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ग्रीन फोर्स के दो युवाओं ने छेड़ा साइकिल का तराना

Last Updated- December 07, 2022 | 6:02 AM IST

इस जमाने में जब भी वाहनों की बात की जाती है तो आमतौर पर कार का ही नाम लिया जाता है।


तेल की बढ़ती कीमतों के बावजूद भले ही कारों की संख्या में बहुत ज्यादा कमी नहीं आ रही है लेकिन लोग विकल्प ढूंढ़ने की कोशिश में तो जरूर जुटे हैं। इनमें से एक विकल्प है, साइकिल जिसे बच्चों या बेहद कम आय वाले लोगों की सवारी मानी जाती है।

वैसे साइकिल की सवारी का मजा तो लोग गाहे- बगाहे शौक के तौर पर किया करते हैं। लेकिन आपको पता होना चाहिए की साइकिल की रफ्तार भी नए जमाने की युवा पीढ़ी को भा रही है। जी हां, आप बेंगलुरु के दो साफ्टवेयर इंजीनियर रोहन किनी और निखिल एलदुरकर ऐसे हैं जो साइकिल की सवारी बड़े शान के साथ करते हैं। इन दोनों ने अपने ब्लॉग के जरिए भी धूम मचा रखी है और लोगों को साइकिल के फायदे भी बताते हैं। हालांकि पेशे से ये दोनों साफ्टवेयर इंजीनियर हैं।

लगभग तीन साल पहले किनी ने यह फैसला किया था कि वह साइकिल की ही सवारी करेंगे। किनी साउथ बेंगलुरु के जयानगर में रहते थे वहां से उनके काम वाली जगह 11 किलोमीटर दूर थी। शहर के ट्रैफिक जाम से दूर निकलना बेहद मुश्किल भरा काम था। एक दिन किनी ने एलदुरकर की पुरानी बीएसए साइकिल ली।

किनी याद करते हुए कहते हैं, ‘मैंने यह पाया कि मैं 45 मिनट में ही अपने काम वाली जगह पर पहुंच जाता था। मुझे आने जाने में भी कोई ज्यादा परेशानी नहीं होती थी। इसमें या किसी गाड़ी की सवारी करने में कोई ज्यादा अंतर नहीं था। इसका एक फायदा तो यह भी था कि यह पर्यावरण में कोई प्रदूषण भी नहीं फैलाती।’ उसके बाद एलदुरकर ने भी इसी साइकिल के जरिए नौकरी पर जाना शुरू किया।

लगभग एक डेढ़ साल के बाद इन दोनों ने यह महसूस किया कि उनकी साइकिल को थोड़ा अपग्रेड किया जा सकता है। उसके बाद वे लोग पहाड़ी रास्तों पर चलने वाली आयातित साइकिल यानी इंर्पोटेड माउंटेन बाइक खरीदने के लिए गए। लेकिन उन्हें ऐसी कोई बाइक नहीं मिली और न ही किसी ने कोई सही बाइक के  बारे में ही कुछ बताया। वे कहते हैं, ‘यह महज एक बिजनेस था और सभी मामले बिक्री को लेकर ही थे। कई साइकिल चलाने वालों को यह अनुभव हो रहा था।’

इस तरह बम्स ऑन दी सैडल यानी बॉट्स ब्लॉग का जन्म हुआ। इत्तेफाक से साइकिल निर्माता टे्रक जब भारतीय बाजार में आने की सोच रही थी और उसके  लिए प्रचार का काम मशहूर साइकलिस्ट लांस आर्मस्ट्रांग कर रहे थे। बेहद मशहूर यह कंपनी साइकिल की डीलरशिप से कुछ बेहतर काम करना चाहती थी । इसके लिए किनी और एल्दुरकर ही सबसे बेहतर साबित हो सकते थे। यूके की साइकिल निर्माता कंपनी फायरफॉक्स ने भी इन दोनों को अपने साथ जोड़ना चाहा।

हालांकि इन दोनों युवाओं ने यह बहुत पहले समझ लिया था कि वे अपने करियर को बदल नहीं सकते और न ही वे साइकिल बेचने का काम शुरू कर सकते हैं। शायद यही वजह थी कि उन लोगों ने इंटरनेट के जरिए बम्स ऑन दी सैडल डॉट कॉम की वेबसाइट पर काम करना शुरू कर दिया। इस वेबसाइट पर बेहद खूबसूरत डिजाइन वाली साइकिलों की एक बड़ी रेंज दिखाई जाती है जो सड़कों पर चल रही हैं और जो काफी पुरानी भी हैं। इन साइकिलों की कीमत 14,000 रुपये से लेकर एक लाख से ऊपर तक है।

आज इस वेबसाइट को लांच हुए लगभग डेढ़ साल होने को है और इसके जरिए लगभग 130 पुरानी साइकिलें बेची जा चुकी हैं। कई खरीदार भी इस वेबसाइट की प्रशंसा करते हैं। बॉट्स ब्लॉग अपने आप में पूरा है। इसके जरिए सभी बाइक चलाने वाले अपने अनुभव भी बांटते हैं। इन दोनों सॉफ्टवेयर इंजीनियरों ने अपनी कोशिश को केवल साइकिल तक ही सीमित नहीं किया है बल्कि उन्होंने अपने दोस्तों के साथ मिलकर अपने आस-पास जगहों पर पेड़ लगाने का अभियान भी छेड़ दिया है। शायद इसी लिए उन्होंने अपने समूह का नाम दिया गया है ग्रीन फोर्स जो शायद उनके मकसद को ही बयां करती है।

First Published - June 17, 2008 | 11:25 PM IST

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