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देखिए, हाइब्रिड का अनोखा जलवा

Last Updated- December 07, 2022 | 8:04 AM IST

इस समय को हम मुश्किलों का दौर कह सकते हैं। धुएं और प्रदूषण की वजह से ध्रुवीय क्षेत्रों के भालूओं का अस्तित्व खत्म हो रहा है और तेल का मौजूदा संकट तो है ही।


दूसरी ओर इस तरह की चीजों की वजह से ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री की बेहद आलोचना हो रही है। शायद इसकी भरपाई के लिए ही नई हाइब्रिड कारों को बाजार में उतारा जा रहा है। हालांकि इस धरती के लिए हाइब्रिड कारें ज्यादा अच्छी साबित नहीं हो सकती क्योंकि इसमें पेट्रोल इंजन का उपयोग हुआ है। यह तो सही दिशा में उठाया गया एक कदम है।

जैसी उम्मीद थी उसके मुताबिक ये मशीन काफी नाजुक होते हैं। कुछ साल पहले तक लोग यकीन नहीं कर सकते थे कि सड़क पर हाइब्रिड कारें भी दौड़ती हुई नजर आएंगी। हालांकि हमारे जैसे औसत मानसिकता वाले लोगों के लिए यह एक बड़ी बात हो सकती है। मैं और अमन एक हाइब्रिड कार में दिल्ली नोएडा एक्सप्रेस वे पर ड्राइव कर रहे थे। शायद यह महसूस करने की भी हमारी कोशिश थी कि यह दूसरी कारों के मुकाबले कितनी अलग है।

यह कार सिविक हाइब्रिड थी। वास्तव में भारत में इस तरह की कार को पहली बार लाने का श्रेय होंडा को दिया जा सकता है। इस कार के पिछले शीशे पर ‘इंटीग्रेटेड मोटर असिस्ट’ का स्टिकर और कार के पहिए पर हाइब्रिड का बैज लगा होता है। आमतौर पर सिविक हाइब्रिड और साधारण सिविक गाड़ियों में केवल यही अंतर है, उसके अलावा कोई खास फर्क नहीं दिखता। हाइब्रिड कार के पहिए भी इतने बेहतर है कि वे बेहद आसानी से घूमते हैं। हालांकि आपको यह बात आसानी से नहीं पता चल सकती है।

यह कार पूरी तरह से एक नई तकनीक और विचारधारा का नतीजा है हालांकि इसकी कीमत बहुत ज्यादा है मसलन इस कार के दिल्ली एक्स शो रूम की कीमत 21.5 लाख रुपये है। मुझे यह जानकर बहुत हैरानी हुई कि इतना सब होने के बावजूद होंडा की ओर से एक कसर तो रह ही गई कि वह हाइब्रिड कारों को यहां की सड़कों पर एक खास पहचान नहीं दिला पाई। इस कार का इंटीरियर भी बिल्कुल सिविक 1.8 मॉडल की तरह ही है, हालांकि इसके दूसरे उपकरणों में थोड़ा अंतर जरूर है।

अब मैं यह महसूस कर सकता हूं कि सिविक की सामान्य मॉडल की गाड़ियों में डिजिटल और फ्यूचरिस्टिक लुक क्यों दिखाई देता था। इसका मतलब साफ है कि वे हमेशा से हाईब्रिड वर्जन को दिमाग में रखकर ही अपनी योजना बनाते थे। इसीलिए एक बटन को छूने पर ही तापमान गेज माइलेज गेज में भी बदल जाता है। इसमें 0 से 50 की रीडिंग की सुविधा भी है जिसके जरिए कार में ईंधन की कितनी खपत है इसका अंदाजा भी लग जाता है। इसके अलावा बायीं तरफ एक आठ चरणों वाला बार भी लगा होता है जो इलेक्ट्रिक मोटर की बैटरी की चार्जिंग स्थिति को  दर्शाता है।

