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यह है घाटे की ऊंची उड़ान

Last Updated- December 07, 2022 | 4:42 AM IST

एयरलाइन का धंधा गलाकाट प्रतियोगिता वाले माहौल में घाटे का सौदा होता है। इसीलिए तो आज भले ही एयरलाइन कंपनियों के उड़नखटोले आसमान की ऊंचाइयों को छू रहे हों, लेकिन उनके बही-खाते घाटे गर्त में डूबे जा रहे हैं। वजह एक नहीं, कई हैं।


इस धंधे में उतरने की राह में आने वाली बाधाएं आज कम हो चुकी हैं। हवाई जहाजों को किराए पर लिया जा सकता है। ग्राउंड हैंडलिंग के काम को भी ऑउटसोर्स किया जा सकता है। ऐसे तजुर्बेकार लोगों की भी कमी नहीं है, जो पूरे के पूरे काम को काफी सुचारु रूप से चला सकते हैं।

साथ में, लोगों को भी कम किराए पसंद हैं। इसी वजह से लोग-बाग सुविधा नहीं, बल्कि किराए को ध्यान में रखकर एयरलाइन का चयन करते हैं। इस वजह से हवाई सफर दिनोंदिन बेहतर होने बजाए बदतर होता जा रहा है। खुद को दूसरे से बेहतर साबित करने की कोशिश पर भी पैसे खर्च होते हैं।

ऊपर से इसमें इन एयरलाइन कंपनियों के मालिकों की ठसक का तड़का लगा दीजिए और आपके पास मोटे घाटे का जबरदस्त मसाला तैयार हो जाएगा। इसलिए भारतीय एयरलाइनों को बिना लागत की सोचे हुए दिन दूनी, रात चौगुनी रफ्तार से अपना विस्तार करते देख हैरानी होती। इसी वजह से आशंका है कि देसी एयरलाइनों को इस साल 8000 करोड़ रुपये का तगड़ा चूना लगने वाला है। अगर उन्हें इससे बचना है तो उन्हें फौरन कुछ करना पडेग़ा।

पिछले साल भले ही कारोबार अच्छा रहा, लेकिन उससे इस साल भी फायदा हो, यह जरूरी नहीं है। हमें अंतरराष्ट्रीय हालात को भी ध्यान में रखना होगा, जो ज्यादा अलग नहीं हैं। आलम यह है कि हर हफ्ते एक बड़ी एयरलाइन अपना बोरिया बिस्तर बांधने में जुटी हुई है। इनकी हालत तो 2000 से ही खराब है, लेकिन 2007 में सुधार के कुछ संकेत मिले थे।

मगर तेल की चढ़ती कीमतों ने सारी उम्मीदों पर फिर से पानी फेर दिया। अमेरिका की तो एक ऐसी एयरलाइन नहीं बची है, जो या मुसीबत में या फिर दिवालिया होने के कगार पर न हो। कॉन्टिनेंटल आजकल बड़े पैमाने पर छंटनी करने में जुटी है। कई बड़ी यूरोपीय एयरलाइनों को तो दूसरी एयरलाइन या तो अधिग्रहित कर चुकी हैं या फिर हथियाने की कोशिश कर रही हैं।

दूसरी तरफ, एमिरेट्स, कतर, सिंगापुर या फिर जेट और किंगफिशर जैसी एशियाई एयरलाइनें विस्तार करने में जुटी हुई हैं। जेट और किंगफिशर जैसी एयरलाइनों ने नए हवाई जहाजों के ऑर्डर दे दिए हैं। ऊपर से  इंडिगो ने भी अपने लॉन्च के टाइम पर ही यह कह दिया था कि उसकी योजना 100 विमानों का एक बेड़ा खड़ा करने की है। 

इंटरनैशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन का कहना है कि एयरलाइन उद्योगों के मुनाफा कमाने की राह में 3500 संधियां आ रही हैं, जो लैंडिंग राइट्स को भी निर्धारित करती हैं। वह इन्हें खत्म करने की मांग कर रहा है, ताकि क्षमता का पूरा इस्तेमाल हो सके और किराए से मुनाफा कमाया जा सके। हालांकि, अमेरिका से मिली सीख तो यही बताती है कि एक खुला और प्रतियोगिता के अनुकूल माहौल मुश्किलों को हल करने के बजाए नई मुश्किलें ही खड़ी कर सकता है।

First Published - June 9, 2008 | 11:18 PM IST

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