ऑस्ट्रेलिया के लोग समूहों में रहना पसंद करते हैं। मैंने मास्टर डिग्री के दौरान कुछ समय ऑस्ट्रेलिया में बिताया है।
बिना लाग लपेटे के मैं कह सकता हूं कि इस दौरान मैंने पाया कि ऑस्ट्रेलियाई बहुत मस्ती पसंद करते हैं, खुशमिजाज होते हैं और हर वक्त पार्टी के लिए तैयार रहते हैं। उनका जोश वाकई बड़ा जबरदस्त होता है और मुझे इसका अहसास फिएस्टा के अलग-अलग मॉडल लॉन्च होने की शुरुआत से ही मिल गया था।
फोर्ड इंडिया के नये अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक माइकल बोनहेम हमें कुछ जरूरी चीजें बांट रहे थे और आयोजन से काफी संतुष्ट भी दिख रहे थे। ठीक इसी तरह जॉन लॉन्सडेल जो उत्पाद विकास से जुड़े हैं और एशिया प्रशांत व अफ्रीका क्षेत्र में बी कार प्रोग्राम मैनेजर सैम भी बहुत अच्छे अंदाज में दिखाई पड़ रहे थे। इन लोगों के बीच हंसी मजाक का दौर चल रहा था, लग रहा था कि ये लोग एक दूसरे को चुटकुले सुना कर गुदगुदा रहे हैं।
एक ऑटो कंपनी के बड़े अधिकारियों के झुंड के रूप में ये समूह बहुत खुशमिजाज लग रहा था। लेकिन मैंने इस ओर से ध्यान हटाकर कार की ओर ध्यान देना शुरू किया। बोनहेम ने जब फिएस्टा 1.6 एस का अनावरण किया तो उनका यही कहना था, ‘हमें इस कार पर गर्व है’। पहली नजर में देखने पर उनका बयान खारिज भी नहीं किया जा सकता था।
सही मायनों में एक्वेरियस ब्लू (खास तौर से इस मॉडल के लिए बनाया गया रंग) रंग में गाड़ी शानदार लग भी रही थी और चारों तरफ अपनी चमक बिखेर रही थी। फिएस्टा में बाहरी तौर पर किए गए परिवर्तन इस कार में नजर नहीं आ रहे थे। वैसे इसमें कुछ खास परिवर्तन नहीं किए गए हैं। पांच स्पोक एलॉयस वाला 15 इंज का निफ्टी (लेकिन इसके पहियों के कुल चार नट कुछ ज्यादा ही उभरकर नजर आते हैं), स्पॉइलर और क्रोमा वाला एक्जॉस्ट बरबस ही किसी का भी ध्यान खींचने के लिए काफी हैं।
इसकी कुछ चीजें तो इतनी शानदार नजर आती हैं जितनी कभी पहले देखी भी नहीं गई होंगी। इस कार को बनाने वाली टीम ने फोर्ड की परंपरागत विरासत को बरकरार रखा है, कई स्तरों पर फिएस्टा एस फोर्ड की परंपरा पर खरी भी उतरती है। इसमें पहले से रेसिंग स्ट्रिप की कमी थी जिसकी वजह से कार में कमी नजर आती रही है। फोर्ड के अधिकारियों को इस बारे में सोचना चाहिए कि उन्होंने फिएस्टा के एक दूसरे मॉडल डयूरास्पोर्ट में तो यह दिया है फिर इस कार में इसको क्यों नहीं दिया गया।
मेरे लिए भी इस बात को समझ पाना मुश्किल लग रहा है। इसकी वास्तविक बॉडी किट के अलावा इसके रूप में और भी बदलाव भी किए गए हैं। वैसे इसमें से काफी स्टैंडर्ड फिएस्टा में मिल भी जाएंगे। इसी मौके पर फिएस्टा 1.6 और 1.4 टीडीसीआई को भी लॉन्च किया गया। कार में हेडलैंप को थोड़ा पीछे कर दिया गया है जो एकदम से नजर भी नहीं आते। इसके अलावा फॉग लैंप में भी परिवर्तन किया गया है।
