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महंगे न्यूजप्रिंट से अखबार हुए बेहाल

Last Updated- December 07, 2022 | 6:03 PM IST

दुनिया में भारतीय अखबार सबसे सस्ते हैं, लेकिन अब ऐसी स्थिति बरकरार नहीं रह सकती। इसकी वजह यह है कि महंगाई का असर अखबारी कागज यानी न्यूज प्रिंट की कीमतों पर भी पड़ा है।


न्यूज प्रिंट की कीमतों के असर को कम करने के लिहाज से और इस बढ़ोतरी के मद्देनजर अखबारों के प्रकाशक कीमतों में बढ़ोतरी पर विचार कर रहे हैं। कई प्रकाशक अपने अखबार के लिए विस्तार की योजनाओं को फिलहाल टालने पर मजबूर हो गए हैं। इसके साथ अपनी लागत को कम करने के लिए विज्ञापन की दर को बढ़ा रहे हैं।

अखबारों के मालिक और प्रबंधन इसे स्वीकार करते हैं कि पिछले 6 महीने में न्यूज प्रिंट की कीमतों में 50 फीसदी की बढ़ोतरी को देखते हुए प्रिंट मीडिया के कई संस्थानों ने विस्तार की योजनाओं को टाल दिया है।

बेनेट, कोलमैन एंड कंपनी के निदेशक (बिजनेस एंड कमर्शियल) मोहित जैन का कहना है, ‘फिलहाल न्यूजप्रिंट की कीमतों से प्रकाशकों के ऊपर बहुत दबाव बढ़ रहा है। इसी वजह से प्रिंट मीडिया की कंपनियां अपने विस्तार  को टाल रही हैं। वे नए बाजार में जाने का जोखिम  उठाने की स्थिति में नहीं हैं।’

एचटी मीडिया के सीईओ राजीव वर्मा ने अखबार के नए संस्करणों के विस्तार और हिन्दुस्तान टाइम्स, हिन्दुस्तान और मिंट के सर्कुलेशन को कम करने की योजनाओं के बारे में कुछ कहने से साफ इनकार कर दिया। उनका कहना है, ‘अगर किसी बदलाव को लेकर हमारी योजना भी हो तो यह हमारी रणनीति का हिस्सा नहीं है कि हम बदलावों के बारे में बात करें।’

गौरतलब है कि कंपनी ने अपने बिजनेस अखबार मिंट के कोलकाता में लॉन्च करने की घोषणा की थी लेकिन बाद में इसे टाल दिया गया और ग्राहकों से लिए गए पैसे भी वापस कर दिए गए। ‘मिड-डे’ ग्रुप के सीएफओ मंजीत घोषाल का कहना है, ‘कंपनी इंटरनेट पर ज्यादा ध्यान दे रही है लेकिन इसका संबंध अखबार की बढ़ती लागत से बिल्कुल नहीं है। लेकिन इस साल ‘मिड-डे’ का एक नया संस्करण आएगा।’

यह अखबार सोमवार को पुणे में लॉन्च हुआ। अगर आप 8 महीने पहले लॉन्च हुए इंडिया टुडे ग्रुप के ‘मेल टुडे’ की बात करें तो यह अब तक दिल्ली के बाहर लॉन्च करने का जोखिम लेने की बात नहीं सोच पाई। जब यह लॉन्च हुआ था तब कंपनी ने 20 शहरों में अपनी मौजूदगी की बात की थी।

इंडिया टुडे के मुख्य कार्यकारी अधिकारी आशीष बग्गा का कहना है, ‘जिन शहरों में ‘मेल टुडे’ लॉन्च करने की योजना थी वह अभी पूरी नहीं हो पाई है लेकिन अपने अपनी योजनाओं को खत्म नहीं किया है और न ही टाला है। मैं इस बात पर सहमत हूं कि प्रिंट मीडिया में पिछले साल जो तेजी देखने को मिली थी वह इस साल नहीं है।’

हालांकि इस बीच तीन साल पहले मुंबई में लॉन्च हुए अखबार ‘डीएनए’ ने प्रिंट मीडिया में आई मंदी के बावजूद जोखिम उठाने के लिए अपने को तैयार कर लिया है। कुछ महीने पहले ही ‘डीएनए’ पुणे में लॉन्च हुआ और अब यह अखबार बेंगलुरु में लॉन्च होने की तैयारी में है। अगर अखबारों की विस्तार की योजनाएं टलती है तो इससे उनके  मुनाफे पर भी खासा बुरा असर देखने को मिलेगा।

एक क्षेत्रीय अखबार के मालिक का कहना है, ‘क्षेत्रीय अखबार तो गुमनामी के दौर से गुजर रहे हैं। मेरे अखबार का मुनाफा ही 90 करोड़ से गिरकर 40 करोड़ रुपये होने वाला है। इसकी वजह यह है कि न्यूजप्रिंट की कीमतें बढ़ रही हैं।’ बेनेट, कोलमेन के जैन का कहना है, ‘इस वक्त मीडिया कंपनियों के शेयरों की कीमतों में काफी गिरावट आई है। अगर ये स्थिति नहीं बदलती है तो प्रिंट मीडिया के अस्तित्व पर ही संकट होगा।’

