facebookmetapixel
रेट कट का असर! बैंकिंग, ऑटो और रियल एस्टेट शेयरों में ताबड़तोड़ खरीदारीTest Post कैश हुआ आउट ऑफ फैशन! अक्टूबर में UPI से हुआ अब तक का सबसे बड़ा लेनदेनChhattisgarh Liquor Scam: पूर्व CM भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य को ED ने किया गिरफ्तारFD में निवेश का प्लान? इन 12 बैंकों में मिल रहा 8.5% तक ब्याज; जानिए जुलाई 2025 के नए TDS नियमबाबा रामदेव की कंपनी ने बाजार में मचाई हलचल, 7 दिन में 17% चढ़ा शेयर; मिल रहे हैं 2 फ्री शेयरIndian Hotels share: Q1 में 19% बढ़ा मुनाफा, शेयर 2% चढ़ा; निवेश को लेकर ब्रोकरेज की क्या है राय?Reliance ने होम अप्लायंसेस कंपनी Kelvinator को खरीदा, सौदे की रकम का खुलासा नहींITR Filing 2025: ऑनलाइन ITR-2 फॉर्म जारी, प्री-फिल्ड डेटा के साथ उपलब्ध; जानें कौन कर सकता है फाइलWipro Share Price: Q1 रिजल्ट से बाजार खुश, लेकिन ब्रोकरेज सतर्क; क्या Wipro में निवेश सही रहेगा?Air India Plane Crash: कैप्टन ने ही बंद की फ्यूल सप्लाई? वॉयस रिकॉर्डिंग से हुआ खुलासा

मर्सिडीज का नया शाहकार

Last Updated- December 07, 2022 | 6:41 PM IST

अमेरिका ने दुनिया को कई चीजें दी हैं। हम सिर्फ म्यूजिक की बात नहीं कर रहे। वैसे म्यूजिक के मामले में भी अमेरिका के योगदान को कम नहीं आंका जा सकता है।

अमेरिका ने म्यूजिक को जैज  दिया, लेकिन फिलहाल अमेरिकी तेल की कीमतों में इजाफे के राग से परेशान है। मैंने सुना है कि दुनिया की कुल आबादी की महज 5 फीसदी अमेरिकी जनता दुनिया के 25 फीसदी ऊर्जा संसाधनों का उपभोग करती है।

इस बात को मान लेने में कोई गुरेज नहीं होना चाहिए कि ऊर्जा संसाधनों खासकर तेल की कीमतों में इजाफे की चुभन अब अमेरिकावासियों को भी झेलनी पड़ रही है। अमेरिका में बड़ी कारों और ट्रकों की बिक्री में मंदी आ गई है जबकि छोटी गाड़ियों और हाइब्रिड कारों की बिक्री में तेजी आई है।

अमेरिका में जून माह के दौरान होंडा सिविक ने बिक्री के मामले में फोर्ड एफ-150 का 26 साल पुराना रिकार्ड तोड़ दिया। इसकी वजह भी साफ है। वह यह कि अधिकतर लोगों का मानना है कि होंडा सिविक कम ईंधन खाती है।

कल्पना कीजिए कि तब क्या होगा जब अमेरिकी, ऑल्टो या फिर लोगान को आजमाएंगे? अमेरिका में ईंधन बचाने को लेकर एक अभियान सा छिड़ा हुआ है। आप अंदाजा लगा सकते हैं कि रेडियो पर भी अधिकतर रेडियो जॉकी लोगों को ईंधन बचाने की टिप्स देते रहते हैं।

मसलन वह यह बताते मिलेंगे कि लोगों ने कैसे पिछले साल 30 लाख लीटर पेट्रोल की बचत की.. वगैरह-वगैरह। वह यह भी बताते हैं कि कूरियर कंपनियों के ड्राइवर क्या रणनीति बना रहे हैं या फिर लोग वैकल्पिक रूटों का चयन करके कार को लगातार ड्राइव करते रहे।

