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जाग रहा है मंदी का राक्षस

Last Updated- December 07, 2022 | 11:00 AM IST

पिछले शुक्रवार को 13 तारीख नहीं थी, फिर भी काफी अपशकुनी साबित हुआ। महंगाई की दर इस हफ्ते 12 फीसदी के कुछ और करीब पहुंच गई।


महंगाई के लिए यह दर आखिरी बार 1990 के दशक में देखी गई थी। ऊपर से मई महीने के औद्योगिक उत्पादन सूचकांक ने इस कोढ़ में खाज का काम किया। मई में औद्योगिक उत्पादन घटकर केवल 3.8 फीसदी के स्तर पर आ गया है। इसके साथ ही इस वित्त वर्ष के पहले दो महीनों की मिली-जुली विकास दर पांच फीसदी के स्तर से भी नीची रही।

इस सूचकांक में सबसे ज्यादा हिस्सा रखने वाला निर्माण क्षेत्र मई में केवल 3.9 फीसदी की रफ्तार से बढ़ा, जिसके साथ ही अप्रैल और मई में इसकी विकास दर 5.3 फीसदी के स्तर पर पहुंच गई। मई में सबसे ज्यादा मार झेलनी पड़ी बिजली क्षेत्र को, जिसे केवल दो फीसदी की विकास दर ही नसीब हो पाई।

मतलब, इस सेक्टर ने वित्त वर्ष के शुरुआती दो महीनों में केवल 1.7 फीसदी की रफ्तार से तरक्की की। इस पूरे वाकये का मतलब यह है कि इस साल मुल्क के लिए नौ फीसदी की विकास दर सपना ही रहेगी। अगर वह 7.5 फीसदी के आंकड़े तक न भी पहुंचे तो भी वह आठ फीसदी से आगे नहीं बढ़ पाएगी।

जैसा पिछले साल की पहली छमाही में भी हो चुका है, इस वित्त वर्ष में भी निर्माण क्षेत्र की दुर्दशा की कथा बदस्तूर जारी है। पिछले साल तो बड़े-बड़े दिग्गजों के ढहने के बावजूद लकड़ी व उससे जुड़े उत्पादों और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थो ने सूचकांक को थामे रखा था। इस साल भी बड़े-बड़े तो जमीन की धूल फांक रहे हैं, लेकिन अप्रैल-मई में पेयपदार्थों और तंबाकू सेगमेंट ने मैदान संभाले रखा है। इन दोनों सेक्टरों ने वित्त वर्ष के पहले दो महीनों में 30 फीसदी से ज्यादा की विकास दर बनाए रखी है।

ऐसी हालत को देखते हुए विनिर्माण सेक्टर के बड़े और अहम सेक्टरों के प्रदर्शन पर नजर डालना काफी अहम हो जाता है। टेक्सटाइल सेक्टर जहां दो-तीन फीसदी की विकास दर के साथ गर्त में पहुंचा हुआ है, वहीं केमिकल्स सेक्टर तो अप्रैल-मई में 12 फीसदी की बुलंदियों को छू रहा है। परिवहन उपकरणों के लिए पिछला साल तो काफी बुरा साबित हुआ था, लेकिन 2008-09 के शुरुआती दो महीनों में इस सेक्टर ने धमाकेदार वापसी की। इन दो महीनों में इस सेक्टर ने 12 फीसदी की विकास दर हासिल की।

दूसरी तरफ, पिछले साल जब बाकी के सेक्टर गर्त की तरफ जा रहे थे तो मशीनरी और उपकरण सेक्टर ने काफी अच्छा प्रदर्शन किया था। लेकिन इस साल मई में यह पांच फीसदी के स्तर पर आ गया। इसके साथ ही इस सेक्टर की इन दो महीनों की मिली-जुली विकास दर घट कर 5.7 के आंकड़े पर पहुंच गई। यह इसलिए भी चिंताजनक है क्योंकि यह सेक्टर अर्थव्यवस्था में किए जा रहे निवेश का संकेतक होता है। इसमें गिरावट का मतलब है कि अर्थव्यवस्था बुरे दौर से गुजर रही है।

यह बात तो इस्तेमाल आधारित पूंजीगत वस्तुओं के सेगमेंट से भी झलक रही है। इस सेगमेंट ने मई में केवल 2.5 फीसदी की रफ्तार से तरक्की की। मतलब मुल्क में भारी वाहनों की बिक्री न के बराबर हुई है। धातुओं के सेक्टर में भी विकास की रफ्तार धीमी ही बनी हुई है। यहां ज्यादा कीमतों की वजह से मांग पर असर पड़ रहा है। यह पूरी तस्वीर यह बतला रही है कि मुल्क में सभी सेक्टर तो मुसीबत में नहीं हैं, लेकिन मंदी का राक्षस जाग रहा है।

First Published - July 13, 2008 | 11:34 PM IST

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