विज्ञापन जुटाने के लिए मची होड़ अब नए दौर में प्रवेश कर चुकी है। अब यह लड़ाई मोबाइल के जरिये लड़ी जा रही है। इसके जरिये टेलीकॉम और इससे जुड़े दूसरे उद्योग विकास की नई संभावनाएं तलाश रहे हैं।
मोबाइल बाजार में वैल्यू एडेड सर्विस का कारोबार पहले ही टुकड़ों में बंटा हुआ है और इसके जरिये बहुत ज्यादा विज्ञापन नहीं आ रहे हैं। अब कंपनियां अपनी आमदनी बढ़ाने के लिए दूसरे रास्तों की ओर बढ़ रही हैं। इसमें एक रास्ता यह भी हो सकता है कि मोबाइल नेटवर्क के जरिये विज्ञापन जुटाए जाएं।
मोबाइल विज्ञापन नेटवर्क एक तरह से इंटरनेट पर विज्ञापनों के नेटवर्क के जैसा ही है। इस पूरी प्रक्रिया में प्रकाशक, विज्ञापनदाता, एजेंसी और एक तकनीकी प्लेटफॉर्म शामिल रहते हैं।
कंपनियों ने इसके जरिए काफी कुछ हासिल भी किया है। मुंबई की मोबाइल विज्ञापन से जुड़ी कंपनी एमखोज के जरिये पिछले हफ्ते तक एक अरब विज्ञापन जारी हो चुके हैं। इस तरह कंपनी हर महीने मोबाइल प्लेटफॉर्म से 22.5 करोड़ विज्ञापन जारी करती है जिसमें 300 साझीदार और 42 से 50 ब्रांड शामिल हैं। वैसे ये सारे आंकड़े पिछले 6 महीनों और उससे कुछ पहले बढ़े हैं।
एमखोज के सीईओ नवीन तिवारी कहते हैं कि देश में मोबाइल एड नेटवर्क का यह शुरुआती दौर है। दरअसल एमखोज को सफलता ऐसे ही हासिल नहीं हुई। कंपनी ने अलग-अलग हैंडसेट, अलग- अलग मोबाइल सेवा प्रदाता कंपनियों और यहां तक कि उपभोक्ताओं की लोकेशन तक के हिसाब से तकनीक अपनाई।
इसके अलावा मोबाइल टू विन, मौज और दूसरी कई कंपनियां मोबाइल विज्ञापन के लिए कंटेंट तैयार कर रही हैं और अपने मोबाइल ऐड नेटवर्क के जरिये बाजार को साधने की तैयारी में लगी हैं। इस कारोबार के बढ़ने की भी कई वजहें हैं जैसे की मोबाइल के जरिये इंटरनेट का उपयोग करने की भारतीयों की बढ़ती आदत। गौरतलब है कि 2006 में जहां 1.6 करोड़ लोग ही मोबाइल के जरिये इंटरनेट का उपयोग करते थे वहीं 2007 में यह संख्या बढ़कर 3.8 करोड़ तक पहुंच गई।
इसमें जीएसम और सीडीएमए दोनों ही तरह के उपभोक्ता शामिल हैं। इस होड़ में कंपनियां दूसरी कंपनियों से पिछड़ न जाएं, इसके लिए भी रणनीति तैयार की जा रही है। उदाहरण के तौर पर मोबाइल टू विन ने कारोबार बढ़ाने के लिए साझेदारों से बात करना शुरू कर दिया है और प्रकाशकों और विज्ञापनदाताओं से हाथ भी मिलाया है। मोबाइल टू विन के कंट्री हेड राजीव हीरानंदानी कहते हैं कि हम लगभग 100 से अधिक ब्रांडों के साथ काम कर चुके हैं।
अपना मोबाइल ऐड नेटवर्क बनाने के बाद हमारी कंपनी वैल्यू चेन बन जाएगी। इसमें भी कई इंटरनेट ऐड नेटवर्क वाली कंपनियां मोबाइल ऐड नेटवर्क के कारोबार पर नजरें गड़ाए हुए हैं। याहू, गूगल, नोकिया, एडमोब, एओएल और कई दूसरी कंपनियां मोबाइल ऐड के कारोबार में उतरने का मन बना रही हैं। याहू ने तो बाकायदा घोषणा भी कर दी है।
इंटरएक्टिव एवेन्यूज के सीईओ रितेश नायर कहते हैं कि पिछले दो साल में मोबाइल विज्ञापन के बाजार में बहुत तेजी आई है। हालांकि उनका मानना है कि सेवा प्रदाताओं को वैप (डब्ल्यूएपी) और इंटरनेट आधारित विज्ञापनों से परे भी सोचना चाहिए।