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शादी का एकतरफा प्रस्ताव!

Last Updated- December 06, 2022 | 9:44 PM IST

माइक्रोसॉफ्ट की याहू को खरीदने की कोशिश को शादी का एकतरफा प्रस्ताव करार दिया जा सकता है।


एक साल पहले भी सॉफ्टवेयर सेक्टर की इस दिग्गज कंपनी ने गूगल से प्रतिस्पर्धा करते हुए याहू को खरीदने की नाकाम कोशिश की थी। इस बार माइक्रोसॉफ्ट ने अपनी बोली 44.6 बिलियन डॉलर से बढ़ाकर 47.5 बिलियन डॉलर (कंपनी के रेवेन्यू का 85 फीसदी) कर दी और इसके मद्देनजर कई प्रेक्षक डील के बारे में पूरी तरह आश्वस्त थे।


लेकिन याहू 33 डॉलर प्रति शेयर के माइक्रोसॉफ्ट के प्रस्ताव के बदले 37 डॉलर प्रति डॉलर की मांग पर अड़ गई। बहरहाल, इस सौदे पर 3 महीने से चल रहे ड्रामे पर फिलहाल पूर्णविराम लग गया है और अब याहू के प्रमुख जेरी यांग को अपने शेयरधारकों को यह बात समझानी पड़ेगी कि उनकी कंपनी की कीमत माइक्रोसॉफ्ट के ऑफर से ज्यादा है।


इसके अलावा उनके पास एक विकल्प टाइम वॉर्नर के साथ गठबंधन करने का है। दूसरा विकल्प गूगल के साथ सौदे का है। हालांकि इसकी अपनी सीमाएं हैं, क्योंकि इससे अमेरिकी खोज (सर्च) विज्ञापन बाजार में याहू और गूगल दोनों का हिस्सा 80 फीसदी हो जाएगा और इस वजह से कंपनियों को एंटी-ट्रस्ट जैसी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।


अगर माइक्रोसॉफ्ट ने याहू का अधिग्रहण कर लिया होता तो इसे (माइक्रोसॉफ्ट को) 1.36 अरब इंटरनेट सर्च का फायदा होता। हालांकि इसके बावजूद इंटरनेट सर्च के मामले में माइक्रोसॉफ्ट गूगल से काफी पीछे होती। नील्सन के फरवरी तक के आंकड़ों के मुताबिक, गूगल के पास इंटरनेट सर्चों की तादाद 4.5 अरब है।


अगर एमएसएन सर्चों को भी जोड़ दिया जाए तो भी माइक्रोसॉफ्ट-याहू के पास इंटरनेट सर्च का कुल 29 फीसदी हिस्सा ही होता, जो इस मामले में गूगल की हिस्सेदारी 58.7 फीसदी का आधा है। इसके अलावा दोनों कंपनियों के एकीकरण में भी काफी राशि खर्च होती।


बहरहाल माइक्रोसॉफ्ट के शेयरधारकों को भले ही फिलहाल इस बात से राहत मिली होगी कि यह सौदा अनुचित कीमतों पर नहीं हुआ, लेकिन कंपनी के पास अब भी इंटरनेट संबंधी चुनौतियां बरकरार हैं। ग्लोबर कंप्यूटर मार्केट में कंपनी का लगभग एकाधिकार होने के बावजूद (विंडोज और ऑफिस सॉफ्टवेयर की वजह से) इंटरनेट सर्च में इसका हिस्सा 3 फीसदी से भी कम है।


ऑनलाइन के उभरते विज्ञापन बाजार के मद्देनजर गूगल, याहू और माइक्रोसॉफ्ट में एक-दूसरे को पछाड़ने के लिए होड़ मची है। ऑनलाइन विज्ञापनों का बाजार फिलहाल 40 अरब डॉलर से भी ज्यादा का है और 2010 तक इसके दोगुना से भी ज्यादा बढ़ने की उम्मीद है।


ऑनलाइन विज्ञापन बाजार में गूगल का 30 फीसदी और याहू का 14 फीसदी हिस्सा है, जबकि माइक्रोसॉफ्ट का हिस्सा महज 6 फीसदी है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस सौदे की कोशिश असफल होने के बाद माइक्रोसॉफ्ट या तो याहू के शेयरों की कीमतों में गिरावट का इंतजार करेगी, ताकि वह फिर से इस बाबत कोशिश कर सके।

First Published - May 6, 2008 | 11:02 PM IST

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