बिल गेट्स ने जब माइक्रोसॉफ्ट के प्रमुख के पद से इस्तीफे की घोषणा की थी तो उनसे यह सवाल पूछा गया कि कंपनी का नया मिशन क्या है।
उन्होंने जवाब दिया कि डाटा सेंटर्स को आधुनिक बनाया जाएगा और ऐसे सॉफ्टवेयर तैयार किए जाएंगे जो 10 गुना तेज हों। इस जवाब ने शायद कई सवाल पैदा कर दिए हों और कुछ लोगों का यह भी मानना हो सकता है कि गेट्स इससे बेहतर मिशन भी तैयार कर सकते थे।
गेट्स के बाद माइक्रोसॉफ्ट के सामने एक बड़ी चुनौती होगी क्लाउड कंप्यूटिंग में एक बड़ी शक्ति बन कर उभरना। क्लाउड कंप्यूटिंग एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें डाटा सेंटर्स में कंप्यूटिंग संसाधन तीसरी पार्टी के अधिकार में होते हैं और उनका परिचालन भी उसी के जरिए होता है। दुनिया के बाकी हिस्सों में भले ही इस योजना को पूरा करने पर विचार किया जा सकता है, पर अगर बात भारत के लिहाज से की जाए तो माइक्रोसॉफ्ट के लिए यह काफी मुश्किल है।
दो साल पहले ही माइक्रोसॉफ्ट इंडिया (माइक्रोसॉफ्ट की भारतीय शाखा) ने एक स्वतंत्र इकाई के तौर पर काम करना शुरू कर दिया था और अब वह सीधे रेडमंड को रिपोर्ट करती है। माइक्रोसॉफ्ट इंडिया की अपनी मूल कंपनी से जो दूरी है उसका बहुत अधिक असर देखने को नहीं मिलता क्योंकि भारत में तो कंपनी के तीन दशक पुराने जो मिशन हैं वही पूरे नहीं हुए हैं। पर जिन जगहों और मसलों पर माइक्रोसॉफ्ट इंडिया अपनी मूल कंपनी का प्रभाव नहीं देखना चाहती होगी वहां जरूर माइक्रोसॉफ्ट उसका पीछा नहीं छोड़ रही है।
उदाहरण के रूप में माइक्रोसॉफ्ट पर किसी समय अविश्वसनीयता का जो आरोप लगाया गया था, उसका असर अब तक माइक्रोसॉफ्ट इंडिया पर देखने को मिलता है। साथ ही ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर और विस्टा का धीमी गति से लोकप्रिय होना कुछ ऐसे मसले हैं जहां माइक्रोसॉफ्ट इंडिया खुद को मूल कंपनी से अलग नहीं रख पा रही है। पर एक मामला ऐसा भी है जहां माइक्रोसॉफ्ट इंडिया ने माइक्रोसॉफ्ट से भी पहले कदम उठाया है और वह है खुद को फिर से संगठित करने का।
कंपनी चाहती है कि वह अपने को इस तरीके से तैयार करे ताकि ज्यादा से ज्यादा उपभोक्ता उससे जुड़ सकें। वहीं माइक्रोसॉफ्ट भी इस साल के आखिर तक रीब्रांडिंग की तैयारी में है जिसके लिए वह 30 करोड़ डॉलर खर्च करेगी। माइक्रोसॉफ्ट इंडिया को नई शक्लो सूरत देने के पीछे कंपनी के अध्यक्ष रवि वेंकटेशन का हाथ है। वेंकटेशन इससे पहले कमिन्स में अपनी सेवाएं दे चुके हैं और माइक्रोसॉफ्ट में उनपर जो भार है वह बिल्कुल दूसरे किस्म का है। यह कुछ उसी तरीके का है जैसे 28 साल पहले स्टीव बॉल्मर को कंपनी में शामिल करना।
