फिलहाल इस दौर के ऑटोमोबाइल बाजार में उतार चढ़ाव की गुंज़ाइश नहीं दिखती है।
इसके बाजार पर तेल की बढ़ती कीमतों और अर्थव्यवस्था की मंद होती वृद्धि दर से भी कोई खास फर्क नहीं पड़ा है।
स्टॉक मार्केट में तेजी से गिरावट जारी है। दूसरी ओर उद्योगों में भी मंदी और निवेश लागत में भी बढ़ोतरी के आसार नजर आ रहे हैं। बावजूद इसके भारत में लक्जरी कारों के बाजार का प्रदर्शन बेहतर है।
बिजनेस स्टैंडर्ड ने कार बनाने वाली कई कंपनियों और विदेशी कारों का आयात कर देश में उन कारों को बेचने वाले कई कारोबारियों से बात की। वे सब एक सुर में कहते हैं कि कारों की बिक्री काफी बढ़ रही है।
देश में पोर्शे और ऑडी कार का आयात करने वाली कंपनी श्रेयांस के सीईओ आशीष चोर्डिया का कहना है, ‘पिछले कुछ सालों में हमने देश में सुपर लग्जरी कारों की बिक्री में लगभग 55 प्रतिशत विकास दर देखा है।’ इसी संदर्भ में यह कहा जा सकता है कि पिछले तीन साल में सभी मशहूर श्रेणी की कार की बिक्री 12 प्रतिशत विकासदर को बनाए रखने में सक्षम रही है।
पिछले 2 वित्तीय वर्ष में 1.5 करोड़ और इससे ज्यादा कीमतों वाली सुपर लग्जरी कार मसलन लोंर्बोगिनी और बेंटले का आयात करने वाले दिल्ली के एक्सक्लूसिव मोटर्स की सलाना विकास दर 15 से 20 प्रतिशत तक रही। एक्सक्लूसिव मोटर्स के प्रबंध निदेशक सत्या बागला का कहना है कि हमारी कार का एक खास उपभोक्ता वर्ग है खासतौर पर दुनिया भर में छाए भारतीय लोग जो बेहतर कार खरीदने के लिए पैसे खर्च करने को तैयार है और उन्हें लग्जरी कारों की समझ भी होती है।
इस साल के पहले चार महीनों में मर्सीडीज बेंज की बिक्री पहले से ही पिछले साल की कुल बिक्री के लगभग आधा से भी ज्यादा है। जनवरी-अप्रैल 2008 तक 1,330 कारें बिक चुकी हैं। पिछले साल हर महीने में कारों की औसत बिक्री 208 थी जिसकी संख्या इस साल बढ़कर 330 हो गई है।
भारत में बीएमडब्ल्यू की अपनी मुहिम के जरिए इसकी कार और एसयूवी की बिक्री में 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई। इस जर्मन कार की बिक्री 2006-07 में 644 थी,जो 2007-08 में बढ़कर 804 हो गई। इस साल के पहले चौथे महीने तक 1,079 कारों की बिक्री हो चुकी है जबकि 2007 में इसने 1387 कारों की बिक्री की थी। कारों की कुल बिक्री में आधा से ज्यादा 5 सीरीज की कारों की बिक्री होती है जिसकी कीमत 37-42 लाख है।
कंपनी की यह उम्मीद कायम है कि 2010 तक एक साल में 10,000 कारों की बिक्री का आंकड़ा तय कर लेंगे जो अभी साल भर 5000 कारों की बिक्री तक ही सीमित है। एक विश्लेषक का कहना है कि लग्जरी कारों की बिक्री में हाल के दिनों में इसलिए बढ़ी है क्योंकि नई पीढ़ी के ज्यादा काम करने वाले मेहनती लोग ब्रांड को ज्यादा तव्वजों देते हैं क्योंकि यह उनकी सफलता और स्टेटस से जुड़ा मामला है।
भारत में मर्सीडीज बेंज(कॉरपोरेट मामले) के निदेशक सुहास काडलास्कर का कहना है,’मर्सीडीज लेने वाले ज्यादातर युवा लोग हैं। पहले जहां इन कारों को लेने वाले लोग 45 साल की उम्र के होते थे वहीं अब इन कारों के उपभोक्ता वर्ग में 35 साल का युवा वर्ग भी शामिल है।’ सुहास कहते है कि उद्योगपति के अलावा फिल्म स्टार, कंपनियों के खास लोगों के अलावा युवा पेशवरों मसलन डॉक्टर, सीए, वकील और सॉफ्टवेयर प्रोफेशनल हमारें कार के लिए ज्यादा पैसे खर्च करने में कोई कोताही नहीं बरतते।
