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कैंसर से लड़ने के लिए आया ‘रोको कैंसर’

Last Updated- December 07, 2022 | 12:43 AM IST

दक्षिण दिल्ली में रहने वाली 43 वर्षीय महिला मीनू कपूर जब अपने पड़ोस में गुरुद्वारे के लिए निकलीं तो यह दिन उनके किसी और दिन जैसा ही था।


जब वे गुरुद्वारे से बाहर आ रही थीं तो यह जानती थीं कि वे एक गंभीर बीमारी की चपेट से बाहर आ चुकी हैं। मीनू उन 24 महिलाओं में से एक हैं जिनका उस दिन मुफ्त में मैमोग्राम हुआ था।

दरअसल ‘रोको कैंसर’ नाम की मुहिम जनता में स्तन कैंसर के बारे में जागरूकता फैला रहा है। इसके लिए कोई पैसा भी नहीं लिया जा रहा है। लंदन के एम के सी नाम के ट्रस्ट द्वारा यह कार्यक्रम 2005 से चलाया जा रहा है। यह ट्रस्ट ब्रिटेन के ब्रेकथ्रू ब्रेस्ट कैंसर रिसर्च के साथ जुड़ा हुआ है। यह संगठन शोध और जागरूकता के जरिये स्तन कैंसर के खिलाफ मुहिम छेड़ी हुई है।

‘रोको कैंसर’ की निदेशक (भारत) ईशा भंडारी का कहना है कि हमारा मुख्य उद्देश्य स्तन कैंसर के बारे में जागरूकता फैलाना है। हमने उत्तर प्रदेश में इस मामले में एक महीने तक जागरूकता फैलाने का काम किया है। इस दौरान उत्तर प्रदेश के 400 गांवों में 30 कैंप लगाए गए। इसके लिए दूरवर्ती इलाकों में स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षित किया गया और साथ ही कुछ महिलाओं पर परीक्षण भी किए गए।

उन्होंने कहा कि इसके बाद मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में कैंप आयोजित करने की योजना है। इस कार्यक्रम को लड़कियों के कॉलेज में भी ले जाया जाएगा। इन कैंपों के लिए आधुनिक सुविधाओं से लैस मेडिकल वाहनों का प्रयोग किया जाता है। कैंसर जांच इकाई पर तकरीबन 1.5 करोड़ रुपये की लागत आती है।  इसके अलाव 25 कैंप आयोजित करने में 6 लाख  रुपये का खर्च आता है। एक मोबाइल कैसर जांच इकाई में मैमोग्राम, प्रयोगशाला और जांच केंद्र जैसी बुनियादी सुविधाएं होती हैं।

अब तक इस संगठन ने 317 कैंप आयोजित किए हैं जिनमें 15,388 महिलाओं पर परीक्षण किया गया है जिनमें से 163 स्तन कैंसर से पीड़ित पाई गई हैं। दिल्ली में इस संगठन ने दिल्ली गुरुद्वारा प्रबंधन समिति के साथ मिलकर कैंप आयोजित किए हैं। इसमें टीसीएल और डा.रेड्डीज लैबोरेटरी ने भी इस संगठन का सहयोग किया है। इस संगठन को बीमारी से पीड़ित महिलाओं के आगे इलाज कराने में दिक्कत पेश आ ही रही है साथ ही वित्तीय मजबूरियां भी हैं।

ईशा का कहना है कि हमको पॉजिटिव मामलों को आगे इलाज के लिए भेजने में मुश्किल आ रही है। हमको दिल्ली सरकार ने सहायता का आश्वासन दिया है कि हमारा संगठन सरकारी अस्पतालों में कैंप आयोजित कर सकता है। सरकार ने पॉजिटिव लोगों के इलाज के लिए भी आश्वस्त किया है।

उनका कहना है कि हमें वित्तीय मदद के लिए व्यावसायिक संस्थानों की आवश्यकता है। इस बाबत ब्रेकथ्रू ब्रेस्ट कैंसर रिसर्च के मुख्य कार्यकारी जेरेमी ह्यूज ने कहा है कि इस मामले में कंपनियां काफी मदद कर सकती हैं। वैसे भी उनमें काम करने वालों में बड़ी तादाद में महिलाएं होती हैं। उनका कहना है कि यह कदम सबके लिए फायदेमंद साबित होगा।

First Published - May 20, 2008 | 10:58 PM IST

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