रामकृष्ण शेट्टी सरकारी इंश्योरेंस कंपनी जीवन बीमा निगम के एजेंट होने के अलावा वित्तीय सलाहकार का भी काम करते हैं।
हालांकि इस 44 साल के शख्स को ऐसा एजेंट समझने की भूल बिल्कुल नहीं करें, जो नई पालिसी के लिए राह चलते आपके पीछे पड़ जाता हो। शेट्टी करोड़ों में खेलने वाले एजेंट हैं जो महंगी कार की सवारी करते हैं। शायद ऐसी कार जिसे जिसे खरीदना उनके कई ग्राहकों के लिए संभव नहीं है।
इतना ही नहीं शेट्टी की योजना एक एयरलाइन भी शुरू करने की है। उन्होंने 180 सीट की क्षमता वाला बोइंग विमान खरीदने का ऑर्डर दिया है और एक सलाहकार को बिजनेस प्लान तैयार करने को कहा है। इस बीच उनका पर्सनल हेलिकॉप्टर भी जल्द ही आने वाला है और जल्द ही वह हेलिकॉप्टर रखने वाले देश के पहले बीमा एजेंट बन जाएंगे। शेट्टी की बजट एयरलाइन शुरू करने की योजना है, जो घरेलू रूटों पर उड़ान भरेगी।
उनकी उम्मीदें जल्द चालू होने वाले एयरपोर्ट शिमोगा पर टिकी हैं, जो उनके अपने शहर चिकमंगलूर से 60 किलमोटर की दूरी पर स्थित है। लो-कॉस्ट एयरलाइनों में चल रही गलाकाट प्रतिस्पर्धा से वह ज्यादा चिंतित नजर नहीं आते। उन्हें भरोसा है कि वह इस हालात में भी इस बिजनेस में अपना मुकाम हासिल करने में सफल होंगे।
फिलहाल उनके इस प्रोजेक्ट की देखरेख का जिम्मा एक सलाहकार कंपनी को सौंप दिया गया है। सलाहकार कंपनी रूट और बिजनेस मॉडल के बारे में मार्च 2009 के अंत तक योजना तैयार करेगी। बहरहाल एक बात तय है कि शेट्टी नई ‘उड़ान’ भरना चाहते हैं और इसमें आने वाली हर बाधाओं से निपटने के लिए वह तैयार हैं।
अगर कोई शख्स उनसे बचपन में मिला होता तो उसे बिल्कुल भी इस बात पर यकीन नहीं होता कि वह एक दिन विजय माल्या और नरेश गोयल की कतार में खड़े होंगे। शेट्टी के माता-पिता चिकमंगलूर में कॉफी बगान में मजदूरी करते थे। उनके पिता ने अपना पेट काटकर अपने दोनों बेटों को पढ़ाया। शेट्टी दोनों भाईयों में छोटे थे।
अपने बचपन के दिनों को याद करते हुए शेट्टी ने बताया, ‘हमारे परिवार के लोग दिन भर में एक बार ही खाना खाते थे और वह भी मांड़-भात। मुझे इस बात पर काफी दुख होता था कि हमारी पढ़ाई-लिखाई के लिए मेरे माता-पिता को इतनी मुश्किलें झेलनी पड़ रही हैं।’
इसके मद्देनजर उन्होंने अपनी पढ़ाई छोड़ने का मन बना लिया था, लेकिन तभी उन्होंने मुंबई में नाइट स्कूल होने की बात सुनी। अपने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए दिन में काम और रात में पढ़ाई करने के आइडिए ने उन्हें काफी आकर्षित किया। मुंबई पहुंचकर उन्होंने मछली बाजार स्थित कैंटीन में नौकरी कर ली।
कैंटीन में वह टेबल और बर्तनों को साफ करने का काम करते थे। साथ ही किचन में भी अपनी सेवाएं देते थे। इसके बदले उन्हें हर महीने 300 रुपये महीने के अलावा रहने के लिए जगह और खाना भी मिलता था। शेट्टी ने बताया, ‘सुबह 5 बजे से 9 बजे तक मैं कैंटीन में और 9.30 बजे से शाम 5 बजे तक किसी चार्टर्ड अकाउंटेंट फर्म में काम करता था। इसके बाद बाकी वक्त मैं कॉलेज में गुजारता था।’
उनकी यह दिनचर्या रात के 11 बजे खत्म होती थी और इसके बाद उन्हें कैंटीन में बर्तनों को भी साफ करना पड़ता था। शेट्टी के मुताबिक, पढ़ाई और सोने के लिए उनके पास कुल मिलाकर बमुश्किल से 4 से 5 घंटे का वक्त होता था। वह कहते हैं कि यह दौर उनके लिए काफी मुश्किल भरा था।
इसी दौरान उनकी मुलाकात जीवन बीमा निगम के एक डेवलपमेंट ऑफिसर से हुई, जिसने उनकी जिंदगी को पूरी तरह से बदलकर रख दिया। हालांकि एलआईसी एजेंट के रूप में उनका पहला 4 साल बहुत अच्छा नहीं रहा। इस दौरान वह बमुश्किल से अपनी एजेंसी बचाने के लिए जरूरी रकम ही जमा कर पाते थे।
1990 में उनका मासिक आय 10 हजार से भी कम थी, जो किसी ढंग के बिजनेस को शुरू करने के लिए बिल्कुल पर्याप्त नहीं थी। 1995 में बेंगलुरु में शेट्टी की मुलाकात मोटिवेशनल स्पीकर लोगान नायडू से हुई। इसके बाद उनकी जिंदगी में चीजें बदलने लगीं। नायडू के माध्यम से उन्हें ट्रेड असोसिएशन राउंड टेबल (एमडीआरटी) के बारे में जानकारी मिली, जिसने उनके लिए प्रेरणास्त्रोत का काम किया।
उन्होंने 2.88 लाख कमीशन अर्जित कर एमडीआरटी के लिए क्वॉलिफाई किया। इसके बाद शेट्टी ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। 2007-08 के दौरान सिर्फ कमीशन से प्राप्त होने वाली उनकी आय 1.3 करोड़ रुपये रही। शेट्टी कहते हैं कि आपकी जरूरत आपके ग्राहक और आपके लिए सबसे बड़ा प्रेरणास्त्रोत हो सकी है। वह कभी भी आर्थिक रूप से संतुष्ट नहीं होना चाहते हैं, क्योंकि वह हमेशा रेस में बने रहना चाहते हैं।