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देखिए चीन का चमत्कार

Last Updated- December 07, 2022 | 12:05 PM IST

कारों के लिहाज से चीन बेहद अहम बाजार है। चीनी ऑटोमोबाइल उद्योग को देखकर भी इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।


चीन में तकरीबन 30 साल पहले ऑटो क्रांति हुई थी जब फोक्सवैगन ने एक नई इबारत की शुरुआत की थी। अब हालात कुछ इस तरह के बन गए हैं कि दुनिया में कोई भी गंभीर कार निर्माता चीनी बाजार को नजरअंदाज नहीं कर सकता। और वे ऐसा करें भी क्यों?

जब साल 2000 से लेकर 2005 तक चीन में ऑटो बाजार 22 फीसदी की तेजी से बढ़ा हो। पिछले साल भी चीन में 87.9 लाख वाहन बिके। यदि दुनिया भर में छाई मंदी और ईंधन की कीमतों में आई तेजी से वाहनों की बिक्री में आने वाली कमी की बात कोई चीन में करेगा तो लोग उस पर हंसे बिना नहीं रहेंगे।

चाइनीज एसोसिएशन ऑफ ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स के आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2008 के पहले पांच महीनों में  चीन में 43 लाख वाहन बिक चुके हैं जो पिछले साल इसी दौरान बिकने वाले वाहनों से 17 फीसदी अधिक हैं। इस तरह के रुझान तो इसी बात की ओर संकेत करते हैं कि इस साल के आखिर तक चीन में वाहनों की बिक्री एक करोड़ की संख्या को पार कर जाएगी। बात केवल यहीं पर नहीं रुकती ऑटो विशेषज्ञों का मानना है कि चीनी ऑटो बाजार अगले पांच वर्षों में साल-दर-साल 25 फीसदी की दर से बढ़ेगा।

हालांकि चीन में हाल ही में तेल की कीमतों में 17 फीसदी का इजाफा किया गया है। गौरतलब है कि चीन, अमेरिका के बाद दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा कार बाजार है तथा वाहन उत्पादन के मामले में अमेरिका और जापान के बाद चीन का ही स्थान आता है। इस बात को नहीं भूलना चाहिए कि चीन को यह रुतबा हासिल करने में 30 साल लगे हैं। चीन में तीन बॉक्स वाली छोटी कारों को बहुत पसंद किया जाता है।

भारत की तरह चीन में भी सेडान को प्रीमियम और शान के साथ जोड क़र देखा जाता है। यही कारण है कि इस साल की पहली छमाही में चीन में सबसे ज्यादा बिकने वाली कारें सेडान ही हैं। और इस तरह के रुझान कई सालों से चले आ रहे हैं। हालांकि बाजार के जानकारों का मानना है कि शानदार बिक्री के रुझान कभी भी बदल सकते हैं।

ईंधन की बढ़ती कीमतों के अलावा दूसरे कई कारणों से जल्द ही चीनियों का अपनी पसंदीदा कारों से मोहभंग हो सकता है। इस साल की पहली छमाही में चीन में सबसे ज्यादा बिकने वाली कारों के बारे में जानकारी दी जा रही है। चाइनाकारटाइम्स डॉट कॉम से मिली जानकारी भी कम चौंकाने वाली नहीं है जिसके मुताबिक पुराने स्थापित ब्रांड ही अभी भी बिक्री में अपनी बढ़त बनाए हुए हैं।

1 फोक्सवैगन सेंटाना
69,214 यूनिट

भारत में जैसे कार बाजार में मारुति है, वैसी ही स्थिति चीन में फोक्सवैगन की है। कंपनी ने 1985 में शंघाई ऑटोमोटिव इंडस्ट्री कॉर्पोरेशन (एसएआईसी) के साथ मिलकर तीन बॉक्स वाली कार बनाई थी। उसके बाद से सेंटाना ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। तब से लेकर अब तक सेंटाना में कई बदलाव हुए हैं और अब यह कई फॉर्मेट में उपलब्ध है। इसमें चार सिलिंडर वाला 1600 सीसी और 1800 सीसी का पेट्रोल ऑप्शन वाला इंजन लगा है।

इसका 1.6 वाला वर्जन ईंधन खपत के लिहाज से बहुत बढ़िया है जबकि 1800 सीसी वाले की परफॉर्मेंस थोड़ा और बेहतर है। हाल में चीन को कार्बन उत्सर्जन के लिए बहुत जिम्मेदार ठहराया जा रहा है, इसलिए कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए चीन में तेजी से प्रयास किए जा रहे हैं। इसी के तहत बहुत सारी पुरानी सेंटाना कार को नई कार से बदला गया है। अपनी उम्र के चलते यह आज भी सबसे ऊपर बनी हुई है।

