facebookmetapixel
रेट कट का असर! बैंकिंग, ऑटो और रियल एस्टेट शेयरों में ताबड़तोड़ खरीदारीTest Post कैश हुआ आउट ऑफ फैशन! अक्टूबर में UPI से हुआ अब तक का सबसे बड़ा लेनदेनChhattisgarh Liquor Scam: पूर्व CM भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य को ED ने किया गिरफ्तारFD में निवेश का प्लान? इन 12 बैंकों में मिल रहा 8.5% तक ब्याज; जानिए जुलाई 2025 के नए TDS नियमबाबा रामदेव की कंपनी ने बाजार में मचाई हलचल, 7 दिन में 17% चढ़ा शेयर; मिल रहे हैं 2 फ्री शेयरIndian Hotels share: Q1 में 19% बढ़ा मुनाफा, शेयर 2% चढ़ा; निवेश को लेकर ब्रोकरेज की क्या है राय?Reliance ने होम अप्लायंसेस कंपनी Kelvinator को खरीदा, सौदे की रकम का खुलासा नहींITR Filing 2025: ऑनलाइन ITR-2 फॉर्म जारी, प्री-फिल्ड डेटा के साथ उपलब्ध; जानें कौन कर सकता है फाइलWipro Share Price: Q1 रिजल्ट से बाजार खुश, लेकिन ब्रोकरेज सतर्क; क्या Wipro में निवेश सही रहेगा?Air India Plane Crash: कैप्टन ने ही बंद की फ्यूल सप्लाई? वॉयस रिकॉर्डिंग से हुआ खुलासा

खेल की आड़ में राजनीतिक कुश्ती

Last Updated- December 07, 2022 | 3:04 PM IST

चीन में चाकू और ग्रेनेडों से लैस दो आतंकवादियों ने दक्षिण पश्चिम में स्थित मुस्लिम बहुल इलाके काशगार में हमला करके 16 लोगों की जान ले ली।


चूंकि, ओलंपिक खेलों की शुरुआत इसी हफ्ते होने वाली है, इसलिए इस बात का अंदाजा लगाने में दिक्कत नहीं होनी चाहिए कि हमलावरों का मकसद क्या था? हालांकि, यह हमला राजधानी पेइचिंग से सैकड़ों किलोमीटर दूर हुआ है, लेकिन यह बात तो तय है कि इस गूंज दुनिया भर में सुनाई देगी।

वैसे, चीन कोई कमजोर मुल्क नहीं है। इसलिए वह इस कोशिश में अपनी पूरी ताकत झोंक देगा कि ऐसे हमलों को दोहराया नहीं जा सके। चीन ने इन खेलों के वास्ते भारी तादाद में संसाधनों को झोंक डाला है। उसने ओलंपिक खेलों के ठीक-ठाक निपटारे और उसकी सुरक्षा के वास्ते 10 या 12 नहीं, पूरे 160 अरब डॉलर (करीब 6.75 लाख करोड़ रुपये) की मोटी रकम झोंकी है। ओलंपिक खेलों के वास्ते खूबसूरत खेल गांव बनाया गया है। साथ ही, बुनियादी ढांचे को भी काफी जबरदस्त बनाया गया है।

अब यह कोई दबी-छिपी हुई बात नहीं रह गई है कि इन खेलों के जरिये चीन दुनिया के पटल पर अपने उदय को जोरदार तरीके से दर्शाना चाहता है। अमेरिका और पश्चिमी मुल्कों के बीच ओलंपिक खेलों के एशिया में आने को लेकर कोई ज्यादा उत्साह नहीं है। आखिरी बार 1980 में किसी अमेरिका विरोधी मुल्क (तत्कालीन सोवियत संघ) को ओलंपिक खेलों की मेजबानी मिली थी। तब लगभग सारे के सारे पश्चिमी मुल्कों ने ही मॉस्को ओलंपिक का बॉयकॉट कर दिया था। इस बार भी तिब्बत मुद्दे का सहारा लेकर इसके बॉयकॉट की मांग की जा रही है।

हालांकि, इस बार बॉयकॉट की यह मांग पूरे खेलों के लिए नहीं, बल्कि केवल उद्धाटन समारोह तक ही सीमित है। ये सब बातें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सत्ता की राजनीति को दिखलाता है, न कि लोग ओलंपिक की भावना के बारे में क्या सोचते हैं। दरअसल, कई लोगों पूरी उम्मीद है कि चीन इस साल पदक तालिका में अमेरिका को पटखनी दे देगा। इसलिए इस बारे में भी कई तरह की कई रिपोर्ट आ रही हैं कि पदक की खातिर चीनी अपने खिलाड़ियों को किस तरीके से तैयार कर रहे हैं।

इस साल चीन सरकार की आपदा प्रबंधन क्षमता की जबरदस्त परीक्षा हुई। फरवरी में चीन में नए साल की छुट्टियों की शुरुआत हुई, जब बाहर रह रहे लोग-बाग अपने घर आते हैं। खुशी का यह मौका चीन के लिए एक बड़ी परीक्षा साबित हुई। दरअसल, रेल की पटरियों और सड़कों पर हर तरफ बर्फ ही बर्फ थी। हालांकि, इस दौरान सरकार ने जबरदस्त सूझबूझ का परिचय दिया और सेना को बर्फ हटाने के काम में लगा दिया। मई में दक्षिण पश्चिमी प्रांत सिचुआन में जबरदस्त भूकंप आया, जिसमें हजारों लोगों की जान गई। उसके एक महीने बाद ही ग्वानदोंग प्रांत में भीषण बाढ़ आई।

दोनों मामलों में राहत और बचाव कार्य जबरदस्त तरीके से किए गए। हालांकि, चीनी शहरों में प्रदूषण का खतरनाक स्तर चिंताजनक है। सरकार ने लाखों गाड़ियों को सड़कों से हटाने और कई प्रदूषण फैलाने वाले कारखानों को बंद करने जैसे कड़े फैसले लिए। लेकिन रिपोर्टों के मुताबिक ज्यादा अंतर नहीं पड़ा है। फिर भी पेइचिंग ओलंपिक से हमें काफी कुछ सीखना है क्योंकि हमारे लिए भी 2010 में राष्ट्रमंडल खेलों के रूप में एक बड़ा इम्तिहान आने वाला है।

First Published - August 5, 2008 | 10:50 PM IST

संबंधित पोस्ट