कंपनी के गठन के पांच साल बाद भी जब वह विकास के मोर्चे पर कुछ खास कमाल नहीं दिखा पाई थी तो बॉल्मर को कंपनी के साथ जोड़ा गया था। हालांकि इसके पहले बॉल्मर प्रॉक्टर ऐंड गैम्बल के साथ थे जिसका कारोबार माइक्रोसॉफ्ट से पूरी तरह अलग है। माइक्रोसॉफ्ट इंडिया अमेरिका से बाहर भारत में माइक्रोसॉफ्ट की सहायक कंपनी है जो पांच कारोबारी इकाइयों में डील करती है। कंपनी एंटरटेनमेंट ऐंड डिवाइसेज, सर्वर ऐंड टूल्स, क्लाइंट्स, ऑनलाइन सर्विसेज और माइक्रोसॉफ्ट कारोबारी इकाइयों में दखल रखती है।
बहुत जल्द कंपनी एक ‘कंज्यूमर ऑर्गेनाइजेशन’ बनाने की तैयारी में है जिसके बाद मौजूदा पांचों इकाइयों को दो में समाहित कर दिया जाएगा। कंज्यूमर कारोबारी सेगमेंट में पर्सनल कंप्यूटर, मोबाइल ऐंड लाइव और कुछ अन्य ऑनलाइन सेवाओं को शामिल किया जाएगा। दूसरी यूनिट कमर्शियल बिजनेस की होगी जिसमें सेल्स और सर्वर से जुड़े कारोबार को शामिल किया जाएगा। भारतीयों में मोबाइल फोन को लेकर उत्साह बढ़ता जा रहा है और वेंकटेशन इस बात से अच्छी तरह वाकिफ हैं।
वेंकटेशन इस बात को समझते हुए कहते हैं, ‘भारतीय जितने अधिक मोबाइल फोन खरीद रहे हैं उतने पर्सनल कंप्यूटर नहीं (इसमें लैपटॉप और डेस्कटॉप दोनों शामिल हैं)। हम तीन स्क्रीन- पीसी, मोबाइल और इंटरनेट के जरिए हर भारतीय की जिंदगी से जुड़ना चाहते हैं। उम्मीद है कि ऐसे लोग जो इन उपकरणों का इस्तेमाल करते हैं उनकी संख्या 2012 तक 75 करोड़ तक हो जाएगी। साथ ही हम अपने राजस्व को बढ़ाकर एक अरब डॉलर तक ले जाना चाहते हैं। और तीसरी बात यह है कि हम लोगों के बीच अपने इमेज को बेहतर बनाना चाहते हैं।’
पूरी दुनिया में करीब एक अरब पर्सनल कंप्यूटर हैं और मोबाइल फोन की संख्या इनसे तीन गुना अधिक है। मोबाइल फोन के उपभोक्ताओं में आ रही तेजी में उभरते बाजारों का बड़ा योगदान है। अकेले भारत में हर महीने 80 लाख नए मोबाइल कनेक्शन लिए जा रहे हैं जबकि तुलना में हर साल केवल 60 से 70 लाख पीसी की खरीद हो रही है। माइक्रोसॉफ्ट की चाहत है कि वह जल्द से जल्द विंडोज मोबाइल ऑपरेटिंग सॉफ्टवेयर के जरिए मोबाइल फोन में अपनी जगह बना सके। अभी इस बाजार के 45 फीसदी हिस्से पर सिंबियन का कब्जा है जिसकी नोकिया के साथ साझेदारी है।
वेंकटेशन कहते हैं कि रेडमंड को भारत को इनोवेशन लैब की तरह देखना चाहिए। वेंकटेशन के इस बयान से उनकी कंपनी को लेकर महत्त्वाकांक्षा साफ झलकती है। एक अनुमान के मुताबिक विश्व में इंटरनेट सॉफ्टवेयर और सेवाओं का बाजार 2011 तक 112 फीसदी की दर से बढ़कर 942 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा। अभी माइक्रोसॉफ्ट इंडिया की चर्चा खासतौर पर एमएसएन वीडियो को लेकर हो रही है, जिसमें ब्रेकिंग न्यूज से लेकर मनोरंजन के नवीनतम साधन परोसे जाते हैं। साथ ही मैसेंजर टीवी को लेकर भी काफी चर्चा है जिसके जरिए उपभोक्ताओं को वीडियो प्ले करने की सुविधा दी जाती है।
