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चीन अनोखी मंजिल की नई राह

Last Updated- December 07, 2022 | 12:02 PM IST

चीन में साल के आठवें महीने यानी अगस्त को बहुत पवित्र माना जाता है और इसी महीने की आठ तारीख को ठीक आठ बजे पेइचिंग में दुनिया के सबसे बड़े खेल मेले यानी ओलंपिक-2008 का भी श्रीगणेश होना है।


वर्ष 2001 में जब से चीन ने ओलंपिक की मेजबानी हासिल की है, तब से चीन ने एक ही नारे ‘टांग यी गे मेनाक्सिंग, टांग यी गे शिज’ पर अमल किया है। इसका मतलब होता है,  ‘एक दुनिया, एक सपना।’ चीन को इस आयोजन के लिए करीब 200 करोड़ डॉलर की रकम खर्चनी पड़ी है लेकिन यह पिछले एथेंस ओलंपिक में खर्च की गई राशि (2.4 अरब डॉलर) से कम ही है।

चीन के लिए यह केवल एक खेल आयोजन ही नहीं है बल्कि चीन इस महा आयोजन के जरिये दुनिया को यही संदेश देना चाहता है कि पिछले तीन दशकों से जारी समाजवाद का चेहरा वहां बदल गया है, और चीनी अर्थव्यवस्था दुनिया के लिए खुला बाजार बन गई है। दरअसल चीन में राष्ट्रपति हू जिंताओ और प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ की चौथी पीढ़ी का तकनीकी पसंद नेतृत्व ओलंपिक के सहारे दुनिया को बताना चाहता है कि उनका देश तरक्की करते हुए समृद्ध होता जा रहा है।

इस समय पूरे मीडिया की नजरें चीन पर लगी हैं। प्रेस ने चीन में मानव अधिकारों के हनन के मामलों को तो उठाया ही है, तिब्बत और ताइवान को लेकर भी मीडिया ने चीन को कठघरे में खड़ा कर रखा है। शिनच्यांग प्रांत के उइघुर में घरेलू असंतोष और गांसू और छिंगहाई जैसे प्रांतों में तिब्बत को लेकर हुए प्रदर्शन भी खासे सुर्खियों में रहे हैं। 130 दिन की ओलंपिक मशाल रैली के दौरान हुए प्रदर्शन भी किसी से छिपे नहीं रह सके हैं।

पेरिस में तो एक तिब्बत समर्थक ने मशाल को अपने कब्जे में ही ले लिया था। पर्यावरणविदों ने भी एवरेस्ट तक सड़क बनाने का विरोध किया। लेकिन चीन इस सब चीजों की परवाह किए बिना शानदार उद्धाटन समारोह की समारोह की तैयारियों में लगा है। यह समारोह ‘रेज द लैंटर्न’ फेम वयोवृद्ध फिल्म निर्देशक झांग यिमू की देखरेख में होगा। इसके लिए आतिशबाजी दिखाने के लिए मशहूर न्यूर्यार्क के आर्टिस्ट की सेवाएं ली जाएंगी। वैसे झांग उद्धाटन समारोह संबंधी जानकारी देने से बच रहे हैं।

द न्यूयॉर्क टाइम्स से बातचीत में उन्होंने कहा, ‘ओलंपिक के छल्ले गोल हैं, नैशनल स्टेडियम भी गोल है और आसमान में आतिशबाजी के छल्ले भी गोल ही होंगे।’ झांग के बयान से तो यही बात सामने आती है कि आतिशबाजी का बहुत बढ़िया प्रदर्शन होने जा रहा है और उसमें ओलंपिक के गोल छल्लों की प्रतिकृति विशेष रूप से नजर आएगी। इन खेलों के आयोजन के दौरान चीन में बड़े पैमाने पर बदलाव हुए हैं। शुरूआत करते हैं, इन  खेलों के प्रवेश द्वार यानी पेइचिंग एयरपोर्ट से। इस एयरपोर्ट का डिजाइन ब्रिटिश आर्किटेक्ट नॉर्मन फोस्टर ने तैयार किया है।

कला के क्षेत्र में ब्रिटेन में उनका काफी नाम है। इसका टर्मिनल 3 हीथ्रो के पांचों टर्मिनलों से भी ज्यादा बड़ा है। एक अनुमान के मुताबिक 2020 तक तकरीबन 5 करोड़ यात्री इस एयरपोर्ट से गुजरेंगे। इसमें पीली, नारंगी और लाल बत्तियां लगाई गई हैं जो कि ओलंपिक के भी रंग हैं। यदि इससे बेंगलुरु के नए एयरपोर्ट की तुलना करें तो निराशा ही हाथ लगेगी जिसको स्विट्जरलैंड के एक कसोर्टियम ने बनाया है। यहां ठहरकर देखने की जरूरत है कि भारतीय संघ के द्वारा बनाया गया दिल्ली का टर्मिनल 3 दुनिया के नक्शे पर छा जाने लायक है भी या नहीं।

