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अब हर सूबे में एक केंद्रीय यूनिवर्सिटी

Last Updated- December 07, 2022 | 7:45 PM IST

देश में विश्वविद्यालयों के लिए कायदे कानून तय करने वाली संस्था विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी), राष्ट्रीय विश्वविद्यालय कानून बनाने की तैयारी कर रहा है।


इस कानून के तहत देश भर में 30 केंद्रीय विश्वविद्यालय स्थापित किए जाने हैं। ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना (2007-12) कें अंतर्गत केंद्र सरकार की योजना हर राज्य में एक (जहां एक भी केंद्रीय विश्वविद्यालय नहीं है) केंद्रीय विश्वविद्यालय स्थापित करने की है।

ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना में इन विश्वविद्यालयों को स्थापित करने पर लगभग 4,800 करोड़ रुपये का खर्च आने का अनुमान है। उच्च शिक्षा पर होने वाले खर्च का तकरीबन 20 फीसदी केंद्र सरकार ही वहन करती है। इन प्रस्तावित केंद्रीय विश्वविद्यालयों का संचालन दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय की तर्ज पर किया जाएगा।

सरकार की योजना इन विश्वविद्यालयों को विश्वस्तरीय सुविधाएं मुहैया कराने की है और इनकी स्थापना बड़े शहरों के आसपास ही की जाएगी। इनमें अलग- अलग तरह के विषय पढ़ाए जाएंगे जिसके लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय फैकल्टी पूल होगा। इनमें प्रवेश के लिए साझा प्रवेश परीक्षा ली जाएगी।

हालांकि, स्थापना के बाद ही स्थिति अधिक स्पष्ट हो पाएगी। इनकी स्थापना के लिए एक अध्यादेश लाना होगा। इन विश्वविद्यालयों की स्थापना में राज्य सरकारों की भी बहुत अहम भूमिका रहने वाली है। राज्य सरकारों को उचित स्थानों पर आवश्यक जमीन का इंतजाम करना होगा वह भी मुफ्त होगा। इस योजना से जुड़े एक प्रोफेसर का कहना है कि जमीन के मामले को लेकर राज्य सरकारें हाथ खड़े कर रही हैं।

तीन राज्यों में पहले से ही चल रहे विश्वविद्यालयों को ही केंद्र सरकार केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा देगी। इन तीन विश्वविद्यालयों में मध्य प्रदेश में डा. हरि सिंह गौड़ विश्वविद्यालय, सागर, छत्तीसगढ़ में बिलासपुर का गुरू घासीदास विश्वविद्यालय और गोवा का गोवा विश्वविद्यालय शामिल है।

First Published - September 3, 2008 | 11:21 PM IST

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