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ऑनलाइन मार्केटप्लेस का आया जमाना

Last Updated- December 07, 2022 | 7:45 AM IST

एलान्स और गुरू जैसे ऑनलाइन सर्विस मार्केटप्लेस (ओएसएम) छोटे और मझोले दर्जे के उद्योगों और पार्ट टाइम नौकरी चाहने वालों के बीच लोकप्रिय होते जा रहे हैं।


विशेषज्ञों का कहना है कि वेब 2.0 के साथ ओएसएम वर्चुअल ऑफिस के लिए अधिक कारगर साबित हो रहे हैं। इनकी वजह से दूरियां सिमट गई हैं और कोई भी अपने मन मुताबिक ऑफिस बना सकता है, इससे कर्मचारियों पर आने वाले खर्च में कमी आ गई है और लोगों का कौशल बढ़ाने में मदद मिली है।

भारत में जो महिलाएं ओएसएम से जुड़ी हैं, उनमें से 10 फीसदी अनुवाद, लेखन, और घरों से ऑनलाइन टयूशन के जरिये आमदनी कर रही हैं। दरअसल अनुवाद, लेखन, ग्राफिक्स, इंजीनियरिंग सेवाएं, व्यापार परामर्श, टयूशन, वेब डाटाबेस, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, एकाउंटिंग और कर सेवा, आर्किटेक्चर, मार्केंटिंग और सेल्स और कानूनी दस्तावेज तैयार करने जैसे काम ओएसएम पर बहुत लोकप्रिय हैं।

फ्रीलांसर आराम से बिजनेस पोर्टफोलियो तैयार करके अपनी खूबियों को प्रचारित कर सकते हैं और काम पाने के लिए जरूरी जगहों पर आवेदन कर सकते हैं। ज्यादातर निविदाओं में बोली 4,000 से लेकर 20,000 रुपये तक लगती है। इसमें खुली और बंद दोनों तरह की बोली लगती है। कुछ ओएसएम तो पंजीकरण के जरिये (यह 400 रुपये से लेकर 2,400 रुपये तक हो सकता है) फ्रीलांसर और बायर से पैसा लेती हैं। और कुछ प्रोजेक्ट के पूरा होने पर कमीशन लेती हैं।

इंटरनेट पर मुश्किल से 100 ओएसएम मौजूद हैं जिनमें से मुश्किल से ही कोई भारत में है। उनमें से एक ओएसएम लाइम स्पॉट एलएलसी (अमेरिका की लाइम समूह की कंपनी का हिस्सा) ने भारत में फरवरी 2008 में लाइम एक्सचेंज नाम से ओएसएम लॉन्च किया। अभी हाल ही में एडवरटाइजिंग न्यूज पोर्टल ‘एजेंसीफैक्स’ ने ओएसएम लॉन्च किया है।

लाइम एक्सचेंज के भारत में प्रमुख पवन अग्रवाल कहते हैं कि हमारा एक सोशल नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म है जहां पर लोग कम्युनिटी बना सकते हैं। इस पर बड़ी तादाद में लोग आ भी रहे हैं। किसी प्रोजेक्ट पर काम करने के लिए कोई भी अपनी वर्चुअल टीम बना सकता है। कम्युनिटी फीचर से खरीदने वालों को मदद मिलती है। कंपनी वेब 2.0 वर्जन वाले एक और एफिलेशन प्रोग्राम के बारे में योजना बना रही है।

इसके अलावा यह अगले दो महीनों में वीडियो और टेलीकान्फ्रेंसिंग और स्क्रीन शेयरिंग फीचर की शुरुआत करने जा रही है। बेंगलुरु के ओएसएम नाइन मोशन सिस्टम्स के उपाध्यक्ष बाला गिरिसाबाला कहते हैं कि शुरुआत में बेंगलुरु, दिल्ली, मुंबई और चेन्नई जैसे बड़े शहरों से काम छोटे शहरों को आउटसोर्स किया जा रहा था, अब बड़ी कंपनियां छोटी कंपनियों को काम दे रही हैं। यह सब ऑफलाइन चैनल के जरिये ही संभव हो पाया है। इसमें ओएसएम के जरिये विकास की काफी संभावनाएं हैं।

भारतीय उद्योग जगत दूसरे देशों में आउटसोर्सिंग के लिए भी खुल रहा है। नाइनमैक्स का ही उदाहरण लेते हैं, जो अमेरिकी बाजार पर ध्यान लगाए हुए है। लेकिन यह भारतीय बाजार को भी नजरअंदाज नहीं कर रही है और नाइन एक्सपर्ट नाम से नई सेवा की शुरुआत कर रही है। कंपनियों के लिए अल्प अवधि की मांग के मुताबिक अनुभवी लोगों को काम पर लगाने के लिहाज से यह बहुत अच्छा साबित हो रहा है।

हालांकि ओएसएम में खरीदारों के लिए फ्रीलांसर रेटिंग और फीडबैक बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है। इसी से यह पता लगता है कि वह सही फ्रीलांसर के संपर्क में हैं या नहीं। भारत में केवल 5 करोड़ नेट यूजर होने की वजह से इसका दायरा उतना फैला हुआ नहीं। इसके अलावा बैंडविड्थ और भुगतान मामलों को लेकर भी समस्या है।

कई बैंक इसमें सेवा देने से कतरा रहे हैं, ऐसे में क्रेडिट कार्ड के जरिये सेवा देना भी किसी चुनौती से कम नहीं है। क्रेडिट कार्ड भुगतान में भी सिक्योरिटी और वेब साइट प्रयोग जैसे मुद्दे जुड़े हुए हैं।

First Published - June 26, 2008 | 11:32 PM IST

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