उम्मीदें तो बहुत ऊंची हैं क्योंकि इसी संघ ने हैदराबाद में बेहतरीन एयरपोर्ट बनाया था। इस गेम का सबसे आकर्षक पहलू होगा 230 फीट लंबा और 50 करोड़ डॉलर से बना ‘बर्ड नेस्ट’ नेशनल स्टेडियम जहां खेलों का भव्य और रंगारंग उद्धाटन भी होगा और समापन भी। यह ‘बर्ड नेस्ट’ 45 टन स्टील से बना बेहद अनोखा जालीदार डिजाइन है। इसे डिजाइन किया है स्विस आर्किटेक्ट जेक्वस हरजॉग और पियरे दे मेरॉ ने। इन लोगों ने लंदन में टाटा मॉर्डन और हाल ही में स्पेन में बार्सिलोना फोरम के  डिजाइन के लिए भी काम किया है।

अगर ‘बर्ड नेस्ट’ की बात करें तो यह इस दशक की सबसे चर्चित इमारतों में शुमार होगी। नई तरह की इस ग्रीन डिजाइन की खासियत के साथ-साथ इसमें अनोखा रेनवॉटर कलेक्शन सिस्टम भी है। स्टेडियम की छत ऐसी है कि इससे निकली हुई धूप घास को मिलेगी। पेइचिंग में और भी कुछ खास चीजों का निर्माण हो रहा है जिनमें नेशनल एक्वेटिक्स सेंटर भी शामिल है जिसे ‘वॉटर क्यूब’ भी कहा जाता है। इसके  लिए 100,000 वर्ग मीटर के हल्के और पारदर्शी टेफलॉन की कोटिंग स्टील पर की गई थी जिससे हवा के बुलबुले बनाए जाएंगे।

यहां वुकसॉन्ग कल्चरल एंड स्पोर्टस सेंटर भी बनाया जा रहा है। यह खेलों के लिए मुख्य जगह होगी। लाओशान साइक्लिंग क्लस्टर भी बनाया गया है जिसमें 250 मीटर की परिधि में लकड़ी का साइकिल ट्रैक बनाया गया है जहां नया वर्ल्ड स्पीड रिकॉर्ड बनाया जाएगा। लाओशान के बीएमएक्स को दुनिया का सबसे क ठिन ट्रैक बताया जा रहा है। भारत में 2010 में कॉमनवेल्थ गेम्स होने वाले हैं। इसके लिए दिल्ली पेइचिंग से कई तरह की प्रेरणा ले सकता है। पेइचिंग में 1 करोड़ 70 लाख लोग रहते हैं जबकि दिल्ली में डेढ़ करोड़ लोग।

पेइचिंग में 10,500 एथलीट, विभिन्न दलों के खेल प्रतिनिधि मंडल और पत्रकारों समेत 200,000 लोग और लगभग 60 लाख दर्शकों के लिए बड़े पैमाने पर साज सज्जा और तैयारियां हो रही हैं। पेइचिंग के  बुनियादी ढांचे में बडे बदलाव लाने के तहत नई सबवे लाइनों के लिए भी एक नेटवर्क बनाया जा रहा है। इसके जरिए 200,000-300,000 लोग प्रतिदिन आ जा सकते हैं। यहां सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए चीन नेशनल ग्रैंड थियेटर और तियांनमेन स्क्वायर बनाया गया है जिसका डिजाइन मशहूर आर्किटेक्ट पॉल एंड्रयू ने बनाया है।

यह बुलबुले के आकार का दिखता है जो ग्लास और टाइटेनियम से बना हुआ है। एक बेहद खास बात यह भी है कि पेइचिंग में कई टैक्सी ड्राइवरों ने अंग्रेजी सीखने के लिए एडमिशन लिया है। चीन के लोगों को स्मोकिं ग बहुत पसंद है लेकिन अब यहां का नजारा कुछ दूसरा ही है। यहां के लगभग 66,000 कैब में ‘नो स्मोकिंग’ के पोस्टर लगे हैं। चीन में सार्वजनिक परिवहन और कैब में महिलाएं बेहद सुरक्षित होती हैं। दिल्ली में 60 लाख डॉलर सैनिटेशन और 23 करोड़ डॉलर इसके गेम्स विलेज पर खर्च किए जाएंगे। इसके साथ ही अब जरूरत इस बात की है कि दिल्ली को सुरक्षित बनाने का आश्वासन भी मिले।

पेइचिंग ने वर्ष 2004 में ओजोन परत को नुकसान पहुंचाने वाले तत्वों का इस्तेमाल बिल्कुल कम कर दिया था। मांट्रियल संधि के निर्धारित समय से छह साल पहले ही इसके लिए चीन ने पहल कर दी थी। इस शहर में 1,000 डॉक्टर और नर्स और वॉलेंटियर टीम के 3,000 डॉक्टर खासतौर पर एथलीटों, पत्रकारों और वीआईपी लोगों के इलाज के लिए उपलब्ध रहेंगे। यहां लगभग 170 मेडिकल केंद्र बनाए गए हैं और 40 एंबुलेंस हमेशा रहेंगी। पेइचिंग ओलंपिक कॉल सेंटर 24 घंटे काम करेंगे।

यहां लोगों को टूरिस्ट स्पॉट से रूबरू कराने के लिए भी इंतजाम किए गए हैं। यहां 5,000 से ज्यादा ही हाईटेक पब्लिक टॉयलेट उपलब्ध रहेंगे जहां रिमोट सेंसर फ्लशिंग की व्यवस्था भी की गई है। इंटरनेट के जरिए संगीत सुनने के  इंतजाम के लिए 5 करोड़ 70 लाख डॉलर खर्च किए गए हैं।

First Published - July 19, 2008 | 12:04 AM IST

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