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नया जमाना नया ब्रांड

Last Updated- December 07, 2022 | 12:41 AM IST

बात 1897 की है जब आर्देशिर गोदरेज नामक एक नौजवान ने वकालत का पेशा छोड़ कर ताला बनाने का धंधा शुरू किया।


वह अलमारियां एवं सुरक्षा उपकरणों के साथ-साथ वनस्पति तेल से टॉयलेट साबुन भी बनाता था। उसने कभी सोचा भी नहीं था कि एक दिन उसका कारोबार 7,000 करोड़ रुपये के स्तर तक पहुंच जाएगा या वह उन शीर्ष अधिकारियों में शुमार हो जाएगा जिनके बाल पक चुके होते हैं और वे लंबे कपड़े पहनते हैं। आशुतोष तिवारी ने भी ऐसा ही किया।

गोदरेज इंडस्ट्रीज के कार्यकारी उपाध्यक्ष (स्ट्रेटेजिक मार्केटिंग) तिवारी ने इस समूह में बदलाव लाने में अहम भूमिका निभाई। पिछले महीने गोदरेज समूह ने तीन चटकीले रंगों – हरा, नीला और लाल -वाले नए लोगो का अनावरण किया है। अतीत में या पिछले एक या दो दशक पहले ऐसा बदलाव धर्म के खिलाफ करार दिया जाता था। पुराना ग्राहक जनाधार खोने का भी भय बना रहता था। बाद में ब्रांड को स्वीकार कर लिया गया। उदाहरण के लिए, टाटा समूह ने एक दशक पहले ब्रांडिंग को चुना।

पिछले महीने आरपीजी की गोयनका ने भी नया विज्ञापन जारी किया जिसमें सिएट टायर से गैंडा बाहर निकलते हुए दिखाया गया है। इसी तरह दवा कंपनी निकोलस पीरामल ने भी हाल ही में बदलाव किया है। कंपनी ने योग की ज्ञान मुद्रा वाले लोगो में परिवर्तन किया है।

कंपनी के नए लोगो में अंगूठा और तर्जनी उंगली को जोड़े हुए दिखाया गया है बाकी तीन उंगलियां थोड़ी झुकी हुई हैं। ये तीनों ब्रांड प्रमुख व्यापार हस्तियों से संबद्ध हैं। ये बदलाव खासतौर से बदलते बाजार हालातों से प्रेरित हैं।

नजरिया

अपनी ब्रांड रणनीति पर ध्यान केंद्रित करने की गोदरेज की पहल 18 महीने पहले उस वक्त शुरू हुई थी जब इसने अपनी मास्टर ब्रांड रणनीति को और अधिक मजबूत बनाने के लिए वैश्विक ब्रांड मूल्यांकन कंसल्टेंट्स इंटरब्रांड की सेवा ली थी। गोदरेज गु्रप के अध्यक्ष आदि गोदरेज कहते हैं, ‘भारतीय उपभोक्ताओं की मांग अब बढ़ गई है। हम हमेशा से बदलाव और बाजार को पुनर्परिभाषित करने के लिए प्रयासरत रहे हैं और इसका असर विपणन ओर ब्रांडिंग रणनीति में दिखेगा।’

जनसांख्यिकी आंकड़ों के मुताबिक भारतीय उपभोक्ताओं में 2010 तक युवाओं का बड़ा भाग शामिल हो जाएगा। देश की आबादी का आधा हिस्सा 25 वर्ष की उम्र से नीचे का होगा। यदि गोदरेज ब्रांड तकरीबन 40 करोड़ उपभोक्ताओं तक रोजाना पहुंच बनाता है (देश की आबादी के 30 प्रतिशत से अधिक) तो इसमें युवाओं की बड़ी भागीदारी स्पष्ट दिखेगी।

इसी तरह टायर निर्माता सिएट का नया लोगो आधुनिकता का प्रतीक है। आरपीजी समूह के अध्यक्ष हर्ष वी. गोयनका कहते हैं, ‘नए लोगो का डिजाइन अगली पीढ़ी की बाजार जरूरतें पूरी करने के विजन के साथ आज के सिएट को दर्शाता है।’

पीरामल एंटरप्राइजेज के लिए यह बदलाव अलग है। 20 वर्षों में 16 अधिग्रहणों के बाद विभिन्न हस्तियों के साथ यह कई कंपनियों वाला घराना बन गया है। पीरामल एंटरप्राइजेज की निदेशक (रणनीतिक गठजोड़ एवं संचार) स्वाति पीरामल कहती हैं, ‘अतीत में हम विलय और अधिग्रहणों के जरिये तेजी से आगे बढ़े।’ वैसे, इस फर्म को एक अलग पहचान की जरूरत है।