वास्तव में प्रिंट मीडिया कंपनियों मसलन जागरण प्रकाशन और एचटी मीडिया के शेयर की कीमतों पर भी असर पड़ रहा है। इसकी एक वजह महंगाई की बढ़ती दर भी है। मार्च और अगस्त 2008 के बीच में एचटी मीडिया के शेयर की कीमतों में 36.6 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई जबकि जागरण प्रकाशन के शेयर में 46 फीसदी की गिरावट देखने को मिला।

न्यूजप्रिंट की बढ़ती कीमतों को लेकर इंडियन न्यूजपेपर सोसायटी (आईएनएस) ने अपने सदस्य प्रकाशकों को न्यूजप्रिंट के इस्तेमाल में 20 फीसदी कमी लाने की सलाह भी दे डाली है। हालांकि अखबार प्रकाशन से जुड़े लोगों ने आईएनएस के सलाह से पहले इस कार्ययोजना को अंजाम भी दे चुके हैं।

बिजनेस स्टैंडर्ड की प्रेसीडेंट अकिला उरानकर के मुताबिक इस अखबार ने भी अपने पन्नों की संख्या में कमी की है। उनका कहना है, ‘कुछ बाजार में हमने अखबार की कीमत 50 पैसे बढ़ा दी है।’ दूसरे अखबार भी अपनी कीमत बढ़ाने में जुट गए हैं। इकोनॉमिक टाइम्स ने भी अपनी कीमतें बढ़ाई हैं। पुणे में अब इस अखबार की कीमत सबसे ज्यादा 4 रुपये है।

जबकि दूसरे संस्करणों के लिए भी अखबार ने थोड़ी बहुत कीमतों में बढ़ोतरी की है। इस अखबार की कीमत अधिकतर जगहों पर 2 रुपये ही थी। टाइम्स ऑफ इंडिया का मुंबई में कॉम्बो प्राइस भी 4 रुपये से बढकर 4.50 रुपये हो गई है। हालांकि दिल्ली में एचटी और टीओआई के बीच इतनी कड़ी प्रतियोगिता है कि दोनों कंपनियां इस बात का इंतजार कर रही है कि कौन सबसे पहले कीमतों में बढ़ोतरी की घोषणा करे।

आउटलुक ग्रुप ने भी इस बीच अपनी पत्रिका आउटलुक मनी की कीमतों में बढ़ोतरी की है। पहले इस पत्रिका की कीमत 20 रुपये थी जो अब 30 रुपये हो गई है। आईएनएस के पदाधिकारियों ने सूचना और प्रसारण मंत्री से पिछले हफ्ते मुलाकात की है। इनकी कोशिश यह थी कि सरकारी विज्ञापनों की दरों में 50 फीसदी बढ़ोतरी के लिए दबाव डाला जाए।

सूचना व प्रसारण मंत्री प्रियरंजन दास मुंशी ने कहा है कि एक हफ्ते के अंदर ही इस पर कार्रवाई हो सकती है। उन्होंने सरकारी विज्ञापन दरों में 30 फीसदी बढ़ोतरी के संकेत भी दिए। इस बीच कुछ प्रकाशकों ने गैर सरकारी विज्ञापनों के लिए 25 से 40 फीसदी की बढ़ोतरी कर दी है।

विज्ञापनदाता भी अपनी कीमतों को लेकर काफी सतर्क हैं और वे कीमतों में कमी लाने के लिए प्रयासरत हैं। इंडियन मीडिया एक्सचेंज के सेजल शाह का कहना है, ‘विज्ञापनदाताओं के लिए इतनी कीमतों पर राजी होना बेहद मुश्किल है।’ उनके मुताबिक विज्ञापनों की बढ़ती दरों के मद्देनजर कई ब्रांड टेलीविजन, रेडियो या दूसरे किसी मीडिया का विकल्प चुन सकते हैं।

वह एयरलाइन कंपनी की मिसाल देते हुए कहती हैं कि इसने प्रिंट में अपने विज्ञापनों में 15 करोड़ रुपये की कटौती की है और यह टीवी पर विज्ञापन देने की तैयारी में जुटी हुई है। शाह का कहना है, ‘रिटेल ग्राहक भी विज्ञापनों के लिए टीवी पर ही अपने पैसे लगा रहे हैं।’

भारत में एजीस मीडिया ग्रुप के चेयरमैन आशीष भसीन इस बात पर सहमत नहीं हैं, ‘देश में प्रिंट का बाजार काफी मजबूत है। बढ़ी कीमतों पर ऐतराज होने के बावजूद कुछ दिनों के बाद लोग खुद ही बढ़ी हुई कीमतों को स्वीकार कर लेंगे। हालांकि विज्ञापनदाता मंदी के मद्देनजर अपने बजट के लिए थोड़ी सतर्कता बरत रहे हैं।’

जैन का कहना है कि कुछ खिलाड़ियों के लिए संभव है कि विज्ञापनों में मंदी का दौर है। लेकिन स्थिति अभी ज्यादा नाजुक नहीं कही जा सकती। उनके मुताबिक हम कीमतों में बढ़ोतरी के मद्देनजर विज्ञापनों की संख्या में 10 प्रतिशत की कमी देख सकते हैं। अगले छह महीने में न्यूजप्रिंट की कीमतों में कमी आने के कोई संकेत नहीं हैं।

First Published - August 21, 2008 | 11:09 PM IST

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