2 बिक एक्सले 
62,750 यूनिट

चीन में एसएआईसी का जनरल मोटर्स  के साथ भी उपक्रम लगा हुआ है। जब उन्होंने चीन में  जीएम-डीएटी (पहले चीन में देवू के नाम से जाना जाता था) मॉडल पेश किए जब उनकी बिक्री पूरे शबाब पर थी। बिक  एक्सले भारत में शेव्रले ऑप्ट्रा के जैसी है लेकिन यह मुश्किल से ही पहचान में आती है।  इसमें भी 1600 और 1800 सीसी का चार सिलिंडर वाला पेट्रोल इंजन लगा है। इसको 2003 में जब बाजार में उतारा गया था तब इसने कई कारणों से बिक्री में अव्वल दर्जा हासिल कर लिया था। इसने जनरल मोटर्स के लिए चीन में लोअर-मीडियम सेगमेंट के बाजार में जगह बनाई। चीन में इस सेगमेंट को उभरता हुआ माना जाता है।

3 फोक्सवैगन जेटा
61,202 यूनिट

हाल ही में भारत में लॉन्च हुई कार के नाम से इसको मत जोड़िए।  फोक्सवैगन ने फर्स्ट ऑटोमोटिव वर्क्स (एफएडब्ल्यू) के साथ मिलकर  इसको 1991 में बाजार में उतारा था जो कि इसका दूसरा अवतार था। सेंटाना की तरह ही जेटा में भी जरूरत के मुताबिक साल दर साल बदलाव होते रहे। फोक्सवैगन-एफएडब्ल्यू की इस कार के चौथे वर्जन का नाम बदल कर ‘बोरा’ कर दिया गया है जिससे लोगों को दुविधा न हो जबकि पांचवे वर्जन का नाम सैगिटरश डिट्टो है। यह 1600 सीसी पेट्रोल और 1900 सीसी डीजल वर्जन में उपलब्ध है। चीन में सरकार और सेना में यह बहुत लोकप्रिय है तो टैक्सियों के तौर पर भी यह बहुत अधिक प्रचलित है।

4 टोयोटा केमरी
54,123 यूनिट

टोयोटा चीनी बाजार को भुनाने में थोड़ा पीछे रह गई है लेकिन यह भी सही है कि देर आए, दुरुस्त आए। महंगी होने के बावजूद केमरी चीन में हमेशा से लोकप्रिय रही है और पहले इसका आयात किया जाता था। मई 2006 में टोयोटा ने नया संयंत्र लगाया था और उसके दो साल बाद यह चौथे नंबर पर आने में कामयाब भी हुई है। चीन में ही बनने की वजह से यह कुछ सस्ती भी हुई है। केमरी का रूप चीन में भारत से कुछ जुदा है और चीन में यह चार सिलिंडर 2000 सीसी इंजन और 2.4 लीटर से ऊपर वाले वर्जन में उपलब्ध है।

5 टिएनजिन एफएडब्ल्यू झियाली
48,421 यूनिट

टिएनजिन एफएडब्ल्यू के टोयोटा के साथ गठजोड़ ने कुछ बढ़िया मॉडल पेश किए हैं। पुराने झियाली मॉडल पर आधारित यह कार हैचबैक और नॉचबैक दोनों फॉर्मेट में उपलब्ध है। इसमें तीन सिलिंडर वाला 1000 सीसी और चार सिलिंडर वाला 1342 सीसी वाले टोयोटा के दो इंजन लगे हुए हैं। कंपनी पुरानी यारिस और विट्ज को अलग-अलग नाम से बना रही है और हैरानी की बात है कि जियाली के मुकाबले वे इतनी लोकप्रिय नहीं है।

6 चेरी क्यूक्यू
46,251 यूनिट

यहां पर चेरी क्यूक्यू को बतौर बोनस शामिल किया जा रहा है। जब 2003 में चेरी ने क्यूक्यू नाम से छोटी कार को लॉन्च किया था तब यह कार बड़े विवादों में फंस गई थी। वह इसलिए कि यह दिखने में देवू मटीज की तरह थी जिसका वास्ता जनरल मोटर्स से था। टाटा की नैनो के पहले तक यह दुनिया में सबसे सस्ती कार हुआ करती थी। यह तीन सिलिंडर वाले 800 सीसी और चार सिलिंडर वाले 1100 सीसी वाले इंजन ऑप्श्न में उपलब्ध है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एफएडब्ल्यू हाइमा, होंडा एकॉर्ड और हुंडई एलांट्रा और बीडब्ल्यू पेस्साट पिछले दरवाजे से टॉप 10 में जगह बना पाई हैं।