एंपीमीटर के पास एक मीटर लगा होता है जिसमें सबसे ऊपर अस्सिटेंस होता है और उसके नीचे चार्ज होता है जिसके जरिए जीरो चार्ज और डिस्चार्ज की स्थिति का पता चलता है। इस हाइब्रिड कार की एक और खासियत इसकी ऑटो स्टॉप लाइट है। जब कार खड़ी होती है उस वक्त उसका इंजन बंद हो जाता है लेकिन उसका मोटर चलता ही रहता है उस वक्त भी ऑटो स्टॉप लाइट जलती रहती है। इस कार में कुछ जटिलताएं जरूर हैं। हम इसकी ईंधन क्षमता के आंकड़ों का टेस्ट करने की कोशिश कर रहे थे तब हमारी आंखें ऑडोमीटर से बैटरी चार्ज और आईएमए से स्पीड तक घूम रही थी।

आपको बता दूं कि आपके लिए यह जरूरी हो जाता है कि आप सड़क पर अपनी नजर रखने के साथ-साथ इस बीच में इस पर भी नजर रखना लाजिमी हो जाता है। इसकी आदत पड़ने में थोड़ा वक्त तो लगता ही है लेकिन जब आप ऐसा करने लगते हैं तो यह स्थिति काफी बेहतर हो जाती है। इसके बाद अमन की बारी है। यह अच्छा है कि काइल एक ऑटोमोटिव इंजीनियर हैं और वह जानते हैं कि कार के अंदर वास्तव में क्या हो रहा है। जब मैं ड्राइवर की सीट पर बैठा तब मैं यह जानता था कि यह 109 बीएचपी क्षमता वाली गाड़ी है जिसमें आईसी के अलावा इलेक्ट्रिक मोटर भी है।

मेरी कोशिश यह जानने की थी कि मैं ड्राइव करते वक्त कैसा महसूस कर रहा हूं। होंडा ने हाइब्रिड कार को बेहतर माइलेज देने वाली कार की तरह ही बनाया था। इसकी कोशिश यह थी कि माइलेज का आंकड़ा थोड़ा ज्यादा बेहतर हो। ऐसा करने के लिए हम लोगों को एकसमान स्पीड रखनी थी जो कि 35 से 40 किलो मीटर प्रति घंटे की रफ्तार हो। इसके अलावा इसके पहिए के  घूमने की दर 1100 से 1300 आरपीएम के बीच होती है।

मुझे ऐसा लग रहा था कि इसके पैडल पर नियंत्रण रखने में थोड़ी परेशानी हो रही है। इसके अलावा खास तौर पर 6 लेन वाले बड़े नोएडा हाइवे पर सिविक को ड्राइव करने का असली मजा समझ में आता है। दरअसल यह कार ड्राइवर के लिए एक बेहतर कार साबित होती है। मुझे सिविक को ड्राइव करने में बेहद मजा आता है। इस हाइब्रिड कार को ड्राइव करने के अनुभव की बात अलग कैसे है? सिविक 1.8 के मॉडल की तुलना में यह हाइब्रिड कार 50 किलो ज्यादा भारी है।

इसके अलावा और भी खूबियां हैं, मसलन इस हाइब्रिड कार की बैटरी कुछ ज्यादा ही शक्तिशाली है। इस बैटरी के साथ 93 बीएचपी की क्षमता है और 1300 सीसी का चार सिलिंडरों वाला इंजन भी है जो इस हाइब्रिड कार की ड्राइव को रोमांचक बना देता है। हालांकि आपको यह मालूम नहीं चल पाता। हाइब्रिड को एक फास्ट कार कहा जा सकता है लेकिन इसकी तुलना इसके 134 बीएचपी क्षमता वाले आईसी इंजन वाली कारों से नहीं की जा सकती जो बेहद मशहूर हो रही हैं। यह कार कई मायनों में थोड़ी सामान्य है क्योंकि इसमें बडे पैमाने के पावर यूनिट का जोर नहीं है।

हालांकि इसके स्पीडोमीटर की बात तो लाजवाब ही है क्योंकि इस पर कोई तर्क ही नहीं हो सकता। जब आप इसके पैडल पर पांव रखते हैं तो इसका अंक तेजी से बढ़ता है। इसकी गति पर कोई रोक नहीं होती है। यह कार इतनी आसानी से चलती है कि कभी कभी आपके लिए यह यकीन करना भी मुश्किल हो जाता है। लेकिन जब इस कार को प्रदर्शित किया गया था तो इसकी रफ्तार थी 140 किलोमीटर प्रति घंटा। किसी हाइवे पर जाने से पहले दिल्ली ट्रैफिक में इस सिविक हाइब्रिड के लिए रास्ता बनाना जरूरी है।