बदलती तस्वीर

बदलती औद्योगिक सक्रियता ने रीब्रांडिंग की कुछ पहलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सिएट के उपाध्यक्ष (बिक्री एवं विपणन) अर्णव बनर्जी कहते हैं, ‘आज ऑटोमोबाइल क्षेत्र में नई कारों और भारी वजन ढोने वाले ट्रकों के संदर्भ में गैंडा और ‘बॉर्न टफ’ टैगलाइन अप्रचलित हैं।’

आज बाजार संरचना में कई और बदलाव भी आए हैं। भारत में कमर्शियल या क्रॉस प्लाई टायरों की भागीदारी समूचे बाजार पर तकरीबन 65 प्रतिशत की है जो यूरोप या अमेरिका की तुलना में बिल्कुल भिन्न है जहां यात्री कार टायरों की बाजार भागीदारी 60 प्रतिशत है।

हालांकि कई नए वाहन भारत में आकर्षक यात्री कार के सेगमेंट में प्रवेश कर रहे हैं। इसे देखते हुए कंपनी अब रेडियल टायरों पर अपना ध्यान केंद्रित कर रही है जिसका फिलहाल महज 10 प्रतिशत का घरेलू बाजार है। बनर्जी ने कहा, ‘रेडियल की मांग बढ़ने के साथ क्रॉस प्लाई टायर अप्रचलित हो जाएंगे। हम संभावित चुनौती को अवसर में तब्दील कर रहे हैं।’

गोदरेज के मामले में, ब्रांड क्रांति से फूड्स, रियल एस्टेट, फर्नीचर जैसे इसके डाइवर्सिफाइड व्यवसायों को मजबूती मिलेगी। कंज्यूमर बिजनेस को लेकर कंपनी ने एक शोध में पाया कि उपभोक्ता कंपनी के उत्पादों के साथ गोदरेज ब्रांड से मजबूती से नहीं जुड़े हुए हैं।

इस शोध में एक आश्चर्यजनक बात यह सामने आई कि सिंथॉल और गुड नाइट जैसे ब्रांड समूह से मजबूती से नहीं जुड़े हैं। उपभोक्ताओं के बदल रहे नजरिये के साथ गोदरेज समूह ने अपने उत्पादों और ब्रांड के विकास में आधुनिकतावादी उपभोक्ताओं को ध्यान में रखा है।
दूसरी तरफ पीरामल बदलाव के साथ अपने उत्पादों को वैश्विक तौर पर लॉन्च करना चाहता है। स्वाति पीरामल के अनुसार, ‘हमारा 50 प्रतिशत राजस्व वैश्विक संचालन से प्राप्त होता है और हम अपने विश्वस्तरीय उत्पादों को अन्य देशों में भी लॉन्च करना चाहते हैं।’ उदाहरण के लिए कंपनी के पहले कैंसर ड्रग का अमेरिका के डाना-फार्बर कैंसर इंस्टीटयूट में परीक्षण किया जा रहा है।

आशुतोष तिवारी कहते हैं, ‘पुराने ग्राहकों को खोए बगैर नए ग्राहकों को जोड़ना एक बड़ी चुनौती है।’ विश्लेषकों का कहना है कि रीब्रांडिंग की पहल महज एक नया संचार और आभासी परिवर्तन नहीं है। कंपनियों को नए वादे के साथ उत्पाद और वितरण प्रक्रिया पर अमल किए जाने की जरूरत है।

उदाहरण के लिए यदि पिरामल कैंसर ड्रग पर काम कर रही है तो वहीं सिएट दो फैक्टरियों में 880 करोड़ रुपये का भारी-भरकम निवेश कर रही है जिनमें से एक फैक्टरी रेडियल टायरों के लिए समर्पित होगी।

सिएट को मौजूदा 25,00 करोड़ रुपये के कारोबार की तुलना में 2013 तक प्रति वर्ष 6000 करोड़ रुपये के कारोबार की उम्मीद है। इसके अलावा कंपनी को बाजार भागीदारी के संदर्भ में इस क्षेत्र में चौथे पायदान से दूसरे स्थान पर आ जाने की भी उम्मीद है। इसी तरह गोदरेज ने भी अपने मौजूदा टेलीविजन कमर्शियल पर ध्यान केंद्रित करने की योजना बनाई है।

First Published - May 20, 2008 | 1:28 AM IST

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