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सामाजिक दायित्व और लाभ में टकराव नहीं

Last Updated- December 07, 2022 | 12:43 AM IST

सी के प्रह्लाद मिशिगन विश्वविद्यालय में कॉरपोरेट रणनीति के प्रोफे सर हैं और उन्होंने गरीबी, कंपनियों के सामाजिक दायित्व आदि मुद्दे पर कई किताबें लिखी है।


इन सारी बातों पर श्रीलता मेनन की उनसे की गई बातचीत के प्रमुख अंश-

बहुत सारी कंपनियां अपनी व्यापारिक रणनीति में बदलाव के लिए कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) की पींगे बजा रही है। लेकिन आपको नहीं लगता है कि व्यापार का लक्ष्य लाभ कमाना होता है?

मेरी राय में सामाजिक दायित्व निभाना कंपनियों के लिए अच्छी शुरुआत है। लेकिन सामाजिक तौर पर उत्तरदायी होना और लाभ कमाना अलग-अलग बातें हैं और इसमें कोई टकराव नहीं है।

कैसे?

कोई कंपनी जब तक लाभ नहीं कमायेगी, तो वह दूसरे के लिए क्या करेगी? किसी भी सामाजिक दायित्वों के निर्वाह के लिए कंपनियों का लाभ में रहना जरुरी है। इन सारी चीजों के पीछे मुख्य बात यह है कि बाजार की मांग को समावेशिक विकास में परिवर्तित करना चाहिए। इसलिए सीएसआर जरुरी है, लेकिन संक्रमणीय स्तर पर।

ई-चौपाल जैसे प्रयोगों पर आपकी क्या राय है? क्या आप सोचते हैं कि ये प्रयोग बिल्कुल सही है और किसानों के लिए फायदेमंद है? हमने तो कुछ ऐसे किसानों से भी बात की है, जो इस तरह के प्रयोगों से काफी गुस्से में हैं।

गांवों में रहने वाले लोगों को दो स्तर पर देखना चाहिए- सूक्ष्म उपभोक्ता और सूक्ष्म उत्पादक। ई-चौपाल की शुरुआत सूक्ष्म उत्पादकों के लिए की गई थी। अब इस वर्गीकरण को सूक्ष्म निवेशक और सूक्ष्म पहलकर्ता के तौर पर देखा जा सकता है। अगर आपके पास 20 लाख ऐसे किसान हैं, जो प्रतिवर्ष 100 डॉलर बचाते हैं, तो वहां संभावनाएं दिखती है। इसलिए मैं समझता हूं कि अगर समुदायों की रुचि का ख्याल रखा जा रहा है तो यह व्यापार के लिए अच्छा है।

First Published - May 20, 2008 | 10:56 PM IST

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