हालांकि इस तरह की स्थितियों के बीच भी इस कार को ड्राइव करना बेहद आसान है। इस कार में आईसी इंजन से बैटरी का बदलाव बेहद मामूली सा लगता है और आपको इस पर ज्यादा सोचने की जरूरत भी नहीं होती है। अब इसके गियर बॉक्स की बात कर लें। इस सिविक हाइब्रिड के  गियर बॉक्स में सीवीटी तकनीक का इस्तेमाल होता है। इसका मतलब यह है कि इसके गियर शिफ्ट करने में बेहद आसानी होती है और इसकी रफ्तार पर कोई खास असर नहीं पड़ता है। इसी वजह से सड़क पर चलने वाले सभी वाहनों के बीच भी आप अपना रास्ता बनाए रख सकते हैं।

इसमें एक खास तरीके का ब्रेकिंग सिस्टम लगाया गया है। इसके जरिए ब्रेक लगाने पर जो ऊर्जा पैदा होती है उसका इस्तेमाल बैटरी को चार्ज करने के लिए होता है। ट्रैफिक के दौरान भी ब्रेक का बेहद फायदा होता है और बैटरी को चार्ज करने में काफी आसानी होती है। मैंने काइल से हाइब्रिड कारों के बारे में कई सवाल पूछे। उसने मुझे विस्तार से बताना शुरू किया कि इसका इलेक्ट्रिक मोटर कम स्पीड पर भी कैसे काम करना शुरू करता है और ब्रेक लगाने पर कैसे हर बार गतिज ऊर्जा निकलती है। इसके अलावा उसने मुझे इस कार के इको फे्रंडली होने के बारे में भी बताया। हालांकि यह सारी बातें मेरे सिर के ऊपर से गुजर गईं।

इस कार की असली परीक्षा तो हमारे सफर के अंतिम पलों में हुई। मेरे अलावा कार को ड्राइव करने वालों में से शायद ही किसी ने कार की ईंधन क्षमता पर नजर डाली हो। हम लोगों ने यह पाया कि 16.1 किलोमीटर के लिए एक लीटर पेट्रोल का खर्च हुआ था। यह ठीक है कि हम लोगों को माइलेज में ज्यादा जीत नहीं मिल पाई लेकिन हमें यह कार ड्राइव करने में बेहद मजा आया। अब ऐसा लगता है कि ऐसा केवल एक हाइब्रिड कार में ही संभव है।

हाइब्रिड बोले तो….

हाइब्रिड वाहनों में वाहन को चलाने के लिए दो या उससे भी अधिक पावर सोर्सेज का इस्तेमाल किया जाता है। होंडा सिविक हाइब्रिड में पावर एक आंतरिक दहन इंजन के जरिये आती है जो एक डाइरेक्ट इलेक्ट्रिक मोटर से जुड़ा है। इसका 1339 एसओएचसी चार सिलिंडर वाला मोटर 93 बीएचपी की शक्ति प्रदान करता है, लेकिन यह एक रेग्युलर पेट्रोल इंजन नहीं है।

यह पिछली सिविक हाइब्रिड के इंजन से 5 गुना छोटा है और उससे 25 गुना अधिक शक्तिशाली है। कैसे? सही मायनों में यह एक हाइटेक मोटर है जिसमें अल्ट्रा स्मूथ सिलिंडर वाल्स लगे हैं और घिसने से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए इसमें ऑयन प्लेटेड ऑयल कंट्रोल के साथ वाला एल्युमिनियम पिस्टन और टॉप रिंग्स लगाया गया है। जब कार कम स्पीड पर होती है तब इसके स्टेट ऑफ द ऑर्ट वेरिएबल वाल्व टाइमिंग सिस्टम (आई वीटेक) के तीन चरणों में से पहला चरण काम करता है।

