गुरुवार को सिएट एक ऐसी परीक्षा के नतीजों का ऐलान करने वाली है, जिसके बारे में किसी भारतीय कंपनी ने पहले सोचा तक नहीं था।
मुल्क की चौथी सबसे बड़ी टायर निर्माता कंपनी अपने टॉप 110 मैनेजरों के बर्ताव का आकलन कर रही है और उन सभी को स्कोरकार्ड भी दिया जाएगा। यह एक ऐसी कंपनी के लिए बड़ी बात है, जो कुछ महीनों पहले तक अपने कर्मचारियों के कामकाज की समीक्षा कागज और पेंसिल से किया करती थी।
अभी कुछ ही दिन पहले ही वहां अपरेजल के लिए ऑनलाइन सिस्टम को लागू किया गया है। इस बदलाव के लिए जिम्मेदार जो शख्स है, उसका नाम है राहुल घटक। राहुल कंपनी में वाइस प्रेसिडेंट (एचआर) हैं। उनके मुताबिक यह बदलाव तो वह उस पुरानी कहावत को अमली जामा पहनाने की कोशिश है, जिसके अनुसार आप जिस काम को माप सकते हैं उसे कर भी सकते हैं।
कंपनियां अक्सर अपने बड़े अफसरों के बर्ताव को मापने से बचने के लिए एक ऐसी चीज की संज्ञा दे देती हैं, जिसे मापना नामुमकिन है। घटक का कहना है, ‘हम अपने मैनेजरों के व्यवहार को मापकर इस नजरिये को बदलने की कोशिश कर रहे हैं।’ इस सिस्टम को कंपनी ने नाम दिया है, ‘इम्पॉवर’। इस बनाने के लिए कंपनी ने एचआर क्राफ्ट बिजनेस कंसल्टिंग की मदद से बनाया है।
असल में यह केवल एक ऑनलाइन फीडबैक फॉर्म है, जिसे 852 कर्मचारियों को भरने के लिए दिया गया। इसमें उन्हें कुछ सवालों के जवाब देने थे, जिससे यह पता चल सके कि उनके मैनेजरों का बर्ताव उनके पद के अनुरूप था या नहीं। हर सवाल पर निश्चित अंक का था। सबके फॉर्म को जमा करके उसके आधार पर कंपनी के टॉप 110 मैनेजरों को फाइनल स्कोर दिए जाएंगे।
इन सभी मैनेजरों के नीचे कम से कम चार लोग काम करते हैं। उनके नीचे काम करने वाले लोगों के अलावा पूरी कंपनी के वे 852 कर्मचारी भी उन्हें अंक देंगे, ताकि उनका कंपनी के दूसरे लोगों के प्रति रवैया मापा जा सके। यह प्रयास केवल दिखावा भर बन कर न रह जाए, यह सुनिश्चित करने के लिए कंपनी के प्रबंध निदेशक (एमडी) और मैनेजमेंट कमेटी के सदस्यों के काम और बर्ताव की समीक्षा उनके मातहत करेंगे।
‘इम्पॉवर’ कंपनी के टॉप मैनेजमेंट को भी काफी पसंद है। इसलिए तो इसे जब कंपनी के मार्च में एंबे वैली में आयोजित अपने चिंतन शिविर में इसका प्रस्ताव रखा गया तो इसे फौरन स्वीकार कर लिया गया। आज तो इस पर बखूबी काम भी हो रहा है। इस बारे में स्कोरकार्ड गुरुवार को आने वाला है, जिसमें पहली तिमाही में मैनेजरों के बर्ताव का आकलन किया जाएगा।
इस पूरी कवायद को वित्त वर्ष की आखिरी तिमाही में फिर से दोहराया जाएगा, ताकि दोनों के बीच तुलना की जा सके और यह पता लगाया जा सके कि कितनी तरक्की हुई है। इस पूरी कवायद का मकसद काफी साफ है। सिएट टैलेंट को काफी अहम चीज समझता है। अगर कंपनी को अच्छे लोगों को अपने पास बरकरार रखना है, तो टॉप मैनेजरों को यह समझना पड़ेगा कि उनकी कर्मचारियों के बीच क्या स्थिति है।
घटक का कहना है कि, ‘सबसे बड़ी चुनौती तो इस कवायद से पहले लोगों के दिल में इसके लिए दुर्भावना से निपटने की थी। कई लोग इसे मैनेजमेंट का एक और चोंचला मान रहे थे। 50 साल पुरानी किसी कंपनी में ऐसी बातें तो होती ही रहती हैं। कर्मचारियों की सबसे बड़ी चिंता तो यही थी कि क्या उनके रिस्पॉन्स गोपनीय रहेंगे, ताकि वे खुले तौर पर अपनी राय दे सकें?
