिषदों में से केवल 10 में जीत मिली। ऐसा तब हुआ जब कांग्रेस, टीआरएस और तेलुगू देशम के बीच त्रिकोणीय मुकाबला हुआ था। माहौल भांपते हुए कांग्रेस ने तत्काल टीआरएस के साथ लोकसभा चुनाव के लिए समझौता किया। केसीआर की रैलियों को खूब जनसमर्थन मिला। वर्ष 2004 में लोक सभा और विधानसभा चुनाव में दोनों दल मिलकर लड़े और पार्टी ने 26 विधानसभा और पांच लोकसभा सीट जीतीं।
उन्होंने कांग्रेस से तेलंगाना को राज्य का दर्जा देने की मांग जारी रखी। कांग्रेस टालमटोल करती रही। आखिरकार केसीआर ने गठबंधन सरकार से हाथ खींच लिए और श्रम मंत्री के पद से इस्तीफा देते हुए धमकी दी कि वह तेलंगाना के लोगों को धोखा देने के लिए कांग्रेस की पोल खोल देंगे। 2014 और 2018 में टीआरएस को विधानसभा चुनावों में जीत मिली।
उसके बाद से पार्टी को झटके भी लगे। 2019 में 17 लोकसभा सीट में से भाजपा को चार सीट ही हासिल हुईं लेकिन उसने केसीआर की बेटी के कविता को पराजित कर दिया। 2021 में हुजुराबाद उपचुनाव में भी भाजपा ने पार्टी को हरा दिया। शुरुआती उतारचढ़ाव वाले रिश्ते के बाद अब केसीआर और भाजपा कटु शत्रु हैं। मुनुगोड विधानसभा उपचुनाव 3 नवंबर को होना है और उससे हवा की दिशा का सही अंदाजा लगेगा।
इस बीच केसीआर कांग्रेस के अलावा हर विपक्षी दल से बात कर रहे हैं। बीआरएस की शुरुआत के वक्त उन्होंने कहा कि तेलंगाना के मुख्यमंत्री के रूप में वह पूरे देश में जाएंगे और इस बारे में किसी को कोई संदेह नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक जीवंत भारत बनाने की जरूरत है और अगर संसाधनों का उचित इस्तेमाल किया जाए तो भारत अमेरिका से बेहतर हो सकता है। 
उन्होंने कहा कि वह पार्टी का देश भर में विस्तार करेंगे। बीआरएस का पहला निशाना महाराष्ट्र है, खासतौर पर किसान संगठन। उसके बाद हैदराबाद में देश भर के दलित संगठनों का सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। विपक्ष की राजनीति एक और दिलचस्प मोड़ लेने जा रही है। 

First Published - October 14, 2022 | 9:21 PM IST

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