इससे इंजन लगभग एक ही स्थिति में रहता है और ईंधन की बचत होती है। मैं यह बात एकदम सच कह रहा हूं क्योंकि मैंने अपनी कार में बैठकर यह सब सुना है। सिल्वराडोस, टाइटन्स, टुंड्रास और सबअर्बन्स जैसी कारें जल्द ही अमेरिकी सड़कों पर अपने काम को अंजाम देती नजर आएंगी।

 कुल मिलाकर इस भव्य देश में ये शानदार कारें अपना जलवा बिखेरेंगी। आप अभी तक क्या कर रहे हैं? वैसे मर्सिडीज बेंज को इस स्थिति से निजात पाने का एक ही रास्ता नजर आता है। वह है, डीजल।

वैसे कम ईंधन खपत वाले डीजल इंजन सबसे साफ ऑयल बर्नर भी हैं, इसके लिए हमें ब्लू टेक जैसी तकनीक का शुक्रिया अदा करना चाहिए। वास्तव में इस पूरी कवायद को करने में पूरे दो साल लगे जब मर्सिडीज बेंज ने अक्टूबर 2006 में ब्लू टेक ई- 320 अमेरिकी बाजार में उतारी थी।

यह कार अमेरिका में तब लाँच की गई थी जब वहां कम सल्फर वाले डीजल की बिक्री शुरू हुई थी। फिलहाल, मर्सिडीज बेंज ने आक्रामक नीति अख्तियार की हुई है।
 
यह केवल इसलिए नहीं है कि अमेरिका में डीजल वाहनों के स्टैंडर्ड के लिहाज से उनके पास बेहतर तकनीक है, बल्कि यह भी कि यह पहली ऐसी कंपनी है जो अमेरिका के पूरे 50 राज्यों में डीजल एसयूवी मुहैया करा रही है।

दरअसल ब्लू टेक मर्सिडीज, हाईब्रिड कारों का मुकाबला कर रही है। इसके लिए यह तारीफ की हकदार भी है। मैं इसके बारे में बहुत लंबी-चौड़ी भूमिका बांधना पसंद नहीं करूंगा, लेकिन उन सारी बातों का जिक्र जरूर करूंगा जो नई एमएल-क्लास के बारे में बताती हैं।

इसकी सबसे बड़ी खासियत है कि इसमें ब्लू टेक का इस्तेमाल किया गया है। वरमोंट बहुत प्यारी है, लेकिन मैं यह नहीं जानता कि अमेरिका में वास्तव में कोई वरमोंट नाम का राज्य है।

यह अमेरिका के कम मशहूर राज्यों में से एक है। लेकिन यह बहुत हरा भरा है, तस्वीरें खींचने के लिहाज से बेहद उम्दा है और आपकी कल्पनाओं के मुताबिक हो सकता है।

एमएल 320 सीडीआई ब्लूटेक की ड्राइविंग सीट पर बैठना बेहद शानदार अनुभव रहा। मैंने इसे बहुत धीरे-धीरे चलाना शुरू किया। इसकी वजह कार नहीं बल्कि अमेरिका में मौजूद गति सीमा से जुड़े कानूनों के चलते मैंने ऐसा किया।

वरमोंट में अधिकतम 65 मील प्रति घंटे (तकरीबन 100 किलोमीटर प्रति घंटा) की रफ्तार से गाड़ी दौड़ाने की इजाजत है। वैसे, एमएल का टॉर्क डीजल मोटर अधिकतम 200 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार पकड़ने की क्षमता रखती है।

इसकी क्षमता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 8.5 सेकंड में यह 0 से 96 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार पकड़ लेती है। इस वक्त गाड़ी की रफ्तार कम है जिसकी वजह से मैं इसके इंटीरियर का अच्छी तरह से जायजा ले सकता हूं। नई एमएल में सीटों को नये ढंग से डिजाइन किया गया है।