मैनेजरों को चिंता यह थी कि क्या उन्हें अब कैमरे की निगरानी में काम करना पड़ेगा और कर्मचारी बदला चुकाने के लिए इस सिस्टम का दुरुपयोग कर सकते हैं? इसीलिए हमने लोगों के साथ सीधा संपर्क साधने की ठानी। हमने उन्हें ईमेल भेजे और ब्रौशर बांटे। साथ ही, हमने मैनेजमेंट के हरेक कर्मचारी के साथ बैठक की।
एक बार लोगों को भरोसा हो गया कि मैनेजमेंट काफी गंभीर है, तो उन्होंने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। इसमें मैनेजमेंट के कम से कम 88 फीसदी कर्मचारियों ने हिस्सा लिया, जो किसी पहल के लिए रिकॉर्ड है।’ वैसे, राहुल के मुताबिक इस इम्पॉवर कार्यक्रम में तो स्कोरकार्ड बस एक शुरुआत भर है। असल कवायद तो इसके बाद शुरू होगी।
अगले कदम में एचआर बिजनेस मैनेजरों के लिए कार्यशालाएं आयोजित करेगी, ताकि वह अपने स्कोर को समझ पाएं और अपनी 0टीम के साथ और अच्छे से पेश आएं। कंपनी ने अच्छे मैनेजर बनाने के लिए एक हैंडबुक भी तैयार की है, जिससे मैनेजर अलग-अलग दिक्कतों से निपटना सीख सकते हैं। घटक को उम्मीद है कि इन कदमों से उनकी कंपनी में एक खुली और पारदर्शी व्यवस्था अपनी जगह बना पाएगी।
साथ ही, इससे मैनेजरों का बर्ताव भी काफी हद तक सुधर पाएगा। इससे भी ज्यादा अहम बात यह है कि इस तरह के कदमों से कंपनी के बारे में काफी अच्छी छवि बनती है, जिसकी वजह ज्यादा से ज्यादा कुशल लोग कंपनी की तरफ आते हैं। इसी कदम का नतीजा यह है कि इस साल सिएट मुल्क के बड़े-बड़े बी स्कूलों से 10 मैनेजमेंट ट्रेनी हासिल करने में सफल रही।
पिछले साल इंटर्नशिप करने के लिए केवल दो मैनेजमेंट ट्रेनी आए थे। कंपनी से कुशल लोगों के छोड़कर जाने की दर भी इस साल गिरकर 6 फीसदी पर आ गई है, जबकि इंडस्ट्री का औसत 20 फीसदी है। कंपनी सीधा सा संदेश देना चाहती है – सिएट एक टैलेंट फ्रेंडली कंपनी है। यह इस कंपनी के लिए काफी अहम है क्योंकि उसने अगले पांच सालों में अपने स्तर को दोगुना करने का करने का लक्ष्य रखा है।
‘इम्पॉवर’ जैसे कदम काफी दूर तलक जाएंगे। ऐसा इसलिए क्योंकि यह एचआर मैनेजरों को बोर्डरूम से आगे बढ़कर सोचना सिखाते हैं। आज की तारीख में एचआर मैनेजरों की असल नतीजे देने की क्षमता पर एक बहुत बड़ा सवालिया निशान है। इसलिए तो आज कई एचआर मैनेजर पूरे के पूरे सांगठनिक ढांचे को बदलने पर जोर दे रहे हैं, ताकि कंपनी की रणनीतियां ऊपर से लेकर नीचे तक बेहद आसानी से पहुंच जाएं।