साथ ही नये हनीकंब पैटर्न में ऊपर और नीचे की ग्रिल में भी कुछ काम किया गया है, वैसे आगे से देखने पर यह कार पुरानी कार से ज्यादा जुदा नजर नहीं आती और इसमें मामूली से फेरबदल किए गए हैं। वैसे यह कोई खराब बात भी नहीं है, अपनी शुरुआत से फिएस्टा दिखने में शानदार रही है, लेकिन यह तो कहना ही पड़ेगा कि कार को और शानदार बनाने का मौका फोर्ड ने गंवा ही दिया।
कुछ दूसरी चीजों पर गौर करते हैं, फ्लेंक्स की बात करें तो यह भी हमें पहले वाले ही दिखते हैं जिनकी हमेशा से ही प्रशंसा होती आई है। दूसरी ओर एल्बिट के साथ वाले टर्न इंडिकेटर को ओआरवीएम में बदल दिया गया है। यह एस मॉडल वाली दूसरी कारों में हो चुका है। एस मॉडल में स्टैंडर्ड इंडिकेटर ही लगे हैं। स्टैंडर्ड मॉडल में एसएक्सआई का बड़े आकार के लोगो ने इंडिकेटर की जगह ले ली , इसको बुद्धिमानी भरा फैसला कहा जा सकता है।
‘1.6 एस’ का पिछला हिस्सा भी लगभग वैसा ही है सिवाय क्लियर लेंस टेल लेंस और लाल रंग के खूबसूरत ‘एस’ निशान के अलावा। इसके केबिन में भी कुछ परिवर्तन किए गए हैं। एस सीरिज एकदम स्पोर्टी लुक वाली कार है जो काले और नीले रंगों में उपलब्ध है। इसमे भरपूर मेटलिक हाइलाइट हैं, साथ ही उपकरणों में भी कुछ बदलाव किए गए हैं , इसमें नंबरों के लिए रेसियर फोंट का इस्तेमाल किया गया है। इसके अलावा हनीकाम्ब ग्राफिक को भी जोड़ा गया है।
इसकी सीटें भी बड़े आकार की हैं जो आरामदायक भी हैं। इसके अलावा एल्यूमीनियम के इसके पैडल दिखने में भी बढ़िया हैं। एसएक्सआई में मटमैले लेदर की सीटें हैं जिसमें महोगनी सेंटर कंसोल है लेकिन इसमे एलॉय व्हील नहीं हैं। एस और एसएक्सआई फिएस्टा के ऑडियो सिस्टम में अब आखिरकार एमपीथ्री फॉर्मेट में ऑडियो चल सकेगा। इसके अलावा इसमें इन पोर्ट प्लग भी दिया है जिससे दूसरी डिवाइस भी चलाई जा सकेंगी। इसमें चर्चित ‘गणेश’ शेल्फ भी बरकरार है।
इसलिए आपको अपनी बोतलें रखने के लिए इधर-उधर इंतजाम नहीं करना पड़ेगा। सीधे शब्दों में कहें तो केबिन में बहुत ज्यादा फेरबदल नहीं किए गए हैं, वैसे यह कतई खराब बात नहीं है। इसके अलावा लेग रूम और हेड रूम (जो कुल मिलाकर ठीक ठाक ही कहे जाएंगे)में कोई भी परिवर्तन नहीं किया गया है। इस मामले में यह अभी भी होंडा सिटी से पीछे ही है। एस और एसएक्सआई मॉडल में आप टि्वन फ्रंट एयरबैग्स पा सकते हैं। स्टैंडर्ड में ईबीडी वाला एबीएस सेफ्टी बॉक्स के रूप में मौजूद होता है।
1.6 मॉडल जिसमें एस भी शामिल हैं उसके एमपीएफआई 1.6 लीटर पेट्रोल इंजन बहुत बेहतरीन काम करता है। वैसे 100 बीएचपी की क्षमता वाला फिएस्टा 1.6 भी अपनी बड़ी उपस्थिति दर्ज कराता है। अगर इस कार का स्पोर्टी लुक आप देना चाहते है तो इसमें 15-20 बीएचपी की अतिरिक्त क्षमता होना जरूरी है। अगर कोई इनको खरीदने जा रहा है तो यह जरूरी नहीं है कि कोई इसकी ईंधन की क्षमता पर भी ध्यान दे दे। अगर पेट्रोल की कीमतों की बात करें तो यह बेहद जरूरी हो जाता है कि हम इंजन में भी कुछ बदलाव लाया जाए।