दिलचस्प बात यह है कि 2007 में मर्सीडीज बेंज की कुल बिक्री का लगभग 15 प्रतिशत कोल्हापुर, मदुरई, नासिक, जयपुर और चंडीगढ़ जैसे मध्यम श्रेणी के शहरों में हुई। कंपनी ने लगभग 100 एस क्लास मर्सीडीज कारों के बेहतरीन मॉडल को बिके वहीं 2007 में औसतन हर महीने 37 कारें बिकी। इस बेहतरीन मॉडल की कीमत लगभग 90 लाख है।
इन कारों की कीमत ज्यादा आयात कर की वजह से बढ़ गईं हैं। लग्जरी कार का आयात रेडीमड सामान के तौर पर किया जाता है जिसके लिए 114 प्रतिशत कर लगता है और लगभग 50 प्रतिशत बिक्री के लिए बैंक पैसा मुहैया कराती है। हालांकि खरीदार इस बात पर ज्यादा ध्यान नहीं देते।
चोर्डिया का कहना है,’कुछ लग्जरी चीजों का बाजार कभी खत्म नहीं होता और इसमें स्थिरता नहीं आती। इसकी वजह यह है कि कारों के ज्यादातर खरीदार बाजार के उतार-चढ़ाव को देखकर अपनी लाइफ स्टाइल में कोई बदलाव नहीं लाते।’
आप कह सकते है कि लग्जरी बाइक पैसे वाले लोगों या फिर ऊपरी मध्यवर्ग का वह हिस्सा जिनके जीवन स्तर में लगातार बढ़ोतरी का दौर आ रहा है ,यह उसकी एक बानगी है। अंतरराष्ट्रीय जगत में जापान और यूरोप की बेहतरीन बाइक निर्माता कंपनियों के साथ लग्जरी कारों का जर्मन ब्रांड भी अपने बेहतरीन मॉडल को पेश करने में लगा है। इन कारों और बाइक की बढ़ती बिक्री के रिकॉर्ड से यह गलतफहमी खत्म होती है कि भारत लग्जरी बैं्रड के लिए बेहतर बाजार नहीं है।
इस पर विचार करें- यामाहा इंडिया ने दुनिया भर में मशहूर अपनी 2 बाइक वाइजेडएफ आर1 और एमटी 01 को पिछले दिसंबर को भारत में लॉन्च किया । कंपनी ने 2008 तक जितनी बाइक बेचने का लक्ष्य तय किया था उसे महज तीन महीने में ही पूरा कर लिया। अगर बाइक की कीमतों की बात करें तो एक बाइक की कीमत लगभग 10.50 लाख है। इसे मुंबई शो रूम में देखा जा सकता है।
फिलहाल कंपनी इस होड़ में लगी है कि कुछ ऐसा इंतजाम किया जाए ताकि इस बाइक को बनाने वाली मूल जापानी कंपनी से ज्यादा से ज्यादा बाइक खरीद ली जाए। यह कंपनी अब जल्द ही मुंबई में अपना आउटलेट खोलने वाली है जहां इस तरह के बाइक की बिक्री की जाएगी। उसके बाद यह कंपनी नई दिल्ली, अहमदाबाद, चेन्नई, बेंगलुरु जैसे शहरों में भी अपने शो रूम खोलेगी। इन बाइकों की कुल बिक्री के लगभग 30 यूनिट बंगलोर का हिस्सा रहा है।
यामाहा इंडिया के प्रोडक्ट, प्लानिंग और स्ट्रैटेजी के डिवीजनल हेड संजय त्रिपाठी का कहना है-‘भारते में हमारे सुपर बाइक का रिस्पांस बेमिसाल रहा है। हम लोगों को यह अंदाजा ही नही था कि इतनी ज्यादा तादाद में बिक्री हो सकती है। यह ऐसा क्षेत्र था जहां किसी निर्मार्णकत्ता ने कोशिश नहीं की थी। हमने भारतीय बाजार में यह प्रयोग किया और अब यह आश्चर्य नहीं है कि दूसरे भी ऐसी कोशिश करने में जुट गए हैं।’
इटली के एक मशहूर ब्रैंड डुकाती ने भारत में लग्जरी मॉडल का बढ़ते बाजार को देखते हुए पिछले हफ्ते ही भारत में अपने बै्रंड को उतारने की घोषणा की है। यह कंपनी 15 से 50 लाख की विदेशी बाइकों को बेचने के लिए प्रिसीजन मोर्टस के साथ साझेदारी करते हुए अपना आउटलेट खोलेगी।
दूसरे बाइक निर्माता मसलन होंडा, सुजुकी, तिरंफ, एमवी आगस्टा भी अपनी बाइक की अलग रेंज को लॉन्च करने की कोशिश जरूर करेंगे। ज्यादातर बाइक बनाने वाली कंपनियां अभी बाजार पर अपनी निगाह रखे हुए हैं या किसी स्थानीय कंपनी के साथ अपना गठजोड़ पूरा करने की जुगत में हैं।