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पैकेजिंग भी बेहतर विकल्प है रोजगार का

Last Updated- December 07, 2022 | 8:40 PM IST

अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक संस्थानों की सूची में भारत के बिजनेस स्कूल और इंजीनियरिंग कॉलेज तो शामिल हैं ही, अब पैकेजिंग संस्थान भी अपनी बेहतर मौजूदगी दर्ज कराने में कामयाब हो रहे हैं।


हाल ही में मुंबई के एसआईईएस स्कूल ऑफ पैकेजिंग को 50 लाख रुपये का अनुदान अमेरिका के एवेरी डेनीसन फाउंडेशन की ओर से मिला है। यह अनुदान पैकेजिंग के कोर्स के लिए पांच साल तक मिलेगा। इस तरह के  सहयोग के जरिए भारत में छात्रों को पहली बार दाखिला लेने में मदद मिलेगी।

इस पैकेजिंग स्कूल में उद्योग आधारित नए प्रयोगों और खुद की पहल पर नई तकनीक के विकास पर जोर दिया जाएगा मसलन और बोतलों के लेबल और लेआउट के लिए। इस संस्थान में छात्रों के लिए जो कोर्स मुहैया कराएं जाएंगे उनमें शामिल है, पैकेजिंग और पैकेजिंग प्रबंधन में पी. जी. डिप्लोमा और पैकेजिंग साइंस ऐंड टेक्नोलॉजी में पी.जी. डिप्लोमा।

एवेरी डेनीसन फाउंडेशन की अध्यक्षा डायने बी. डिक्सन का कहना है, ‘हम एसआईईएस के साथ एक पायलट प्रोग्राम चला रहे हैं इसके जरिए हमारी कोशिश यह है कि हम पैकेजिंग उद्योग के लिए बेहतर प्रतिभाओं की खोज करें और नए प्रयोगों के लिए प्रोत्साहित करें।’

भारत में पैकेजिंग बाजार लगभग 60,000 करोड़ रुपये का है और यह सालाना 15 से 20 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है। ऐसा माना जा सकता है कि यह दुनिया के पैकेजिंग बाजार की औसतन बढ़ोतरी से भी ज्यादा है।

गौरतलब है कि इस उद्योग के तेजी से बढ़ने की वजह से इस करियर में बेहतरीन जॉब पाने की की हसरत भी पूरी हो रही है। इसमें  एक सकारात्मक टे्रंड यह देखने को मिल रहा है कि फार्मास्यूटिकल और एफएमसीजी कंपनियां कई पैकेजिंग प्रोफेशनलों को अपनी कंपनी के लिए चुनने लगी हैं।

पिछले साल ही टेट्रा पैक ने 25 लोगों का चयन पैकेजिंग के लिए किया और अब तक कंपनी ने अब तक इतने ही लोगों को इस कारोबार की बढ़ोतरी को देखते हुए इस साल चुना है। टेट्रा पैक इंडिया के साउथ एशिया मार्केट के एचआर निदेशक अमित मित्तल का कहना है, ‘पैकेजिंग उद्योग कई तरह के करियर के विकल्प मुहैया कराती है और इसमें मैटेरियल, प्रोसेसिंग, डिजाइन, क्वालिटी और पर्यावरणीय चलन से संबंधित विशेष तरह की जानकारी की जरूरत होती है।’

फिलहाल बड़ी और छोटी पैकेजिंग कंपनियां देश के तकनीकी और गैर तकनीकी प्रोफेशनलों की तलाश में हैं जो उत्पादों को बेहतर बनाने का काम कर सकते हैं और आधुनिक तकनीकों के जरिए काम करना जानते हों। कुछ कंपनियां अपने कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण भी मुहैया करा रही हैं जिसमें तकनीकी और काम से संबंधित जरूरतों पर जोर दिया जाता है।

कारोबारी भूमिका से रूबरू कराने के लिए कर्मचारियों को पूरे प्रोडक्ट पोर्टफोलियो के बारे में बताया जाता है ताकि कंपनी की गुणवत्ता पर जोर को लेकर एक बेहतर समझ बन सके। दूसरी ओर तकनीकी सेवाओं के कर्मचारियों को विशेष तरह की पैकेजिंग और वितरण व्यवस्था को लेकर बेहतर प्रशिक्षण दिया जाता है ताकि वे किसी प्रोडक्ट के लिए अच्छे तकनीकी दक्ष कर्मचारी साबित हो सकें।

कई दफा ऐसा भी होता है कि प्रशिक्षण के बाद मूल्यांकन का दौर भी चलता है जिसको पूरा करने पर प्रमाणपत्र भी दिया जाता है। उत्पादन के स्तर पर भी हर एक व्यक्ति को किसी खास काम के लिए लंबी अवधि के लिए प्रशिक्षित किया जाता और उनकी दक्षता का आकलन भी किया जाता है। इसके अलावा उन्हें अलग-अलग काम सौंपा जाता है ताकि वे हर काम में दक्ष हो सकें।

केवल उद्योग जगत ही नहीं बल्कि शैक्षणिक संस्थान भी पैकेजिंग तकनीक का पाठयक्रम उपलब्ध करा रहे हैं। इसकी वजह यह है कि इस सेगमेंट के लिए लोगों का नामांकन बढ़ रहा है और छात्र इसे बतौर करियर अपना रहे हैं। इंडियन इंस्टीटयूट ऑफ पैकेजिंग के संयुक्त निदेशक और ब्रांच प्रमुख दीपक खेडकर का कहना है, ‘हम छात्रों के लिए पैकेजिंग टेक्नोलॉजी में दो साल का पी. जी. डिप्लोमा कोर्स ऑफर कर रहे हैं।

इस साल 650 लोगों से ज्यादा लोगों ने प्रवेश परीक्षा दी जिसमें से 100 लोगों का चयन हुआ है जिसमें से 50 लोग मुंबई के लिए और इतने ही लोगों का चयन दिल्ली के लिए हुआ। पिछले साल इस कोर्स के लिए इस साल के मुकाबले लगभग आधे छात्र थे।’

इस क्षेत्र में प्लेसमेंट के लिए बड़ी फार्मा कंपनियों, एफएमसीजी और आईटी कंपनियों मसलन प्रॉक्टर एंड गैंबल, एचयूएल, कैडिला और मोजर बेयर में भी बेहतर विकल्प मौजूद हैं। खेडकर कहते हैं, ‘पिछले साल 28 बहुराष्ट्रीय कंपनियां प्लेसमेंट के लिए हमारे यहां आई जिनमें कॉस्मेटिक्स और इलेक्ट्रिक फर्म भी शामिल हैं।

हमारे सभी छात्रों की प्लेसमेंट हो गई और उनका औसतन सैलरी पैकेज 4 से 5 लाख था और सबसे ज्यादा ऑफर 25 लाख रुपये के लिए दिया गया।’ केपीएमजी के कार्यकारी निदेशक नारायणनन रामास्वामी का कहना है, ‘आजकल हर चीज में पैकेजिंग की जरूरत बढ़ रही है इसी वजह से इस उद्योग में भी बढ़ोतरी हो रही है। कुछ साल पहले तक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ की मांग नहीं थी लेकिन अब इसकी बढ़ोतरी के मद्देनजर विशेष तरह के पैकेजिंग की मांग बढ़ रही है।’

First Published - September 10, 2008 | 12:04 AM IST

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