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रोजगार गारंटी योजना में बलि का बकरा बनते लोग

Last Updated- December 07, 2022 | 8:41 AM IST

उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले के दूधी ब्लाक में राजखेड़ा पंचायत की अध्यक्ष सोनमती देवी इस समय जेल में हैं। उनकी तरह ही देश भर में तमाम निरक्षर महिलाएं अध्यक्ष के रूप में काम कर रही हैं।


दरअसल वे कठपुतली की तरह काम करती हैं और उनके परिवार के पुरुष सदस्य पंचायत का कामकाज देखते हैं। सोनमती देवी को राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना में घोटाले का दोषी पाया गया है। इस योजना में नियमों के मुताबिक गांव के गरीबों को 100 दिन के रोजगार की गारंटी दी जाती है।

जब इस साल जनवरी महीने में उनके खिलाफ प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज की गई तो दूधी ब्लॉक के सभी 50 पंचायत अध्यक्ष सोनमती देवी के पीछे खड़े हो गए। उन्होंने इस रोजगार गारंटी योजना को कार्यान्वित करने से इनकार कर दिया। सच कहें तो उन सभी को इस बात का खतरा था कि रोजगार गारंटी योजना लागू करने में मानकों का पालन न करने के लिए सभी को जेल जाना पड़ सकता है।

उनका आरोप था कि उन पर 30 प्रतिशत धनराशि प्रखंड विकास अधिकारी (बीडीओ) और उनके सहायकों को देने के लिए मजबूर किया जाता है, तभी योजना के तहत मिलने वाला धन मिल पाता है। जाहिर है कि ऐसे में धन के गबन का आरोप लग सकता है। ऑडिट भी बीडीओ कार्यालय द्वारा किया जाता है। पंचायत जितना भी भुगतान करती है, उस पर सवाल खड़े किए जा सकते हैं। यह सब इस बात पर निर्भर करता है कि बीडीओ द्वारा भेजे गए इंजीनियर क्या निष्कर्ष निकालते हैं। सोनमती देवी के पति अंबिका प्रसाद का कहना है कि उनकी पत्नी निर्दोष है और उन्होंने अधिकारियों को रिश्वत नहीं दी, इसलिए उन्हें फंसाया गया है।

इसके पीछे सच्चाई जो भी हो, लेकिन एक असहाय महिला अब जेल की सलाखों में है। रोजगार गारंटी योजना को लागू करने में बीडीओ की अहम भूमिका होती है, लेकिन फिर भी वह महिला योजना की भेंट चढ़ गई। वहीं बीडीओ और उसके सहयोगी इस मामले से पूरी तरह अलग रहे और उन पर कोई आरोप तक नहीं लगा। सोनमती देवी की गिरफ्तारी के एक सप्ताह बाद दूधी ब्लाक में एक आदेश आया कि अब मजदूरी के रूप में दिए जाने वाले धन का स्थानांतरण सीधे ग्राम प्रधान के खाते में किया जाए।

हालांकि गिरफ्तारी से इसका कोई संबंध नहीं था, लेकिन इस आदेश से समस्या के एक अंश का ही हल हो पाएगा। मानकों का पालन किए जाने की जांच करने में सरकारी कर्मचारियों की भूमिका अहम है और मजदूरी के भुगतान के मामले की जांच किए जाने के अधिकार को लेकर अभी भी वे मजबूत स्थिति में हैं। इस तरह से अगर देखें तो सोनमती देवी की गिरफ्तारी के बाद भी इस तरह से बलि का बकरा बनाए जाने वाले लोगों की संख्या में कोई कमी नहीं आने वाली है या इसका खात्मा नहीं होने जा रहा है।

जो भ्रष्ट लोगों पर उंगलियां उठाते हैं, वे भी सुरक्षित नहीं हैं। उड़ीसा के कोरापुट जिले के नारायणपटना ब्लाक की भी कहानी कुछ ऐसी ही है। इस ब्लाक के बोरीगिरि पंचायत के अध्यक्ष और आदिवासी नेता नारायण हरेका की पिछले 9 मई को हत्या कर दी गई। वह उड़ीसा आदिवासी मंच के ब्लॉक संयोजक थे। उन्होंने एक सर्वे किया था, जिसमें पाया गया कि रोजगार गारंटी योजना के तहत जारी किए गए रोजगार कार्ड में से 35 प्रतिशत का वितरण नहीं किया गया है।

पिछले साल उन्होंने इसके खिलाफ विरोध प्रदर्शनों का आयोजन किया। इसका परिणाम यह हुआ कि विभिन्न इलाकों में 40 प्रतिशत से लेकर 90 प्रतिशत तक रोजगार कार्ड वितरित किए गए। उड़ीसा आदिवासी मंच के इस नेता ने संवाददाताओं से कहा कि आम लोगों को इस योजना के बारे में पूरी तरह से अंधेरे में रखा जाता है और ठेकेदार, रोजगार कार्ड का दुरुपयोग करके पैसा बनाते हैं। निश्चित रूप से इस विरोध प्रदर्शन से उनके हितों को नुकसान पहुंचा। अभी हाल ही में इस योजना में शहीद होने वालों में कामेश्वर यादव का भी नाम जुड़ गया है।

यादव झारखंड के गिरिडीह जिले के सीपीआई (एमएल) की ब्लॉक समिति के सदस्य थे, जिनकी लाश 7 जून को मिली। कामेश्वर, रोजगार गारंटी योजना में ठेकेदारों और बिचौलियों के भ्रष्ट तौर तरीकों के खिलाफ आवाज उठा रहे थे। साथ ही वह लाभार्थियों को भ्रष्टाचार में लिप्त लोगों के खिलाफ लामबंद कर रहे थे। कामेश्वर की हत्या के बाद रोजगार गारंटी योजना पर काम कर रहे झारखंड के पलामू जिले के एक और कार्यकर्ता ललित मेहता की हत्या हुई। मेहता पहले सिविल इंजिनियर थे, जो बाद में स्वयंसेवी बन गए।

कांदड़ा के जंगलों में 14 मई को उनकी हत्या कर दी गई। उन्होंने सामाजिक जांच के माध्यम से छतरपुर ब्लॉक में चल रहे रोजगार गारंटी योजना में हुई अनियमितताओं को उजागर किया था। ये कुर्बानियां भ्रष्टाचार को दी गईं या निरक्षरता को? निरक्षर और गरीब लोगों के लिए रोजगार गारंटी योजना लागू की गई, जिनसे उन्हें दो वक्त की रोटी मिल सके। अब ऐसी हालत में इसका खयाल कौन रखेगा कि इस योजना को सही ढंग से लागू किया जा रहा है या नहीं।

First Published - June 30, 2008 | 10:24 PM IST

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