ओलंपिक का असर
फोक्सवैगन समूह ओलंपिक के सहारे अपनी पुरानी गद्दी पर फिर से काबिज होना चाहता है। इसके लिए समूह ने ओलंपिक से जुड़ने को बेहतर समझा है


पेइचिंग ओलंपिक से फोक्सवैगन को बड़ी उम्मीदें हैं। अरे, ओलंपिक का दायरा तो देखिए, हजारों एथलीट, अधिकारी और सपोर्टिंग स्टाफ। यही नहीं, इनके अलावा बड़ी संख्या में महत्त्वपूर्ण व्यक्तियों और प्रतिनिधियों के साथ-साथ दुनिया भर से आए खेल प्रेमियों के लिए आने-जाने की व्यवस्था करना भी तो अहम है।

ऐसे में फोक्सवैगन के लिए पेइचिंग ओलंपिक से बढ़िया कौन सा साझेदार होगा, इससे एशिया के सबसे बड़े ऑटो बाजार में कंपनी की जड़ें और पुख्ता ही होंगी। फोक्सवैगन के पास उस बाजार में अपने आप को पुनर्स्थापित करने का मौका है जहां दशकों तक उसका राज रहा है और कुछ साल पहले ही जनरल मोटर्स ने उससे नंबर एक की गद्दी हथियाई है।

इस कवायद की शुरुआत 2004 में हुई थी जब पेइचिंग खेल आयोजन समिति ने इन खेलों के लिए फोक्सवैगन को अपना पहला साझेदार और अधिकृत टांसपोर्ट पार्टनर बनाया। इसके बाद फोक्सवैगन ने अपनी साझेदारी का प्रचार भी हर मिले मौके पर करना शुरू कर दिया। इसमें चीन में होने वाले प्रमुख खेल आयोजन तो है हीं, पेइचिंग ऑटो शो में भी कंपनी ने इसका प्रचार किया। इस बेड़े में 4,350 फोक्सवैगन, 650 स्कोडा और 1,000  ऑडी कारें रहेंगी।

लेकिन इस मैराथन प्रयोग से पहले फोक्सवैगन ने पूरे देश में ओलंपिक मशाल रैली में कंपनी की 1,000 से भी ज्यादा कारों को उतारने में सफलता हासिल की। इसके लिए 97 दिनों में 113 शहरों में 40,000 किलोमीटर की यात्रा हुई जिसमें माउंट एवरेस्ट भी शामिल है। अभी तक का आंकड़ा तो यह हो गया लेकिन आयोजन के लिए फोक्सवैगन कितनी और कौनसी कारों का इंतजाम करेगी। इसके लिए पैस्सेट और जेटा सेडान को तो पहले ही चुन लिया गया है। फिर फोक्सवैगन की एसयूवी टॉरेज और इसके जैसी टिगुएन की बारी आती है।

इस सूची में फोक्सवैगन  की दुनिया भर में जानी मानी एमपीवी कैडी और ट्रांसपोर्टर का नाम आता है। वह नजारा देखने लायक होगा जब 20 पैस्सेट लाइंगयू कारें स्टेडियम का चक्कर लगाएंगी। ये कारें हाइड्रोजन ईंधन से चलेंगी। यह चीन में फोक्सवैगन की पहली ईंधन उत्पादन इकाई होगी। इसके अलाव पेइचिंग में लगातार बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिहाज से भी यह पूरी कवायद की जा रही है। स्कोडा अपनी ऑक्टेविया, फेबिया और नई सुपर्ब को इसके लिए उतारेगी वहीं ऑडी अपने बेड़े में एसयूवी क्यू-7, ए-6 और लंबे व्हीलबेस वाली ए-8 को शामिल करेगी।

इन सभी कारों का थीम खेलों के प्रति अपना जुनून दिखाने का है और फोक्सवैगन इसके जरिये संदेश देना चाहती है कि वह खेल भावना का सम्मान तो करती ही है और बेहतरीन कारें भी बनाती है। वैसे इन कंपनियों की कवायद का मकसद यही है कि चीनी लोगों के दिलों में जगह बनाई जाए। साथ ही ओलंपिक की वैश्विक छवि होने के कारण दुनिया भर में भी इनको फायदा पहुंचने की उम्मीद है। देखते हैं इनकी मुराद पूरी होती है कि नहीं  क्योंकि ओलंपिक अब ज्यादा दूर नहीं हैं।

First Published - July 21, 2008 | 12:28 AM IST

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