इसमें कंप्रेशन स्ट्रोक पर बने प्रेशर को छोड़ने के लिए जब एक्जॉस्ट खोला जाता है तभी वाल्व बंद होते हैं और इलेक्ट्रिक मोटर क्रैंक को चलाता है और पिस्टन को ऊपर नीचे करने का काम करता है। आईसी मोटर सही तरीके से काम करता है और यह किसी चीज को जलाता भी नहीं है। इसकी दो अन्य स्टेज कम और तेज स्पीड पर गाड़ी की परफॉर्मेंस को बढ़िया तो बनाती है साथ ही ड्राइविंग को भी आसान बना देती हैं।

अब मोटर की बात करते हैं। आईएमए, भारत में अपनी शुरुआत करने जा रहा है। आईएमए का पूरा नाम ‘इंटीग्रेटेड मोटर असिस्ट’ है। मोटर अपने आप में ब्रशलैस डायरेक्ट करंट मोटर है जो इंजन को शक्तिशाली बनाकर कार को तेजी प्रदान करता है। ब्रशलैस मोटर ब्रुश गियर टाइप मोटर की तुलना में 10 फीसदी तक अधिक कारगर होते हैं। और यह इसमें लगे पिछले इंजन के मुकाबले 1.5 फीसदी अधिक शक्ति प्रदान करता है। आईएमए का अलग-अलग स्पीड में भी बढ़िया नियंत्रण होता है। यह आईसी मोटर पर काम करता है।

एक्सिलेरेशन के दौरान आईसी मोटर आईएमए बढ़िया परफॉर्मेंस के लिहाज से उपयोगी साबित होता है। कम स्पीड के दौरान आईएमए ही सारा काम करता है लेकिन एक्सिलेरेशन के दौरान काफी कुछ दारोमदार आईसी मोटर पर भी होता है। वे तब तक साथ काम नहीं करते जब तक आप कार को तेज गति पर न दौड़ाएं, कई बार जब आईएमका काम खत्म हो जाता है तब आईसी काम संभालता है। है न एकदम आसान।

दिलचस्प कवायद

कार निर्माण से जुड़ी कंपनियां इस समय मुश्किल हालात से गुजर रही हैं। धातुओं की कीमतें आसमान छू रही हैं, तेल की कीमतों में कोई कमी आने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं, इससे भी ज्यादा जिस बात ने इन्हें सबसे ज्यादा परेशान कर रखा है वह है यूरोपीय संघ का वह कदम जिसमें 2012 तक कार्बन उत्सर्जन में कमी का नया लक्ष्य तय कर दिया गया है।

वैसे ये कंपनियां वक्त के हिसाब से कार बनाने की तैयारियों में जुटी हैं और इसमें भी इनको लगता है कि आंतरिक दहन इंजन ही इनको नई राह दिखा सकता है। और इसमें भी इनको रूडोल्फ डीजल और कार्ल बेंज के डिजाइनों से भी ये बहुत उम्मीदें पाले हुए हैं। 

ऐसे मे ये कंपनियां करें तो क्या करें?

यदि क्रिस्टोफर ई बैंगल अपने मकसद में कामयाब हो गए तो चीजें बहुत तेजी से बदल सकती हैं। यदि बीएमडब्ल्यू के डिजाइन प्रमुख और बीएमडब्ल्यू डिजाइनवर्क्स यूएसए द्वारा जीआएनए कांसैप्ट या ज्योमेट्री एंड फंक्शंस इन एन एडेप्टेशन को तैयार कर लिया जाता है तो ग्राहकों के पास अपनी जरुरत के मुताबिक कार को शक्ल देने का अवसर मिल सकेगा। इसके अलावा इससे पर्यावरण को भी हरा-भरा रखने में मदद मिलेगी। क्रिस बैंगल 2001-02 में ‘फ्लेम सरफेस्ड’ सीरिज की सात कारों को सड़कों पर उतारकर एक जाना-पहचाना नाम बन गए।