साथ ही लाइनिंग और ट्रिम में भी काफी तब्दीलियां की गई हैं। पैडल्स सहित चार स्पोक वाला नया स्टियरिंग व्हील अंदर में किया गया सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण परिवर्तन है।

पकड़ बनाने के लिहाज से यह बेहतर हो गया है, इसमें एकदम ठीक वजन है, जब स्पीड बढ़ाई जाती है तब भी कोई समस्या नहीं आती है। अंदर में किया गया दूसरा बड़ा परिवर्तन कमांड सिस्टम के रूप में हुआ है। अब यह और बेहतर हो गया है जिसे इस्तेमाल करना बेहद आसान है। साथ ही इसमें कुछ नये फीचर्स भी जोड़े गए हैं।

मैंने इसमें सेटेलाइट रेडियो को टयून किया और बेहतरीन म्यूजिक का आनंद लिया। बेहद शानदार। इसमें बैठकर इस बात का एहसास नहीं होता कि बाहर एक ऑयल बर्नर भी लगा हुआ है। इसका मोटर कम आवाज करता है, इनमें भी तब्दीली करके  और बेहतर बनाया गया है।

24 वाल्व वाले 2987 सीसी का इंजन भी इस कार में है। इस कार में 210 बीएचपी की क्षमता है। इसके इंजन के साथ 7जी ट्रॉनिक ऑटोमेटिक ट्रांसमिशन भी लगा है।

कार का पावरट्रेन सचमुच बेहद अच्छा है और यह आपको बेहतर ड्राइविंग का मौका देता है। मिसाल के तौर पर जब मैं साफ-सुथरे दो लेन वाली सड़क पर होता हूं तो अपनी पूरी रफ्तार में होता हूं। ऐसे में धीमी गति से आता हुआ कोई आदमी मेरे रास्ते को एक तरह से अवरूद्ध कर सकता है।

इसकी वजह यह है कि सड़क काफी संकरी है। सड़क के बीच में बनी हुई पीली लाईन इस बात की चेतावनी देती है कि गाड़ी चलाने वाले किसी भी आदमी को ओवरटेकिंग की इजाजत नहीं है। हालांकि बावजूद इन सब चेतावनी के मैं यह कह सकता हूं कि मैं ज्यादा इंतजार नहीं कर सकता।

जैसे ही रास्ता को पार करने की गुंजाइश बनती है, वैसे ही खुद ब खुद पेडल पर पांव चला जाता है और बिना किसी ज्यादा कोशिश के यह गाड़ी चल पड़ती है। इसके लिए किसी डाउनशिफ्टिंग की भी जरूरत नहीं पड़ती।

इस गाड़ी को चलाते वक्त मुझे यह अहसास होता है कि गाड़ी अगर ढलान के रास्ते से भी गुजरती है तो भी इसका कोई अहसास नहीं होता है।

यह एक डीजल और पेट्रोल इंजन वाली कार या फिर इलेक्ट्रिक कार की तरह तेज गति पकड़ती है और इसकी रफ्तार में कोई रुकावट नहीं आती है। इस कार में पहले जैसा ही गियरबॉक्स है, लेकिन इसमें अलग-अलग एप्लीकेशन है।

जैसा कि ई-क्लास की कार में देखने क ो मिलता है। एमएल-320 सीडीआई एक ऐसी मशीन है जो बेहद आसानी से चलने वाली है। हमने मर्सीडिज बेंज के  टेस्ट ड्राइव के बारे में सोचा।
यह एमएल एक यूरो वर्जन की गाड़ी कही जा सकती है। इस कार को बहुत कम रफ्तार में चलाने में भी कोई परेशानी नहीं होती।

किसी भी खराब रास्ते पर क्लच, एक्सीलेटर या ब्रेक का इस्तेमाल करने की जरूरत नहीं होती। जब कार किसी खड़ी ढाल वाले रास्ते से नीचे उतरती है तो इसका इंजन और गियरबॉक्स दोनों रास्ते के मुताबिक चलने लगते हैं।

