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महज दिखावा है कारों पर नया कर

Last Updated- December 07, 2022 | 5:43 AM IST

लग्जरी या फिर ऐसे उत्पादों पर कर लगाना जिसकी खपत को सरकार कम करना चाहती है, एक पुरानी चाल रही है।


यह अलग बात है कि यह चाल कुछ खास कारगर साबित नहीं हो पाई हो। बड़े इंजन वाली कारों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने से आलीशान कारों की कीमतों में लगभग दो फीसदी की बढ़ोतरी होने का अनुमान है।

हालांकि, इस कदम के बावजूद उपभोक्ताओं पर कोई खास फर्क पड़ेगा इसकी संभावना नहीं के बराबर है। खासतौर पर जबकि ज्यादातर ग्राहक ऋण लेकर मासिक किश्तों पर कार खरीदते हैं तो उन्हें कोई खास परेशानी नहीं होगी।

अगर हिसाब लगाया जाए तो पता चलता है कि इस अतिरिक्त शुल्क से पूरे एक साल में सरकार के खाते में महज 600 करोड़ रुपये जुड़ने की उम्मीद है। यह आंकड़ा कितना कम है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यह सरकार के कुल कर राजस्व के एक फीसदी का भी दसवां हिस्सा है।

यह अलग बात है कि लोगों से यह अपेक्षा की जाती है कि वे छोटी कारों का इस्तेमाल करें (छोटी कारों में ईंधन की खपत भी कम होती है), पर शुक्रवार को सरकार ने जो कदम उठाया है, इससे सरकार को कोई खास फायदा होने की उम्मीद नहीं है। सरकारी खजाने पर भी इसका असर नहीं के बराबर दिखेगा। व्यक्तिगत कर के मामले में प्राथमिकताएं क्या होनी चाहिए, सरकार ने अब तक इसका खुलासा नहीं किया है।

यह नागरिकों पर छोड़ दिया गया है कि वे खुद इन प्राथमिकताओं को समझें। अगर हम ऐसा मानते हैं कि राजस्व को समृद्ध बनाने से ज्यादा महत्वपूर्ण ईंधन की खपत को कम करना है, खासकर तब जब कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों में आग लगी हुई है और देश को काफी हद तक ईंधन के आयात पर निर्भर होना पड़ता है तो यह सवाल सबसे पहले हमारे सामने आकर खड़ा होता है: क्या सरकार ने इस दिशा में आवश्यक नीतियां बनाई हैं?

उदाहरण के लिए, सार्वजनिक परिवहन वाहनों को कारों की तुलना में कर रियायतें क्यों नहीं दी जाती हैं। सरकार यह तो चाहती है कि ज्यादा से ज्यादा लोग अपनी व्यक्तिगत गाड़ियों की बजाय सार्वजनिक वाहनों से यात्रा करे। इसी को ध्यान में रखकर दिल्ली में मेट्रो सेवा की शुरुआत की गई थी।

साथ ही लोगों को उनके घरों तक पहुंचने में असुविधा न हो इसके लिए अधिक से अधिक बसों के रूट तैयार किए जा रहे हैं और उनकी सुविधाओं का ध्यान रखते हुए वातानुकूलित बसों को भी सड़कों पर उतारा जा रहा है। इसके पीछे उद्देश्य साफ है कि लोग निजी गाड़ियों की बजाय सार्वजनिक गाड़ियों से यात्रा करें।

साथ ही एक और बड़ी समस्या जो आए दिन लोगों को देखने को मिलती है वह है पार्किंग की समस्या। इस समस्या को ध्यान में रखते हुए सरकार ज्यादा से ज्यादा रेडियो टैक्सी की उपलब्धता पर ध्यान दे रही है, जिन्हें अल्प सूचना पर कहीं भी मंगाया जा सकता है। यह ऊंचे ओहदे पर बैठे उन कर्मचारियों या नियोक्ताओं के लिए भी सुविधाजनक होगा, जिन्हें बसों या ऑटो से यात्रा करना नागवार गुजरता है।

First Published - June 16, 2008 | 12:59 AM IST

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