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गरीबों को संजीवनी के रूप में केंद्र सरकार दे रही है बीमा स्मार्ट कार्ड

Last Updated- December 07, 2022 | 1:01 PM IST

संप्रग सरकार ने अपने लिए तो संजीवनी तलाश ही ली है, वहीं दूसरी ओर स्मार्ट बीमा कार्ड भी जारी करने में लगी है। तकरीबन 2 करोड़ लोगों को जॉब कार्ड जारी करने के बाद सरकार अब लोगों को बीमा कवर देने की कवायद में लगी हुई है।


सरकार, राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत बीमा स्मार्ट कार्ड जारी करेगी। इस योजना का लक्ष्य अगले पांच साल में 6 करोड़ बीपीएल कार्ड धारकों को इसके दायरे में लाने का है। दिल्ली और हरियाणा को तो उनके पहले 300 बीमा स्मार्ट कार्ड मिल भी गए हैं।

इस योजना में गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों को सालाना 30 रुपये के प्रीमियम पर सरकारी और निजी अस्पतालों में 30,000  रुपये तक की स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाने का अवसर मिलेगा। इसके तहत वास्तविक प्रीमियम 662 रुपये बैठता है। बीमा कंपनियों को इस रकम की अदायगी केंद्रीय श्रम मंत्रालय और राज्य सरकारें मिलकर करेंगी। इसमें से भी 75 फीसदी तो श्रम मंत्रालय को ही अदा करना पड़ेगा।

राज्य सरकारें भी वोटरों को लुभाने के लिए इस मौके का फायदा उठाना चाहती हैं। असम और त्रिपुरा के मुख्य सचिव जहां अपनी योजना पर काम कर रहे हैं वहीं गुजरात, राजस्थान, केरल और बंगाल एक महीने में कार्ड जारी करने की पूरी तैयारी कर चुके हैं। अगस्त में बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश के 15 जिलों में लोगों को स्मार्ट बीमा कार्ड मिलने लगेगा। इस योजना के जरिये 6 करोड़ बीपीएल कार्ड धारकों को बीमा कवर दिया जाना है, जिससे जुड़े 30 करोड़ लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं को लाभ मिल पाएगा।

इसी हफ्ते के अंत में दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित और उनके 2 मंत्रियों ने दिल्ली के पिछड़े हुए इलाकों में से एक मंगोलपुरी में जाकर पहली बार तकरीबन 200 बीपीएल कार्डधारकों को स्मार्ट कार्ड बांटे। महेंद्र सिंह जो कि दिल्ली में राज मिस्त्री का काम करता है, को मुख्यमंत्री से स्मार्ड कार्ड मिला। हालांकि वह कार्ड में दिए अस्पतालों के नाम नहीं पढ़ पाया लेकिन उसे यह जानकर खुशी हुई कि वह इसके जरिये अपनी बीमार मां का इलाज किसी नर्सिंग होम में भी करा सकता है। अपने 70 साल के पति का हाथ बंटाने के लिए घरों में काम करने वाली महेंद्र कौर भी स्मार्ट कार्ड को पाकर खुश थी।

इस योजना से जुड़े श्रम मत्रालय के अधिकारी अनिल स्वरूप का कहना है कि बाजार से जुड़ा मॉडल मरीज, साझीदार अस्पताल, बीमा कंपनियों और स्मार्ट कार्ड बनाने वाली कंपनियों के लिए फायदे का सौदा है। राज्य सरकारों ने इसके लिए बीमा कंपनियों से बोलियां भी आमंत्रित कीं, और जो कंपनी 662 रुपये के प्रीमियम पर तैयार हुई, वह इस सौदे को झटकने में कामयाब भी रही। इस योजना के पीछे जो बिजनेस मॉडल है, उससे बीमा कंपनियों को अधिक से अधिक कार्ड जारी करने में ही फायदा है। इसके पीछे भी स्वरूप वजह बताते हैं कि इससे उनकी आमदनी ही बढ़ेगी।