इसके अलावा गढ्ढे वाले रास्ते और जंगल झाड़ वाले रास्ते पर भी यह अच्छी तरह चलती है। एमएल की पहली जेनरेशन वाली गाड़ी से नई वाली कार थोड़ी अलग है। मसलन यह सड़क के अलावा दूसरी जगहों पर भी आसानी से चल सकती है।

इस कार में ग्राउंड क्लियरेंस जैसे समस्याएं भी खत्म हो गई हैं। एमएल रोड पर तो पूरी रफ्तार से चलेगी ही इसके अलावा यह सड़क से इतर दूसरी जगहों पर भी चल सकती है।

इस कार के बाहरी डिजाइन में भी थोड़ी तब्दीली की गई है। एमएल के  बाहरी डिजाइन को भी नया रंग दिया गया है और इसकी ग्रिल को भी दोबारा डिजाइन किया गया है। इसका हेडलैंप, कार के बाहरी हिस्से में बड़ा शीशा भी लगा हुआ है।

इसके पिछले हिस्से में नया बंपर लगा हुआ है और टेल लैंप को भी थोड़ा नया लुक दिया गया है। वैसे एमएल हमेशा ही अच्छी दिखने वाली एसयूवी थी और अब तो यह शानदार दिखने वाली गाड़ियों में शुमार करने लायक बन चुकी है।

आपके पूछने से पहले ही आपको बता दें कि एमएल क्लास की यह गाड़ी जल्द ही भारत में बिकने के लिए मौजूद होगी। अगर आप इसके डायनेमिक फीचर की बात करें तो यह वैसा नहीं है जैसा कि अमेरिकी एसयूवी होती हैं।

मुझे लगता है कि इस गाड़ी में आपको मर्सीडिज बेंज जैसा अहसास नहीं होगा बल्कि यह आपको बीएमडब्ल्यू एक्स 5 वर्जन जैसा महसूस होगा। यह कार आपको खराब रास्ते पर भी अलग रास्ते का अहसास कराएगी।

इसमें आपको स्पोर्ट, कंफर्ट और ऑटोमेटिक सेटिंग्स को चुनने का भी मौका होता है। जब मैंने खराब पथरीले रास्ते पर इन तीनों ऑप्शंस का इस्तेमाल किया और तब मुझे यह अहसास हुआ कि ऑटो मोड सबसे बेहतर है।

लेकिन अगर रास्ता बढ़िया हो तो मैं स्पोर्ट ऑप्शन रखने के बजाय कंर्फट मोड में कार को रखना पसंद करता हूं।
कार की बॉडी बेहद जबरदस्त है और इसकी खासियत यही है कि यह भार को कम करती है, इसी वजह से इसे हैंडल करना बेहद आसान हो जाता है। मैं गाड़ी में बहुत आराम महसूस कर रहा था। इसी वजह से लॉस एंजिल्स की सड़कों पर जाना चाहता था। ब्लूटेक गाड़ी होने की वजह से अलग राज्यों में जाने में कोई समस्या नहीं होती।

इसमें ईंधन के खपत की कोई परेशानी भी नहीं है। एक बात और है कि ब्लूटेक को भारत आने में अभी बहुत वक्त लगेगा।
इसकी फ्यूल क्वालिटी ऐसी है कि फिलहाल इसे यहां हैंडल नहीं किया जा सकता। हो सकता है की मर्सीडिज बेंज हमारे लिए ब्लैक टेक बनाने की बात सोच ले।

आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि मर्सीडिज ने पहली बार यूरोप में कमर्शियल व्हीकल के लिए तकनीक का विकास किया उसके बाद इसका इस्तेमाल डीजल पैसेंजर व्हीकल के लिए किया।

First Published - August 24, 2008 | 11:38 PM IST

संबंधित पोस्ट