फोर्ड कारों के बाजार में अपनी एक खास मौजूदगी दर्ज करा सकता था। वास्तविकता यह है कि फोर्ड के मॉडल में स्पोर्टी लुक के साथ सही माइलेज का तालमेल नहीं बिठाया गया है। लेकिन एक चीज बेहद खास है कि फोर्ड मॉडल के 1.6 एस के सस्पेंशन सेटअप में काफी काम किया गया है। जिसने भी फिएस्टा 1.6(निश्चित तौर पर फिएस्टा की सभी रेंज को) को ड्राइव किया है वे इस बात को बखूबी समझ सकते हैं कि इसे कैसे हैंडल करना है। बाजार में इस कार को चलाना एक फन की तरह है।
फोर्ड का कहना है कि एस मॉडल के सस्पेंशन में ज्यादा मजबूत स्प्रिंग लगाए गए है जिसके जरिए वे एक कदम और आगे ही बढ़े हैं। इस कार के शॉक आर्ब्जावर की डिजाईन को बेहतरीन बनाया गया है और इसके वॉल्व की टयूनिंग भी की गई है। इसके शॉक आर्ब्जावर के जरिए इसके स्प्रिंग के साथ कार बेहतर तरीके से अपना तालमेल बिठाती है जिसकी वजह से कार अपना संतुलन बनाने में कामयाब हो जाती है। इसी वजह से कार को बेहतर तरीके से हैंडल किया जा सकता है।
अब यहां सवाल यह है कि क्या यह सचमुच इतना ही बेहतर प्रदर्शन देती है। ईमानदारी से कहा जाए तो यह कहना बेहद मुश्किल है। मैंने चेन्नई से पांडिचेरी तक 320 किमी का सफर तय किया जिसमें से मैंने सबसे बेहतरीन ईस्ट कोस्ट रोड पर फिएस्टा चलाई। इस सड़क पर कोई कार्नर नहीं था। निश्चित तौर पर फिएस्टा को ड्राइव करने में जितना मजा आता है वैसा ही अनुभव यहां भी रहा है। इसका इंजन बेहद आवाज करता है जब आप इसे स्टार्ट करते हैं और आपको यह आवाज बेहद लुभाने लगती है। इसमें गियरबॉक्स को बदलना नहीं होता है।
अपने प्रदर्शन और क्षमता की वजह से होंडा सिटी के बाद यह दूसरा स्थान पाने वालों में से है। इसका स्टियरिंग बेहद हल्के तरीके से घुमाने पर भी गाड़ी आसानी से घुम जाती है। इसका ब्रेक भी बेहतर तरीके से काम करता है इसी वजह से कार का संतुलन बनता है। हालांकि, इसके पैडल में जबरदस्त कारों की तरह वह बात नहीं है। इसका पैडल काफी मुलायम है, जिसकी वजह से हल्के से दबाने पर भी आप जहां चाहेंगे, कार वहीं रुक जाएगी।
जब मैंने यह कार खड्डे वाले रास्ते पर बेहद तेजी से चलाई तो मुझे यह अहसास हुआ कि कोई खास परेशानी नहीं हुई। बस केवल कार की टायर से थोड़ी आवाज हुई और उसकी बॉडी खड्डे से छू गई। मैं पुरानी फिएस्टा को याद करता हूं जो एकदम इसी तरह चलती थी। फोर्ड को वास्तव में अपने दोनों स्टैंडर्ड को बरकरार रखना चाहिए। उन्होंने एस 1.6 मॉडलों की रेंज की तुलना की जा सके ।
उन लोगों ने अपनी आलोचना के मद्देनजर बोर्ड के सामने इस समस्या को रखा। अब बात करें इसकी नई कीमतों के बारे में। डीजल फिएस्टा काफी खर्चीला साबित हो रहा है। इसकी कीमत 7.44 लाख रुपये से ऊपर है। पेट्रोल वाली 1.6 मॉडल के स्पोर्टी लुक वाली कार की कीमत 6.57 लाख से लेकर 7.75 लाख रुपये तक है। इसका मतलब यह है कि फोर्ड ने पेट्रोल वर्जन की कारों की कीमतों को थोड़ा कम तो किया ही है यानी सारी कीमतें मुबंई एक्स शो रुम के मुताबिक है। फोर्ड लेने वालों के लिए यह अच्छी खबर है। इतनी जानदार गाड़ी का मालिक बनने के लिए और रेस के मुकाबले के लिए आप तैयार हैं?