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सुरक्षा नियम कड़े करने की जरूरत

Last Updated- December 11, 2022 | 3:55 PM IST

 टाटा संस के पूर्व चेयरमैन साइरस मिस्त्री और उनके पारिवारिक दोस्त जहांगीर पंडोले की रविवार को कार दुर्घटना में दुखद मृत्यु से भारत में कार यात्रियों के लिए ढीले सुरक्षा नियम एक बार फिर सुर्खियों में आ गए हैं। मिस्त्री और पंडोले मर्सिडीज स्पोर्ट्स यूटिलिटी व्हीकल की पिछली सीट पर बैठकर यात्रा कर रहे थे और उन्होंने कथित रूप से सीट बेल्ट नहीं पहनी हुई थी। अगर उन्होंने सीट बेल्ट पहनी होती तो वे आगे की सीट पर बैठे ड्राइवर और सह-यात्री की तरह बच सकते थे। विडंबना यह है कि पिछली सीट बेल्ट केंद्रीय मोटर वाहन नियमों के तहत अनिवार्य हैं, लेकिन इस नियम का बहुत कम पालन होता है। वर्ष 2019 में 11 शहरों में एक अध्ययन में केवल 7 फीसदी लोगों ने कहा कि वे पिछली सीट बेल्ट का इस्तेमाल करते हैं और केवल 27 फीसदी ही उनका इस्तेमाल अनिवार्य होने को लेकर जागरूक थे। 
रविवार की दुर्घटना उस चिंताजनक आंकड़े में इजाफा करती है, जिसमें भारत सड़क दुघर्टनाओं में मृत्यु के मामले में विश्व के शीर्ष 10 देशों में शामिल है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने पिछले महीने संसद में बताया था कि सड़क दुर्घटनाओं में हर साल करीब 1,50,000 लोगों की मृत्यु होती है। ये सभी मौत पूरी तरह लापरवाही या नशे में गाड़ी चलाने से टक्कर से नहीं होती हैं। इस आंकड़े में राजमार्गों को पार करने और लापरवाह पैदलयात्रियों से संबंधित मौतों से इजाफा होता है। लेकिन अगर पिछली सीटबेल्ट और एयरबैग को लागू किया जाए तो ड्राइवरों और यात्रियों की इन मौतों में से काफी को रोका जा सकता है। इस हकीकत को मद्देनजर रखते हुए कमर की बेल्ट के बजाय मध्य पिछली सीट के यात्रियों के लिए वाई-बेल्ट की शुरुआत और सभी कारों, भले ही उनका आकार कितना भी हो, में साइड एयरबैग लगाए जाने को अनिवार्य बनाने के सरकार के प्रस्ताव का कार उद्योग के विरोध का कोई बचाव नहीं है। उद्योग ने तर्क दिया है कि अतिरिक्त सुरक्षा जरूरतों- मुख्य रूप से छह एयरबैग लगाने से कारों की कीमत ऐसे समय बढ़ेगी, जब यह उद्योग कमजोर मांग से जूझ रहा है। उनका कहना है कि कार खरीदार सुरक्षा फीचर के लिए ज्यादा कीमत चुकाने को तैयार नहीं हैं। 
यह याद किया जाना चाहिए कि कार कंपनियों ने आगे की सीट बेल्ट और एयरबैग को अनिवार्य बनाने का भी तब तक विरोध किया था, जब तक उन्होंने यह नहीं पाया कि सुरक्षा फीचर और मांग के बीच कोई संबंध नहीं है। कार बाजार छोटी कारों के बाजार को लेकर तर्क दे रहा है। वह इस तथ्य पर विचार नहीं कर रहा है कि ये आज खास तौर पर भारतीय सड़कों पर सबसे असुरक्षित वाहन हैं क्योंकि विनिर्माताओं ने लागत बचाने के लिए बॉडी की मोटाई लगातार घटाई है। देश भर में सिक्स लेन हाईवे के फैलाव का मतलब है कि रफ्तार सीमा बढ़कर 100 किलोमीटर प्रति घंटा हो गई है, जिससे कारों में सुरक्षा फीचर और अहम हो गए हैं। पिछले महीने गडकरी का कार विनिर्माताओं के दोहरे मानदंड अपनाने की बात कहना सही था। वे भारतीय बाजार के लिए जो कार बनाती हैं, उनमें सुरक्षा फीचर नहीं जोड़ना चाहती हैं, लेकिन निर्यात होने वाले मॉडलों में ये फीचर शामिल करती हैं। सरकार को मुखर कार विनिर्माताओं की लॉबी का प्रतिरोध करना चाहिए और एयरबैग पर नियत 1 अक्टूबर की डेडलाइन पर अडिग रहना चाहिए। रविवार की दुर्घटना से अब इस बारे में गंभीरता से विचार होना चाहिए।
 

First Published - September 5, 2022 | 10:36 PM IST

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