विंडोज लाइव और एमएसएन इंडिया के कंट्री मैनेजर जसप्रीत बिंद्रा कहते हैं कि एमएसएन वीडियो के जरिए जो कंटेंट परोसा जा रहा है उसे उपभोक्ताओं की ओर से अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है। कंपनी ने इंटरनेट प्रोटोकॉल टीवी के लिए भी प्लेटफार्म उपलब्ध कराना शुरू कर दिया है। इसी साल फरवरी में भारत में कंपनी ने डिजिटल एडवरटाइजिंग प्लेटफार्म लॉन्च किया था। इस प्लेटफार्म के जरिए एडवटाइजर्स लाइव सर्च पर कोई भी कीवर्ड डालकर उसे एमएसएन मोबाइल पोर्टल पर डिसप्ले करा सकते हैं।
अगर आपके फोन पर जीपीआरएस की सुविधा नहीं है तो इस सर्च का रिजल्ट आपको एसएमएस के तौर पर मोबाइल पर मिलेगा। कंपनी ने हैदराबाद में अपना सबसे बड़ा प्रोडक्ट डेवलपमेंट सेंटर खोला है। इस सेंटर के प्रमुख श्रीनी कोप्पुलू बताते हैं कि इस सेंटर के जरिए पिछले तीन साल में माइक्रोसॉफ्ट के लिए 180 अमेरिकी पेटेंट तैयार किए जा चुके हैं। देश में विभिन्न भाषाओं को ध्यान में रखते हुए ही कंपनी की ओर से प्रोजेक्ट भाषा की शुरुआत की गई है जिसके जरिए विंडोज और ऑफिस इंटरफेसेज को 14 भाषाओं में उपलब्ध कराया जा रहा है।
वेंकटेशन कहते हैं कि कई बार ऐसा देखने को मिलता है कि स्थानीय भाषाओं में उपलब्ध नहीं होने के कारण तकनीक के इस्तेमाल में परेशानी आती है। पर इस परियोजना के जरिए इस समस्या से भी निपटने की कोशिश की जा रही है। अब तक माइक्रोसॉफ्ट की आलोचना इस बात को लेकर की जाती रही है कि इसके सॉफ्टवेयर महंगे होते हैं। और पाइरेसी का भी नुकसान कंपनी को उठाना पड़ा है जिसके चलते कंपनी की यह चाहत की हर पीसी में उसका ही ऑपरेटिंग सिस्टम हो, यह पूरा नहीं हो पा रहा है। इन बातों को ध्यान में रखते हुए कंपनी ने पे-ऐज-यू-गो मॉडल की शुरुआत की है, जिससे शुरुआती खर्च कम बैठता है।
उपभोक्ता जैसे जैसे अपने कंप्यूटर का इस्तेमाल करते जाते हैं, वे अपनी जरूरत की सुविधाओं के लिए प्री पेड कार्ड के जरिए भुगतान करते जाते हैं। माइक्रोसॉफ्ट इंडिया में राष्ट्रीय तकनीकी अधिकारी विजय कपूर बताते हैं कि सरकार की ओर से मांग को ध्यान में रखते हुए माइक्रोसॉफ्ट ओपन एक्सएमएल फॉर्मेट और ओपन डाक्यूमेंट फॉर्मेट के बीच एक तकनीकी जुड़ाव लाने की कोशिश की गई है।
एमएस इंडिया – स्वॉट एनालिसिस
ताकतें
ब्रांड इमेज के लिहाज से कंपनी कोका कोला के बाद दुनिया में दूसरे स्थान पर है
पिछले पांच सालों में आरऐंडडी पर 6 अरब से अधिक खर्च किया गया है
कमजोरियां
सर्च इंजन के मामले में कंपनी की बाजार हिस्सेदारी कमजोर है
ऑनलाइन सर्विसेज कारोबार में भी पिछड़ी हुई है कंपनी। कंपनी के राजस्व का महज पांच फीसदी इस क्षेत्र से आता है
संभावनाएं
कंपनी हेल्थकेयर के बाजार पर पकड़ बनाने की कोशिश में है और यूरोपीय बाजारों पर उसकी नजर है
आईटी ऐप्लीकेशंस का बाजार भी तेजी से बढ़ रहा है जिस पर कंपनी की नजर है
खतरा
पाइरेसी के चलते सॉफ्टवेयर कंपनियों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। कंपनी को भी इससे खतरा है
कंपनी को अपने हर उत्पाद और सेवा के लिए बाजार से कड़ी चुनौती मिल रही है