वास्तव में, जीआईएनए कांसैप्ट सेवन सीरिज से पहले तकरीबन सात साल पहले डिजाइन किया गया था और यह पुराने जेड एट चेसिस पर ही आधारित था। कार कभी भी किसी को नहीं दिखाई गई, लेकिन अब जब कंपनी म्यूनिख में अपना म्यूजियम खोलने जा रही है तो इसको दिखाने की तैयारियां भी की जा रही हैं। बैंगल के मुताबिक इस दौरान ग्राहकों की सोच में भी बहुत परिवर्तन आया है। ग्राहक पिलर्स पर टिकी छत वाली कार और हर समय दिखाई पड़ने वाले महत्त्वपूर्ण फंक्शन वाली कार को अपनाने में नहीं हिचक रहे हैं। लेकिन जब छत को टिकाने के लिए कोई पिलर ही न मिले तब क्या होगा?

और यदि टेल लैंप और हेडलैंप ढक दिए जाएं, और केवल जरुरत के समय ही नजर आएं। इस बाबत बैंगल का जवाब आता है, फैब्रिक। इसका ढांचा बनाने के लिए न तो किसी मेटल और न ही एल्यूमिनियम का प्रयोग किया है यहां तक कि प्लास्टिक पैनल का प्रयोग भी नहीं किया गया है, लेकिन एक दूसरी चीजें इसकी बॉडी को सहारा देती हैं। इसकी आवाज शुरु में तो अजीब सी लगती है लेकिन वास्तव में यह शानदार है। इसकी बॉडी को सपोर्ट देने के लिए जिपर्स और फासनर्स का सहारा लिया गया है, उदाहरण के तौर पर इसका बोनट सेंटर लाइन के नीचे तकरीबन 50 सेमी. में बॉडी बैग जिपर फैशन में खुलता है।

इससे इंजन और दूसरे पुर्जों तक आसानी से पहुंच बन जाती है। इसमें जिप के जरिये पिछले हिस्से तक पहुंचा जा सकता है, और इसमें झुर्रियां भी नहीं पड़ती हैं। इसके दरवाजे भी फैब्रिक का ही हिस्सा हैं और आगे से पीछे तक खुल सकते हैं। इस मैटेरियल पर पानी, गर्मी और ठंड का असर भी नहीं पड़ता और न ही यह सिकुड़ता है। धातु के तार का ढांचा फैब्रिक को सपोर्ट करता है और जब भी फैब्रिक को हिलने-डुलने की जरुरत पड़ती है तो लचीला कार्बन स्टर्ट्स इसकी मदद करता है।

इस तरह जब भी इंजन को ठंडा करने के लिए हवा की जरुरत होती है तब वेंट्स अपने आप फैल जाते हैं और यदि कार को और ज्यादा डाउनफोर्स चाहिए होता है तो पिछला स्पॉयलर अपना आकार बदल लेता है। इसका मैटेरियल पारदर्शी नहीं है और इसकी हेडलाइट और टेललाइट तब तक नहीं दिखतीं जब तक कि उनको चालू न किया जाए। बैंगल का कहना है कि यह कार किसी भी मेटल पेनल से पेंट की हुई स्टैंडर्ड कार के बराबर ही भारी है, लेकिन इसके मैटेरियल का 100 फीसदी तक दोबारा उपयोग किया जा सकता है।

फिलहाल इसका बड़े पैमाने पर उत्पादन नहीं हो सकता, लेकिन इसको धीमे-धीमे उत्पादन तो किया जा सकता है। इसके लिए बहुत ज्यादा उपकरणों और टे्रंड तकनीशियन की भी जरुरत नहीं है और इसका बाहरी ढांचा 2 या अधिक तम ढाई घंटे में बनाया जा सकता है। बैंगल इसको भविष्य की कार बताते हैं जहां ग्राहक अपनी पसंद के हिसाब से अपनी कार की चाहत को पूरा कर सकते हैं।

उनका यह भी मानना है कि जब पहली बार 2001 में इसके बारे में सोचा गया था तब के मुकाबले अब इसका उत्पादन कहीं अधिक प्रासंगिक है। इसलिए आने वाले वक्त में आप बोनट जिप ठीक करने के लिए किसी मैकेनिक के बजाय किसी टेलर के पास जाएं तो चौंकिएगा नहीं।

First Published - June 30, 2008 | 12:07 AM IST

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