उनका यह भी कहना है कि हमें इस बात से नहीं डरना चाहिए कि बीपीएल कार्ड धारक इस प्रक्रिया से हट जाएंगे।  अभी तक ओरिंएंटल इंश्योरेंस, आईसीआईसीआई, न्यू इंडिया एश्योरेंस और चोलमंडलम एमएस जनरल इंश्योरेंस को 12 राज्यों में अनुबंध दिए गए हैं। दूसरी कंपनियां अन्य राज्यों द्वारा बोलियों की प्रतीक्षा में हैं। असम सरकार के अधिकारियों को इसकी प्रक्रिया में देरी न करने की सलाह देते हुए स्वरूप ने बताया कि जब अखबार में कोई निविदा जारी की जाती है तो उसके  तीन महीने के भीतर पहले लाभार्थी को अपना स्मार्ट कार्ड भी मिल जाता है।

कंपनियां लाभार्थियों के नाम के कार्ड में थंब इंप्रेशन (अंगूठे से पहचान) करने के लिए अतिरिक्त समय में काम कर रही हैं। ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी के उप महाप्रबंधक वीरेंद्र कुमार का कहना है कि हमने जिन कंपनियों को स्मार्ट कार्ड मुहैया कराने के लिए अधिकृत किया है  वे राशन अधिकारी के साथ मिलकर दिल्ली में 50 अलग-अलग जगहों पर थंब इंप्रेशन का काम कर रही हैं। इस काम के लिए राशन अधिकारी ही फील्ड ऑफिसर का काम कर रहे हैं। वीरेंद्र कुमार ही दिल्ली और बिहार में इस योजना को देख रहे हैं।

उनका कहना है कि वे तकरीबन 29,000 कार्ड जारी कर चुके हैं। इनमें से भी 240 लोग दिल्ली के अस्पतालों में इसका फायदा भी उठा चुके हैं। इनमें टाइफाइड, बुखार, छाती में दर्द और न्यूमोनिया जैसे मामले थे। इसमें एक निजी अस्पताल को बुखार के मामले में  1,000 रुपये का, टाइफाइड के मामले में 2,000 रुपये और आंखों के अस्पताल में एक कांट्रैक्ट सर्जरी के लिए 3,500 रुपये का भुगतान भी किया गया। सरकार और कंपनियां कार्ड के दुरुपयोग को लेकर चिंतित नहीं हैं। स्वरूप का कहना है कि इस कार्ड के साथ कोई छेड़खानी नहीं की जा सकती।

प्रत्येक सूचीबद्ध अस्पताल को 12,000 रुपये की लागत से स्मार्ट कार्ड रीडिंग सिस्टम लगाना होगा। वीरेंद्र कुमार बताते हैं कि जब भी कोई मरीज अस्पताल में आएगा तो उसके अंगूठे के निशान से उसकी ऑटोमेटिक एंट्री हो जाएगी। दिल्ली में तकरीबन 4.40 लाख लोग इसके कवर में आएंगे। उनका कहना है कि हमारी कोशिश यही रहेगी कि कम से कम लोग बीमार पड़ें जिससे इस कवायद से हमे फायदा मिल सके।

स्वरूप इस कार्ड की एक और खासियत बताते हैं। उनका कहना है कि लोग एक जगह से दूसरी जगह जाकर भी इस कार्ड का इस्तेमाल कर सकते हैं। यदि कोई कार्ड धारक कुछ समय के लिए दिल्ली जा रहा है और वह वहां जाकर बीमार पड़ जाता है तो किसी भी सूचीबद्ध अस्पताल में वह अपना इलाज करा सकता है। कार्ड को इस बात को ध्यान में रखकर भी तैयार किया गया है। स्वरूप ने बताया कि कार्डधारक को इससे पूरी आजादी भी मिलेगी। एक अधिकारी का कहना है कि सरकारी अस्पतालों के अलावा कार्डधारक 80 सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में भी जा सकेंगे।

First Published - July 23, 2008 | 10:57 PM IST

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