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बोनस का वक्त नहीं

Last Updated- December 07, 2022 | 10:41 AM IST

गत वित्तीय वर्ष के लिए आईसीआईसीआई  बैंक ने वरिष्ठ प्रबंधकों को बेहतर कामकाज के लिए दिए जाने वाले बोनस में कटौती की है। इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है।


निजी क्षेत्र के इस सबसे बड़े बैंक ने चालू वित्त वर्ष के लिए भी पदोन्नति व बोनस में कटौती की घोषणा की है। बैंक ने अपने कर्मचारियों के वेतन में भी महज 8 फीसदी की बढ़ोतरी की है। आईसीआईसीआई बैंक ने अन्य कंपनियों की तुलना में आने वाली चेतावनियों को पहले ही पहचान लिया।

इस प्रक्रिया में इस बैंक ने इस नीति को एक सिरे से खारिज कर दिया कि विकास की धीमी रफ्तार के बावजूद भारतीय कर्मचारियों के वेतन में मोटी बढ़ोतरी होगी। हालांकि विभिन्न एजेंसियों ने इस बात की भविष्यवाणी की थी कि भारतीय कंपनियों के कर्मचारियों के वेतन में इस साल भी अच्छी खासी बढ़ोतरी होगी और यह बढ़ोतरी 15 फीसदी तक हो सकती है।

हेविट ने एक सर्वे में इस बात का खुलासा किया था कि भारतीय कंपनियों व बहुराष्ट्रीय कंपनियों के बीच वेतन बढ़ोतरी का अंतर खत्म हो जाएगा। इस बात का अनुमान लगाया गया था कि बहुराष्ट्रीय कंपनियां जहां अपने कर्मचारियों के वेतन में 14.9 फीसदी की दर से वेतन बढ़ोतरी करेंगी वहीं देसी कंपनियां 15.5 फीसदी की दर से वेतन बढ़ाएंगी। अगर आर्थिक विकास की दर मजबूत रहती तो इस प्रकार की बातों का कोई मतलब भी होता।

लेकिन धीमी गति से होने वाले आर्थिक विकास के इस दौर में सभी कंपनियों को आईसीआईसीआई की राह पर चलने में ही भलाई लगती है। उदाहरण के लिए खुदरा क्षेत्र से जुड़े किसी बैंक के लिए भलाई इसी में है कि वेतन पर आने वाली लागत उसके कुल राजस्व से 15 फीसदी से ज्यादा नहीं हो। ऐसे में कई कंपनियों ने आईसीआईसीआई की राह पर चलते हुए इस साल के लिए वेतन बढ़ोतरी में कटौती का फैसला किया है। आईबीएम इंडिया ने अपने कर्मचारियों को मिलने वाली मकानों की सुविधा में कटौती की है।

ओरेकेल जैसी बड़ी कंपनी ने भी इस साल के लिए वेतन में महज 7-8 फीसदी की बढ़ोतरी की है जबकि पिछले साल इस कंपनी में 12-14 फीसदी की बढ़ोतरी की गयी थी। कई कंपनियों ने अपने यहां उच्चस्तरीय नियुक्तियों पर रोक लगा दी है या फिर काफी सोच समझ कर कर्मचारियों की नियुक्ति कर रही हैं। इसके अलावा यह बात भी मायने रखती है कि मोटी तनख्वाह से वहां के कर्मचारी संतुष्ट हो जाते हैं।

आईडीसी के सर्वे के मुताबिक वेतन के लिहाज से संतुष्टि के ममाले में टीसीएस का रैंक चौथा था जबकि तनख्वाह देने के मामले में कंपनी का रैंक 13 वां पाया गया। वेतन देने के मामले में इंफोसिस का रैंक 12 वां था लेकिन इस वेतन से कर्मचारियों की संतुष्टि के मामले में कंपनी का रैंक 28 वां पाया गया। बायोटेक्नोलॉजी, इंश्योरेंस व मीडिया जैसे कुछ क्षेत्र को छोड़ दे तो अन्य कंपनियों के पास तत्काल विकल्प यही है कि वह वेतन के मामले में अपनी बचत कर उस पैसे को प्रशिक्षण पर खर्च करे। संगठित रूप से प्रशिक्षण ही एकमात्र रास्ता है। 

First Published - July 10, 2008 | 11:06 PM IST

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