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गहनों के बाजार को अब मिला अध्यात्म का सहारा

Last Updated- December 07, 2022 | 6:00 PM IST

पिछले दो से तीन साल में ब्रांडेड ज्वैलरी का प्रचलन तेजी से बढ़ा है। अब 25 फीसदी से भी ज्यादा लोग ब्रांडेड ज्वेलरी लेना पसंद करते हैं। आभूषण बाजार में धार्मिक प्रतीकों वाले गहने बहुत तेजी से बिक रहे है।


वेदांत और शास्त्र पर आधारित गहने लोगों को बहुत पसंद आ रहे हैं। सोने की कीमतों के आसमान छूने के बावजूद इस तरह के गहनों की खरीदारी बढ़ी है। धार्मिक प्रतीकों वाले गहनों के रिचर्स और निर्माण में लगी ज्वेलरी कंपनी हैमर प्लस इंडिया की डायरेक्टर सुचेता खंडेलवाल कहती हैं कि भारत एक धार्मिक आस्था वाला देश है और सारी चीजों से लोगों की आस्थाएं जुडी होती हैं।

ऐसे में ज्वेलरी कोई अपवाद नहीं है। यही वजह है कि यह बाजार बहुत तेजी से बढ़ता जा रहा है और इस पर मंदी का असर पड़ता नहीं दिखाई नहीं देता। धार्मिक प्रतीकों वाले गहनों और सामान्य ज्वेलरी में अंतर यह है कि इसमें डिजाइन के साथ-साथ धातुओं के शास्त्र का भी ध्यान रखा जाता है ताकि ज्वेलरी ग्राहक के शुभ साबित हो।

सुचेता कहती हैं कि इस तरह की ज्वेलरी बनाने के पहले हम उस पर काफी रिसर्च करते हैं और उस धातु और प्रतीक से जुडे धार्मिक और सांस्कृतिक तत्वों पर भी गौर करते हैं ताकि ग्राहक जिस भावना से ज्वेलरी खरीद रहा है, उसे बरकरार रखा जा सके। धातुओं का डिजाइन इस तरह किया जाता है कि वे थ्री-डी इफेक्ट दे सकें। ज्वेलरी बनाने में शुभ प्रभाव वाली धातुओं का ही संयोग किया जाता है।

लोगों की जरूरत और उनकी खरीद क्षमता को ध्यान में रखकर ये ज्वेलरी तैयार की जाती हैं। देश में त्योहारों का मौसम शुरु हो चुका है और ये कंपनियां इसका फायदा उठाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। रक्षाबंधन के लिए कंपनियों ने जहां पवित्र सोने व हीरे जड़ित राखियां मौजूद हैं वहीं नवरात्र के लिए मां दुर्गा की सभी मुद्राओं में गहने उपलब्ध हैं।

महाराष्ट्र में गणेश महोत्सव को देखते हुए हैमर प्लस ने दिव्य विनायक नाम से गणेश की विभिन्न मुद्राओं में सोने-चांदी की हीरे और अन्य धातुओं से जड़ित पेंडेंट उतारे हैं। ये पेडेंट रूद्राक्ष, चक्र में भी उपलब्ध हैं। धर्मेंद्र ज्वेलर्स के धीरेन शाह का कहना है कि लोगों मे अब इन धार्मिक प्रतीकों वाले गहनों के प्रति काफी उत्सुकता देखी जा रही है। उनकी कुल बिक्री में इनकी हिस्सेदारी 40 फीसदी है और यह लगातार बढ़ती जा रही है।

उनका कहना था कि लोग भाग्य को बदलने वाली ज्वेलरीज को खरीदने में ज्यादा यकीन करते हैं। सुचिता खंडेलवाल कहती हैं कि इन ज्वेलरीज के पीछे के जुड़े रिसर्च और मेहनत की वजह से इनके दाम और सामान्य ज्वेलरी के दाम में कुछ फर्क भी होता है लेकिन आस्था और भावनाओं से जुडे होने की वजह से ये लोगों की पसंद बनती जा रही हैं।

बाजार के सवाल पर खंडेलवाल ने कहा कि यूरोप में तो धार्मिक प्रतीकों वाले गहनों का काफी प्रचलन हैं यहां तक कि कई हॉलीवुड स्टार और एक्ट्रेस ये ज्वेलरी पसंद करते हैं लेकिन भारत में अभी यह बाजार नया है। इसलिए इसमें ज्यादा प्रतियोगिता नहीं है। लेकिन अब तनिष्क, गीतांजलि, डी-डमास जैसी कंपनियां भी बड़े पैमाने पर बाजार में प्रवेश करने की तैयारी कर रहीं हैं।

First Published - August 20, 2008 | 10:57 PM IST

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